भारतीय राइटिंग पर स्टडी: लिखावट से पता चलेगा कि पुरुष ने लिखा या औरत ने, इससे गुनहगार का पता लगाने में मिलेगी मदद, महिलाओं में 84 और पुरुषों में 76.4% नतीजे सही


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चंडीगढ़6 मिनट पहलेलेखक: ननु जोगिंदर सिंह

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डॉक्टर विशाल शर्मा।

  • जरूरत क्योंकि: अभी तक राइटिंग के सैंपल और एक्सपर्ट के अनुभव पर निर्भर रहते हैं नतीजे

राइटिंग से ही अगर पता चल पाए कि लिखने वाला पुरुष है या महिला तो इससे असली गुनहगार तक पहुंचने में फॉरेंसिक टीम को काफी मदद मिल पाएगी। अब ऐसा संभव है। राइटिंग के नमूने व सिर्फ एक्सपर्ट के अनुभव पर आधारित रिपोर्ट की बजाय अब साइंटिफिक तरीके से इसके नतीजे दिए जा सकेंगे। इससे गलती की संभावना बहुत कम हो जाएगी। ऑस्ट्रेलियन जनरल ऑफ फॉरेंसिक जांच के 21 जुलाई को जारी हुए एडिशन में इसको पब्लिक कर दिया गया है।

इससे कत्ल के बाद आत्महत्या का मामला बनाने की कोशिश या आत्महत्या के बाद किसी को फंसाने के लिए दूसरे व्यक्ति की ओर से सुसाइड नोट लिखना जैसी घटनाएं रोकने में अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को मदद मिल सकेगी। डॉक्टर विशाल शर्मा के साथ राजकुमार, मनजोत बैंस, राजेश वर्मा और नेहा वर्मा इसमें शामिल हैं। डॉक्टर विशाल पंजाब यूनिवर्सिटी से हैं। पीयू के अलावा फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री रोहिणी दिल्ली, रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री मंडी हिमाचल व फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री मधुबन करनाल हरियाणा ने रिसर्च के जरिए ये नतीजा निकाला है।

स्टडी में 150 लोग शामिल थे, इनमें 75 महिलाएं और 75 पुरुष थे
डाॅक्टर विशाल बताते हैं कि इस तरह की कई स्टडीज विदेशों में हुई हैं। उन्होंने यहां भारतीयों पर जो स्टडी की है, उसमें इस्तेमाल मॉडल का उपयोग विदेशों में नहीं किया गया। 29 साल की औसत उम्र वाले 150 लोगों को इसके लिए चुना गया था जिसमें पुरुषों व औरतों की संख्या बराबर बराबर थी। उन्होंने लॉजिस्टिक रिग्रेशन मॉडल(संभावनाओं से संबंधित) का यूज किया है। इस मॉडल में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि अधिकतर महिलाएं या पुरुष लिखते समय किस पैटर्न से लिखते हैं।

जब राइटिंग के डेटाबेस को स्टडी किया गया तो पाया गया कि इस मॉडल के जरिए महिलाओं के मामले में 80% नतीजे सही पाए गए। यानी इस मॉडल के जरिए राइटिंग महिला की है, यह पहचानने में 80% तक कामयाबी मिली। पुरुषों के मामले में यह कामयाबी 73.3 फीसदी रही।

बेहतर नतीजों के लिए अब हिंदी, पंजाबी और उर्दू पर होगी यही स्टडी
डाॅक्टर विशाल का कहना है कि फिलहाल यह स्टडी इंग्लिश पर की गई है जो हमारी मातृभाषा नहीं है, इसलिए अब यही रिसर्च हिंदी, पंजाबी और उर्दू पर करेंगे। अपनी भाषा में नतीजे और बेहतर हो सकते हैं। उनका कहना है कि यह नई टेक्नोलॉजी है और अगर हैंडराइटिंग का डेटाबेस हो तो इससे सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जा सकता ह। इससे काम करने में और भी आसानी होगी।

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