फोन टेपिंग मामला: दूसरों की बातें सुनने के लिए देना पड़ा था कर्नाटक के सीएम हेगड़े को इस्तीफा, कई और मामलों ने मचाई थी राजनीति में हलचल


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जयपुर13 मिनट पहले

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रामकृष्ण हेगड़े, ए राजा और नीरा राडिया। फाइल फोटो।

राजस्थान में फोन टेपिंग का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। विधानसभा में सरकार की इस बात को लेकर स्वीकारोक्ति कि सरकार ने तब फोन टेप कराए थे, राज्य के सियासी हलकों में बवाल मचा है। कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की नाराजगी के दौरान पिछले वर्ष इसी तरह के आरोप लगे थे कि गहलोत सरकार ने पायलट खेमे के मंत्रियों व विधायकों के फोन टेप कराए थे। इसके बाद अब बजट सत्र में यह मामला ऑन पेपर सामने आया है, जिसमें सरकार ने माना है कि तय प्रक्रिया के तहत फोन टेप कराए गए थे।

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा है कि तब मंत्रियों व विधायकों के फोन टेप कराए गए थे या नहीं, लेकिन समय और मामले की एकरूपता के कारण इसे पायलट खेमे के मंत्रियों व विधायकों के फोन टेप प्रकरण से जोड़ा जा रहा है। पूर्व में भी इस तरह के फोन टेप किए जाने के मामलों में कई सरकारें संकट में आ चुकी हैं। कर्नाटक सरकार को तो एक बार ऐसे ही मामले में इस्तीफा तक देना पड़ा था।

वर्ष 1988 में कर्नाटक में रामकृष्ण हेगड़े की सरकार थी। इसी दौरान फोन टेपिंग का मामला सामने आया, जिसके कारण मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने इस्तीफा दे दिया था। मामला यह था कि तब हेगड़े की सरकार के समय डीजीपी ने 50 से अधिक नेताओं व मंत्रियों के फोन टेप कराने के आदेश दिए थे। असल में तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। गांधी बोफोर्स मामले में विपक्ष से घिरे हुए थे। तब जनता पार्टी की हेगड़े की सरकार के खिलाफ केंद्र को जांच का मौका मिल गया। इस तरह के दबाव में आकर फोन टेपिंग के इस चर्चित मामले में इस्तीफा देना पड़ा था।

अंतागढ़ टेप कांड

छत्तीसगढ़ में अंतागढ़ टेपकांड भी चर्चा का विषय रहा है। इसके खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल जैसी स्थिति हो गई थी। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव थे। अंतागढ़ से विधायक विक्रम उसंडी को भाजपा ने टिकट दिया। सीट खाली हुई तो उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने अंतिम समय में नाम वापस ले लिया। इससे भाजपा की जीत हो गई। इसके बाद भूचाल तब आया, जब एक टेप वायरल हुआ। दावा किया गया कि इस टेप में पूर्व सीएम अजीत जोगी, उनके बेटे और तत्कालीन सीएम रमन सिंह के दामाद की आवाज थी। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी को नाम वापस लेने के बदले 7 करोड़ रुपए देने की बात सामने आई थी। इस पर कांग्रेस ने शिकायत दर्ज कराई। मामला कोर्ट में आज भी पेंडिंग है।

नीरा राडिया टेप कांड

नीरा राडिया टेप कांड सबसे चर्चित कांड रहा हे। आयकर विभाग ने 2008 से 2009 के बीच नीरा राडिया और कुछ राजनेताओं व कॉरपोरेट घरानों के बीच वार्ता को टेप किया था। इसमें कुछ पत्रकार भी शामिल थे। नीरा राडिया पर पॉलिटिकल लॉबिंग का भी आरोप लगा था। टेप कांड के बाद खुलासा हुआ कि राडिया किस नेता को कौनसा मंत्री पद दिया जाएगा, ऐसी लॉबिंग करती थी। इसमें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा का भी नाम सामने आया था।

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