बिहार में टीचर बहाली का रास्ता साफ: 1.25 लाख भर्ती अब जल्द हो सकेगी, दिव्यांगों को 4% आरक्षण और आवेदन के लिए मिलेंगे 15 दिन


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पटना13 मिनट पहले

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छठे चरण के शिक्षक बहाली का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने गुरुवार को नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड की शर्त को मान लिया है। सहमति पत्र सरकार ने पटना हाईकोर्ट में भी सब्मिट कर दिया है। इसके साथ ही अब बहाली पर लगी रोक को हटा लिया गया है।

आपको बता दें कि बिहार सरकार ने 1.25 लाख (प्राथमिक+ हाई स्कूल) शिक्षकों की बहाली जून 2019 में निकाली थी, लेकिन कोर्ट के पचड़े से अब तक पूरी नहीं हो पाई है। अब अगर नया केस नहीं हुआ तो बहाली जल्द पूरी हो सकती है।

फेडरेशन की क्या थी शर्तें, जिस पर बनी सहमति
नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड के जनरल सेक्रेटरी और वकील एस. के. रूंगटा ने भास्कर को बताया कि फेडरेशन ने पिछली सुनवाई के समय कोर्ट में कहा था कि जब दिव्यांगों के लिए सही तरीके से वैकेंसी ही नहीं निकाली गई तो इसमें दिव्यांग अभ्यर्थी अप्लाई भी नहीं कर सके हैं। इसलिए 15 दिनों के अंदर फिर से नोटिफाई करके दिव्यांगों से आवेदन मांग लिए जाएं। 15 दिन के बाद मैरिट की तैयारी कर ली जाए और इसी वैकेंसी के जरिए बहाली प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

फेडरेशन की इस मांग पर पिछली बार की सुनवाई के समय सरकार तैयार नहीं हुई थी। सरकार का कहना था कि दिव्यांगों की 4 फीसदी सीटें छोड़ कर बाकी पर नियोजन प्रक्रिया चलाने की हरी झंडी दी जाए, लेकिन फेडरेशन इस पर तैयार नहीं था और इसलिए कोर्ट ने 3 जून को सुनवाई की तारीख निर्धारित की थी। लेकिन 3 जून को सरकार ने फेडरेशन की राय मान ली है। कोर्ट में बहस की कोई जरूरत ही नहीं पड़ी।

वैकेंसी नोटिफाई करेगी सरकार
रुंगटा ने बताया कि सरकार की ओर से पत्र में कहा गया है कि जिलेवार और दिव्यांगतावार कहां-कितनी वैकेंसी है, इसे नोटिफाई करेगी। इस नोटिफिकेशन के 15 दिन तक दिव्यांग अप्लाई कर सकते हैं। उसके बाद दिव्यांगों के आवेदनों को नियोजन प्रक्रिया में शामिल करते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। दिव्यांगों के रिजर्वेशन के साथ नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

कोर्ट को बताया था दिव्यांगों का रिजर्वेंशन ठीक से लागू नहीं किया गया है
शिक्षक नियोजन मामले में कोर्ट को फेडरेशन ने पहले ही बताया था कि सरकार ने दिव्यांगों को रिजर्वेशन देने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई, वह कानून सम्मत नहीं है। सरकार ने बताया था कि यह नहीं कर सकते कि SC ब्लाइंड को रिजर्वेशन देंगे या ST ब्लाइंड या जनरल ब्लाइंड को रिजर्वेशन देंगे। इसलिए सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि कानून सम्मत तरीके से सरकार किस तरह से दिव्यांगों को रिजर्वेशन देगी। पहले से इन्हें रिजर्वेशन की जो प्रक्रिया सरकार ने शिक्षक नियोजन में अपना रखी है वह गलत है।

फेडरेशन ने यह भी पूछा था कि दिव्यांगों को चार कैटेगरी में बांटना है तो सरकार बताए कि किस जिले में किस तरह रिजर्वेशन रखेगी। फेडरेशन की ओर से कोर्ट में इससे जुड़ा एफिडेविड दिया गया। पिछली सुनवाई के समय इन सब बातों पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और रोक को भी कायम रखा था। अब जब सरकार ने फेडरेशन की शर्तें पत्र लिख कर मान ली हैं तो शिक्षक नियोजन पर लगी रोक भी हट गई है।

शिक्षा मंत्री ने जल्द बहाली का किया था वादा
सरकार के रवैये से परेशान शिक्षक अभ्यर्थियों ने 24 मई को ट्विटर पर बिहार नीड्स टीचर्स हैशटैग से कैंपेन चलाया। इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शामिल हुए। तब शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा था- विभाग की ओर से हाईकोर्ट में मेंशनिंग की गई थी। तिथि भी निर्धारित थी, लेकिन दुर्भाग्य से चीफ जस्टिस कोरोना पॉजिटव हो गए। इसलिए देर हो गई।

हमने न्यायालय से कहा है कि आरक्षण के मामले में कोई दिक्कत है तो उनके लिए पद छोड़ कर बाकी पर बहाली कर लेते हैं। लेकिन कोर्ट का निर्देश नहीं मिला है। कोर्ट आज इजाजत दे तो हम कल से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर देंगे।

विभाग ने जारी किया लेटर।

विभाग ने जारी किया लेटर।

शिक्षक संघ ने किया निर्णय का स्वागत
टीईटी-एसटीईटी उतीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (गोपगुट) ने इस निर्णय का स्वागत किया है। प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा मंत्री को अपने दिए गए बयान पर कायम रहते हुए बहाली प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करना चाहिए। अभ्यर्थियों को अब और इंतजार न कराया जाए।

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