बड़ी सफलता: चंडीगढ़ में पहली बार स्वैपिंग से एक साथ तीन किडनी ट्रांसप्लांट सक्सेस, PGI में 41 डॉक्टरों और स्टाफ ने 12 घंटे में की सर्जरी


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चंडीगढ़एक घंटा पहले

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श्रीनगर की 55 साल की मां 30 साल के बेटे को किडनी डोनेट करना चाहती थी, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा था। इसके बाद उन्होंने शिमला के युवक किडनी डोनेट करने का फैसला किया।

श्रीनगर की एक मां अपनी किडनी देकर बेटे की जिंदगी बचाना चाहती है, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच नहीं होता। शिमला में एक बहन अपने भाई की जिंदगी बचाने के लिए जूझ रही है, क्योंकि उसका भी खून अलग है। उधर, उत्तराखंड में एक पत्नी को भी किडनी चाहिए। ब्लड ग्रुप भी मैच है, लेकिन पति ह्यूमन ल्यूकोसाइटिस एंटीजन (एचएलए) मैच न होने से वह किडनी दे नहीं सकता।

अब इन तीनों को किडनियां मिल गई हैं। तीनों परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को किडनी देकर यह मुमकिन किया है। 41 डॉक्टरों और स्टाफ की देखरेख में 12 घंटे की यह सर्जरी शुक्रवार सुबह की गई। पीजीआई में यह पहला मौका है, जब स्वैपिंग से एक साथ तीन किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं।

यह संयोग ही है कि इस केस में तीनों परिवार अलग-अलग धर्म से हैं। श्रीनगर में रहने वाला परिवार मुस्लिम है, उत्तराखंड में रहने वाला परिवार सिख और शिमला में रहने वाला परिवार हिंदू है। रीनल सर्जरी ट्रांसप्लांट के एचओडी प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि लोग ऐसे ही आगे आएंगे तो किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

श्रीनगर- मां की ममता थी, पर ब्लडग्रुप मैच नहीं

श्रीनगर की 55 साल की मां 30 साल के बेटे को किडनी डोनेट करना चाहती थी, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा था। मां का ब्लड ग्रुप ए-निगेटिव और बेटे का ओ-पॉजिटिव था। यानी डोनर ओ-पॉजिटिव ग्रुप का ही होना चाहिए। इस मां ने शिमला के युवक किडनी डोनेट की।

शिमला-भाई के लिए बहन ने दी किडनी

26 साल के युवक को लंबे अरसे से किडनी की बीमारी थी। 29 साल की बहन ब्लड ग्रुप अलग होने के कारण किडनी डोनेट नहीं कर सकती थी। अब उस भाई को श्रीनगर की महिला ने किडनी दी है। जबकि शिमला की बहन ने किडनी उत्तराखंड की महिला को डोनेट की।

उत्तराखंड- पत्नी के लिए पति ने दी किडनी

​​​​​​​45 साल की महिला 10 साल से किडनी की दिक्कत से जूझ रही थी। 45 साल के पति किडनी देने को तैयार थे, लेकिन ह्यूमन ल्यूकोसाइटिस एंटीजन मैच नहीं था। शिमला की बहन की किडनी इसी पेशेंट को लगी, जबकि महिला के पति ने श्रीनगर के युवक को अपनी किडनी दी।

सभी मरीज स्वस्थ हैं। डोनर्स को दो दिन बाद हॉस्पिटल से छुट्‌टी दे दी जाएगी। जिनका ट्रांस्पलांट किया गया है उन्हें 5 से 7 दिन में छुट्‌टी दी जाएगी। पीजीआई में 2 स्वैप ट्रांसप्लांट पिछले तीन-चार साल से हो रहे हैं। 30 ट्रांसप्लांट हो चुके हैं इस तरह के।

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