बेसहारा बुजुर्गों को अदालतों से लगानी पड़ रही है गुहार: जिन बच्चों को पालने में जिंदगी लगा दी, उन्हीं से गुजारा खर्च लेने को 3 लाख बुजुर्ग कोर्ट में


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नई दिल्ली3 मिनट पहलेलेखक: पवन कुमार

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बुजुर्ग गुजारा भत्ता पानेे, अपने ही घर में रहने और बच्चों द्वारा मारपीट के खिलाफ संरक्षण के लिए कोर्ट जाने को मजबूर हुए हैं।

देश में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं जो उम्र के अंतिम पड़ाव में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के 25.02 लाख केस लंबित हैं। इनमें 18.73 लाख सिविल केस और 6.28 लाख आपराधिक मामले हैं। तीन लाख केस तो ऐसे हैं जिसमें बुजुर्ग गुजारा भत्ता पानेे, अपने ही घर में रहने और बच्चों द्वारा मारपीट के खिलाफ संरक्षण के लिए कोर्ट जाने को मजबूर हुए हैं।

दिल्ली में 10 साल से बुजुर्गों के 200 से अधिक केस नि:शुल्क लड़ चुके वकील एनके सिंह भदौरिया कहते हैं कि अदालतों से बुजुर्गों को सम्मान से जीने का हक मिलता है। ज्यादातर मामलों में कोर्ट की फटकार पर दो से तीन सुनवाई में सकारात्मक परिणाम मिल जाते हैं। पिछले कुछ सालों में ऐसे केसों में काफी इजाफा हुआ है।

कानून देता है बुजुर्गों को दो विशेष अधिकार

सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 बुजुर्गों को दो विशेष अधिकार देता है। पहला-अगर संतान गुजर-बसर के लिए खर्च नहीं देते हैं तो बुजुर्ग कानूनन उनसे प्रतिमाह भत्ता लेने के लिए कोर्ट जा सकते हैं। दूसरा-बच्चे बुजुर्गों को घर से नहीं निकाल सकते हैं। जबकि बुजुर्गों को यह अधिकार है कि वे परेशान करने पर बालिग संतान को घर छोड़ने के लिए बाध्य कर सकते हैं। इसके लिए बुजुर्ग को एसडीएम से शिकायत करनी होगी या कोर्ट जाना होगा।

कोर्ट के निर्देश पर बुजुर्ग को मिला हक
दिल्ली के शाहदरा में एक युवक ने पिता को घर से निकाल दिया। कोर्ट के आदेश पर आरोपी बेटे-बहू ने पिता से माफी मांगी। हर माह पांच हजार रुपए गुजारा भत्ता, दवा खर्च देने पर भी राजी।

कोर्ट ने पुलिस को दिए कार्रवाई के निर्देश
दिल्ली के करोल बाग में एक बुजुर्ग को बहू-बेटा दवा के लिए पैसे नहीं देते थे। कोर्ट ने गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। आगे बुजुर्ग को तंग करने पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया।

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