भास्कर इंटरव्यू: शब्दों की आत्मा को अहसास की सांसों से जीना ही कविता; ये खुशबू मुट्‌ठी में बंद नहीं हो सकती


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19 मिनट पहले

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डॉ. वसीम बरेलवी।

  • डॉ. वसीम बरेलवी बता रहे हैं आज क्यों जरूरी है कविता

‘आजकल कोई न कोई दिन किसी हवाले से मनाया जाता है। एक सिलसिला चला हुआ है। लेकिन कविता, इंसान और इंसानियत से रूबरू होने का मामला है। हर जगह दिल धड़कते हैं, भले ही वो कोई भी ज़ुबान बोलते हों, किसी भी मुल्क में रहते हों, वहां का जो काव्य सृजन है, उसका इस दिन खास तौर पर आदान-प्रदान होना चाहिए।

विश्व कविता दिवस पर हमें सोचना होगा कि वो जरिया क्या होगा, जिससे दूसरी तहज़ीबों को व्यक्त करने वाला काव्य अनुवाद के जरिए ही सही, हम तक पहुंच सके…’ ये कहना है मशहूर शायर डॉ. वसीम बरेलवी का। अविनाश श्रीवास्तव ने उनसे जाना कि कविता क्यों जरूरी है और क्यों पढ़ी जानी चाहिए, चुनिंदा अंश-

विश्व कविता दिवस पर समझिए- कविता क्या है, क्यों और कब पढ़ी जाए

कविता और शायरी में क्या फर्क है?
दरअसल, ग़ज़ल का हर शेर अपनी जगह मुकम्मल होता है। यही दोहे की खूबी है, जो सदियों से हिंदुस्तान की अदबी परंपराओं का हिस्सा बनी हुई है। हिंदुस्तानियत भी यही है कि वो कम शब्दों में बड़ी बात कहने का सलीका रखती है।

कविता के अंदर जो सेंट्रल आइडिया या मरकज़ी ख्याल होता है, उसे बयान करने में कई पंक्तियों का सहारा लेना पड़ता है। और वो भी कुछ खास लोगों तक ही पहंुच पाती है। ये फर्क है गज़ल की शायरी और कविता में। मेरे इस शेर से समझें- ‘कौन-सी बात, कहां, कैसे कही जाती है, ये सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है।’

असल में, कविता क्या है?
कविता की इतनी परिभाषाएं हैं कि गिनती नहीं है। मैं सोचता हूं शब्दों की आत्मा को अहसास की सांसों से जीना ही कविता है। शब्दों की आत्मा यानी जो कहा गया, जो बयां किया गया, जो महसूस किया गया, वही कविता है।

कविता क्यों पढ़ी जानी चाहिए?
ये है तो छोटा लेकिन बड़ा सवाल है। इसलिए पढ़ी जाए क्योंकि कविता एक खुशबू है उसे मुट्ठी में बंद नहीं रखा जा सकता। कविता जितनी जीवन से जुड़ी होगी, उतनी ही जीवन में सार्थकता दिखेगी।

कविता कब, कैसे और कहां पढ़ी जाए?
ऐसे पढ़ी जाए कि दिल में उतर जाए। कहां पढ़ी जाए, तो जवाब है- वहां, जहां सुनी जाए। और
तब पढ़ी जाए, जब आपके सामने मन को कान बना लेने का हुनर जानने वाले हों। ये हरेक को सुनाने की चीज़ भी नहीं है।

कविता कौन पढ़ सकता है?
क्या आपने शायरी या कविता सिखाने वाली एकेडमी सुनी है? ये सिखाती है परमात्मा की मेहर, उसकी कृपा। नीरज जी ने कहा था-मनुष्य होना भाग्य है और कवि होना सौभाग्य। कविता, ऊपर वाले की खास रहमत है, जिसे आपसे वही कहलवाता है। आज के वक्त में कविता की जरुरत बयां करती दो लाइनें हैं-
आंखों को मूंद लेने से ख़तरा न जाएगा,
वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा…!

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