भारत में कोरोना का नया वैरिएंट मिला: ब्रिटेन और ब्राजील से आए लोगों में वायरस का नया स्ट्रेन B.1.1.28.2 पाया गया; यह डेल्टा वैरिएंट की तरह ही खतरनाक


  • Hindi News
  • National
  • New Coronavirus Variant In India | Corona Cases In India, Coronavirus Outbreak In India, Corona Second Wave, Corona Varient B.1.1.28.2

नई दिल्ली6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

वैरिएंट की स्टडी में इस वैरिएंट के खिलाफ वैक्‍सीन असरदार है या नहीं, इसके लिए स्‍क्रीनिंग की जरूरत बताई गई है। (फाइल फोटो)

भारत में कोरोना के कंट्रोल होते हालात के बीच डराने वाली खबर आई है। पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने कोरोनावायरस की जिनोम सीक्वेंसिंग में नए वैरिएंट का पता लगाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैरिएंट ब्रिटेन और ब्राजील से भारत आए लोगों में पाया गया है। इंस्टीट्यूट ने इसे B.1.1.28.2 नाम दिया है। यह नया वैरिएंट भारत में पाए गए डेल्टा वैरिएंट की ही तरह गंभीर है। इससे संक्रमित लोगों में कोरोना के गंभीर लक्षण दिख सकते हैं।

वैक्सीन के लिए स्‍क्रीनिंग की जरूरत
वैरिएंट की स्टडी के बाद पाया गया कि यह लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। इस वैरिएंट के खिलाफ वैक्‍सीन असरदार है या नहीं, इसके लिए स्‍क्रीनिंग की जरूरत बताई गई है। NIV की यह स्‍टडी bioRxiv में ऑनलाइन पब्लिश हुई है।

वहीं, इसी इंस्टीट्यूट की एक और स्‍टडी में बताया गया कि स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन इस वैरिएंट के खिलाफ भी असरदार है और वैक्‍सीन की दो डोज से जो एंटीबॉडीज बनती हैं, उससे इस वैरिएंट को न्‍यूट्रिलाइज किया जा सकता है।

वेटलॉस और फेफड़े डैमेज कर सकता है
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि B.1.1.28.2 वैरिएंट से संक्रमित होने पर व्यक्ति का वजन कम होने लगता है। इसके संक्रमण के तेजी से फैलने पर मरीज के फेफड़े डैमेज हो जाते हैं। यह वैरिएंट फेफड़ों में घाव और उनमें भारी नुकसान की वजह बन सकता है। स्‍टडी में कोविड के जीनोम सर्विलांस की जरूरत पर जोर दिया गया है। ताकि कोरोना के नए-नए वैरिएंट्स के बारे में जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

अब तक 10 लैब्स में 30 हजार सैम्‍पल्‍स सीक्‍वेंस हुए
जीनोम सीक्‍वेंसिंग लैब्‍स ऐसे म्‍यूटेंट्स का पता लगा रही हैं जो कोरोना संक्रमण में अचानक आने वाले उछाल के पीछे का कारण होती हैं। अभी इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टिया (INSACOG) के तहत 10 नेशनल लैब्‍स ने करीब 30 हजार सैम्‍पल्‍स सीक्‍वेंस किए हैं। केंद्र सरकार भी जीनोम सीक्‍वेंसिंग के लिए संसाधनों को बढ़ाने का काम कर रही है। इसी के मद्देनजर हाल ही में कंसोर्टियम में 18 और लैब्‍स जोड़ी गई हैं।

डेल्टा स्ट्रेन की वजह से ही खतरनाक हुई दूसरी लहर
डेल्टा या B.1.617 वैरिएंट, जिसे डबल म्यूटेंट स्ट्रेन भी कहा जाता है, महाराष्ट्र और दिल्ली में बड़े पैमाने पर मिला है। इसकी वजह से यहां आई महामारी की दूसरी लहर ने बुरी तरह प्रभावित किया है। देश के सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र के कई शहरों में जीनोम सिक्वेसिंग किए गए आधे से ज्यादा सैंपल में B.1.617 वैरिएंट मिला था।

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *