भारत में अब 39 वर्ल्ड हैरिटेज: वारंगल में स्थित तारे के आकार का एकमात्र रुद्रेश्वर मंदिर अब विश्व विरासत, 12वीं शताब्दी में हुआ था निर्माण


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वारंगल5 मिनट पहले

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तस्वीर तेलंगाना के वारंगल स्थित काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर की है।

तस्वीर तेलंगाना के वारंगल स्थित काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर की है। यह मंदिर अब विश्व धरोहर बन गया है। ये प्राचीन मंदिर स्थापत्य कला का शानदार नमूना है। चीन में यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 44वें सत्र में रविवार को नॉर्वे को छोड़कर 22 सदस्यों ने इसे विरासत स्थल के रूप में अंकित किया। भारत से अब 39 स्थल विश्व विरासत में शामिल हो गए हैं।

रुद्रेश्वर मंदिर का निर्माण काकतीय राजा रूद्रदेव ने 12वीं शताब्दी में करवाया था। इस मंदिर में एक हजार स्तंभ हैं इसलिए इसे हजार स्तंभों वाला मंदिर भी कहते हैं। इसके निर्माण में जिन पत्थरों का उपयोग हुआ है वह पानी में भी नहीं डूबते। यह मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह अकेला ऐसा मंदिर है जो एक तारे के आकार का है।

खास बात यह है कि यहां एक ही छत के नीचे भगवान शिव और विष्णुजी के साथ सूर्य देव की मूर्ति है। इसलिए इसे ‘त्रिकुटल्यम’ भी कहते हैं। आमतौर पर भगवान शिव और विष्णुजी के साथ ब्रह्माजी की प्रतिमा होती है।

सैंडबॉक्स तकनीक से हुआ है निर्माण

रुद्रेश्वर मंदिर वारंगल की हनमकोंडा पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर के मुख्य दरवाजे पर भगवान शिव के प्रिय नन्दी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। जिसे काले पत्थर को तराश कर बनाया गया है।

मंदिर में स्तंभों पर बहुत ही बारीक वास्तुकला है। जिसमें सुई से भी बारीक छेद हैं। खास बात यह है की इस मंदिर में विराजमान देवों को मंदिर के किसी भी कोने से देखने पर कोई स्तंभ बीच में नहीं आता है।

मंदिर के निर्माण में 72 साल लगे। इसमें 5 फीट ऊंची भगवान गणेश की भी एक प्रतिमा है। इसकी नींव में बालू भरी हुई है, जो इसके भूकंपरोधी होने का प्रमाण है। इसे सैंडबॉक्स तकनीक कहा जाता है।

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