बंगाल हिंसा का मामला राष्ट्रपति के पास: 114 प्रोफेसर्स की राष्ट्रपति से अपील- बंगाल में दलितों और पिछड़ों पर हो रही हिंसा रोकिए


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नई दिल्ली3 मिनट पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। एससी-एसटी समुदाय से जुड़े 114 प्रोफेसर्स ने उनसे बंगाल में हिंसा रोकने के अपील की।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हुई हिंसा को लेकर एससी-एसटी समुदाय से जुड़े 114 प्रोफेसर्स ने राष्ट्रपति से अपील की है। इन प्रोफेसर्स ने कहा है कि बंगाल में दलितों और पिछड़ों पर हो रही हिंसा रोकी जाए। दरअसल, बंगाल में जारी हिंसा पर सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट (CSD) संस्था ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कहा गया है कि हिंसा में सबसे ज्यादा निशाना दलित और पिछड़ा वर्ग को बनाया गया।

CSD से जुड़े राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों से जुड़े 114 प्रोफेसर्स ने इस याचिका पर साइन किए हैं। राष्ट्रपति के बाद अब इस याचिका को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भी यह याचिका सौंपी जाएगी।

144 प्रोफेसर्स ने राष्ट्रपति से रखी ये 3 मांगें

  1. इस हिंसा में अनाथ हुए बच्चों की परवरिश, मेडिकल सहायता और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
  2. बेघर हुए लोगों को उनके घर बनाकर दिए जाएं, नुकसान का आकलन कर मुआवजा मिले।
  3. जिस परिवार ने अपना सदस्य खोया है उसे नौकरी या फिर रोजगार स्थापित करने में मदद मिले।

दलितों-पिछड़ों की मकान-दुकान फूंकी गई, हत्या तक हुई- रिपोर्ट
CSD की एक कमेटी ने बंगाल जाकर तीन दिन तक हिंसा पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर आंकड़े इकट्ठे किए। इस संस्था के सदस्य और दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजकुमार फुलवारिया ने बताया, “छानबीन और पड़ताल के बाद तैयार रिपोर्ट में पाया गया कि हिंसा पीड़ितों में से तकरीबन 60 प्रतिशत लोग दलित, पिछड़ा और आदिवासी तबके के हैं। इनमें से अधिकांश लोगों के घर जला दिए गए, दुकानें फूंक दी गईं, कई परिवारों के सदस्य तो जान से मार दिए गए। इनमें से कई ऐसे थे, जिनके घर में यही एक शख्स कमाने वाला था।’

संस्था के सदस्य राजस्थान के राजसमंद में स्थित मोहन लाल सुखारिया विश्वविद्यालय में प्रो. सोहल लाल गोंसाईं कहते हैं, “इसमें कोई शक नहीं कि राज्य की मिली भगत से इस हिंसा को अंजाम दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा दलित और पिछड़ा वर्ग को निशाना बनाया गया है। लिहाजा इस पर देश की सरकार को कदम उठाना चाहिए पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा देनी चाहिए और गुनहगारों को सजा देनी चाहिए।’

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