बड़ा सवाल: मप्र में आबादी काबू रखने का जिम्मा सिर्फ महिलाओं का; एक साल में 3.14 लाख ने कराई नसबंदी, 2769 पुरुष ही आगे आए


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भोपाल20 मिनट पहलेलेखक: रोहित श्रीवास्तव

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गांधीनगर के स्वास्थ्य केन्द्र में नसबंदी कराने वाली महिलाएं सम्मानित।

  • उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून बना, मध्यप्रदेश में ऐसा कानून पहले से, लेकिन ये कानून है किसके लिए?

उत्तर प्रदेश में हाल ही में जनसंख्या नियंत्रण कानून बना। मध्यप्रदेश में कुछ-कुछ ऐसा ही कानून पहले से है, लेकिन आंकड़ों को देखें तो लगता है कि यहां जनसंख्या नियंत्रण करने की सारी जिम्मेदारी महिलाओं पर है। स्वास्थ्य संचालनालय की फैमिली प्लानिंग सेक्शन की नसबंदी रिपोर्ट बताती है कि बीते एक साल में प्रदेश में 3.17 लाख लोगों की नसबंदी की गई, लेकिन हैरानी इस बात की है कि लाखों के इस आंकड़े में पुरुष सिर्फ 2769 ही हैं। 314437 महिलाएं।

जबकि 2019 में 4491 पुरुषों और 3 लाख 40 हजार 760 महिलाओं की नसबंदी की गई थी। यानी कोरोना काल में नसबंदी घट गई। 42 जिलों में सालभर में पुरुष तो 30 में महिला नसबंदी ऑपरेशन घटे हैं। भोपाल में पुरुष नसबंदी 2019 की तुलना में 2020 में 42% घटी है। आलीराजपुर में तो एक साल में एक भी पुरुष की नसबंदी नहीं हुई।

  • 07 जिलों में 2020 में पुरुषों के ऑपरेशन बढ़े हैं
  • ये जिले है-बालाघाट, सतना, अनूपपुर, नीमच, मंडला, खरगोन, दमोह।
  • 42% घट गई पुरुष नसबंदी भोपाल में 2019 के बाद।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन एक साल में 33 फीसदी तक कम हुए
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में प्रदेश में 3 लाख 45 हजार 251 लोगों के नसबंदी ऑपरेशन हुए थे। यह घटकर इस साल 3 लाख 17 हजार 206 हो गए। इनमें भी महिलाएं 3 लाख 14 हजार 437 हैं। इंदौर में 43% तो भोपाल में 42% पुरुष नसबंदी ऑपरेशन 2019 की तुलना में कम हुए हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के गृह जिले रायसेन में 2019 की तुलना में 2020 में महिला नसबंदी ऑपरेशन 33% कम हुए हैं। कम महिला नसबंदी करने वाले जिलों में टीकमगढ़ पहले तो आलीराजपुर दूसरे स्थान पर है।

हर महिला औसतन 3 बच्चों को दे रही जन्म… मप्र का टोटल फर्टीलिटी रेट (टीएफआर) 2.3% है यानी रिप्रोडेक्टिव उम्र में प्रत्येक महिला औसतन तीन बच्चों को जन्म दे रही है। सरकार ने टीएफआर 2.1% करने का टारगेट रखा है। नीति आयोग के अनुसार 21 साल पहले मध्यप्रदेश में टीएफआर 4 था। बीते 10 साल में प्रदेश के टोटल फर्टीलिटी रेट में 0.2% की बढ़ोत्तरी हुई है।

गरीबी और अशिक्षा के कारण लोग फैमिली प्लानिंग नहीं कर पाए : पंत
अभी भी पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा नसबंदी कराती हैं। कई बार ऐसे केस आते हैं, जब पुरुष नसबंदी कराना चाहता है। पत्नी अनजान डर के कारण मना कर देती है। खुद ऑपरेशन करा लेती है। लेकिन, अब पाॅपुलेशन मोमेंटम बन गया है। सभी को सीमित परिवार के फायदे समझ आने लगे हैं।

– डॉ. ललित मोहन पंत, मास्टर ट्रेनर, लेप्रोस्कोपिक स्टरलाइजेशन एंड एनएसवी, इंदौर (डॉ. ललित ने 1990 से अब तक 3 लाख 90 हजार 226 नसबंदी ऑपरेशन किए हैं, जो देश में एक रिकॉर्ड है।)

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