भास्कर इंटरव्यू: एलोपैथी गलत है तो सरकार बंद करा दे… वरना रामदेव पर केस दर्ज करे, बाबा रामदेव को आईएमए अध्यक्ष डॉ. जे.ए. जयलाल का जवाब


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16 मिनट पहलेलेखक: तिरुवनंतपुरम से भास्कर के लिए के.ए. शाजी

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आईएमए अध्यक्ष डाॅ. जॉनरोज ऑस्टिन जयलाल का स्पष्ट कहना है डॉक्टर्स रामदेव जैसे किसी व्यक्ति के दबाव में झुकने को तैयार नहीं हैं।

  • फार्मा इंडस्ट्री के दबाव की बात करने वाले रामदेव और पतंजलि ही दबाव डालते हैं

योगगुरु बाबा रामदेव एलोपैथी के इलाज पर सवाल उठा रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से उन्होंने 25 सवाल पूछे हैंं। लेकिन आईएमए अध्यक्ष डाॅ. जॉनरोज ऑस्टिन जयलाल का स्पष्ट कहना है डॉक्टर्स रामदेव जैसे किसी व्यक्ति के दबाव में झुकने को तैयार नहीं हैं। एलोपैथी के इलाज पर उठाए उनके सवालों पर डॉ. जयलाल का कहना है कि वे किसी आयुर्वेद के डॉक्टर से भी बात-बहस करने के लिए तैयार हैं, लेकिन बाबा रामदेव तो डॉक्टर भी नहीं हैं। अपने गृहक्षेत्र कन्याकुमारी से उन्होंने दैनिक भास्कर से फोन पर विशेष बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश-
बाबा रामदेव एलोपैथी इलाज के तरीकों और डॉक्टर्स पर सवाल उठा रहे हैं…
देश में चिकित्सा व्यवस्था का पूरा तंत्र है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय है, आईसीएमआर, डीसीजीआई जैसे प्रतिष्ठान हैं। रामदेव को अगर एलोपैथी से कोई दिक्कत है तो उन्हें इन्हीं सक्षम लोगों से कहना चाहिए। वे स्वास्थ्य मंत्रालय से बात करें या प्रधानमंत्री के पास अर्जी दें।

सरकारें एलोपैथी चिकित्सा को आईएमए के दबाव में मान्यता नहीं देती हैं। अगर स्वास्थ्य मंत्रालय को लगता है कि रामदेव के आरोप सही हैं तो वो एलोपैथी की मान्यता खत्म कर दे, डॉक्टरों को इलाज करने से रोक दे। अगर नहीं, तो फिर मंत्रालय को रामदेव पर आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत मामला दर्ज करना चाहिए।
कोविड ट्रीटमेंट का प्रोटोकॉल बदलता रहा है। आपको लगता है कि इसमें आयुर्वेद या अन्य पद्धतियों को शामिल करना चाहिए?
ये मांग मैं कैसे कर सकता हूं। यह तो सरकार का विशेषाधिकार है। कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल गहन रिसर्च और फीडबैक के बाद बदलता है। वायरस के नए-नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। इलाज के नए तरीके ढूंढना तो बिल्कुल सामान्य है। मैं आयुर्वेद या किसी भी अन्य पद्धति पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता।
रामदेव कहते हैं कि फार्मा इंडस्ट्री के दबाव में आयुर्वेद को नकारा जाता है। सहमत हैं?
सवाल उठाने वाले रामदेव कौन हैं। मैं किसी आयुर्वेद के डॉक्टर से चर्चा करने को तैयार हूं। रामदेव तो डॉक्टर नहीं हैं। वो फार्मा इंडस्ट्री के दबाव की बात कर रहे हैं। आप देखिए…देश की सबसे बड़ी फार्मा इंडस्ट्री कौन सी है। रामदेव और उनका पतंजलि ब्रांड ही खुद दबाव डालता है।

डॉ. जयेश लेले (फाइल फोटो)

डॉ. जयेश लेले (फाइल फोटो)

आईएमए महासचिव डॉ. जयेश लेले का आरोप…रामदेव अपनी दवा बेचने के लिए टीकों के प्रति डर फैलाना चाहते हैं

पवन कुमार | नई दिल्ली

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ.जयेश लेले का कहना है कि बाबा रामदेव वैक्सीन के बावजूद डॉक्टरों की मौत की बात कहकर लोगों में टीके के प्रति डर फैलाना चाहते हैं। यह सरकारी टीकाकरण को पटरी से उतारने का तरीका है। भास्कर से उन्होंने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-
रामदेव 25 लाइफस्टाइल डिजीज का इलाज एलोपैथी में न होने का दावा करते हैं…
25 सवाल एक अनपढ़ आदमी हमसे पूछ रहा है। हम जवाब देंगे, विश्व भर का रेफरेंस देते हुए जवाब तैयार करेंगे लेकिन उसे नहीं देंगे देश के लोगों के लिए वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। मजे की बात है कि जिन 25 लाइफस्टाइल डिजीज का नाम लिखा है वे सब एलोपैथी नाम है। आयुर्वेदिक नाम नहीं लिखा।
बाबा कह रहे हैं कि एलोपैथी से सिर्फ 10% गंभीर मरीज ठीक हुए, आपका क्या कहेंगे?
यह बिल्कुल गलत है। एलोपैथी से 2.30 करोड़ से ज्यादा मरीज ठीक हुए। गंभीर मरीजों का आंकड़ा अलग से देखना चाहिए। रामदेव के अनुसार 90% मरीजों का इलाज आयुर्वेद से हुआ है तो प्रमाण दिखाएं नहीं तो झूठा बयान न दें।
बाबा रामदेव को ताकत कहां से मिलती है कि इतने दम से अपनी बात रखते हैंं?
यह सरकार को सोचना चाहिए। 10 हजार डॉक्टर्स की मौत टीका लेने के बाद हो गई ऐसे बयान दे रहे हैं। यह तरीका है सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम को पटरी से उतारने का। रामदेव का बयान एलोपैथी दवा और टीके के प्रति डर फैलाने के लिए है ताकि उन्हें दवा बेचने का मौका मिल जाए।

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