भास्कर की खबर पर मुहर: हमने अपनी खबर में CBSE एग्जाम न होने पर 9वीं, 10वीं और 11वीं के नंबरों के आधार पर 12वीं का रिजल्ट देने की बात कही थी, PM की मीटिंग के बाद वही हुआ


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10 मिनट पहले

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सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की 12वीं की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मीटिंग में कहा कि मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता में है। ऐसे माहौल में उन्हें परीक्षा का तनाव देना ठीक नहीं है। हम उनकी जान खतरे में नहीं डाल सकते।

PM की मीटिंग में परीक्षा रद्द होने से पहले ही भास्कर ने अपनी खबर में बता दिया था कि कोरोना के चलते परीक्षा होने के आसार कम ही हैं। ऐसे में सरकार तीन प्रपोजल पर विचार कर रही थी।

शिक्षा मंत्रालय ने तैयार किए थे 3 प्रपोजल..

पहला प्रपोजल: 12वीं के मुख्य विषयों यानी मेजर सब्जेक्ट्स का एग्जाम लिया जा सकता है। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के केवल 3 मुख्य विषयों की ही परीक्षा लेने के बाद बाकी सब्जेक्ट्स में मुख्य विषयों पर मिले नंबर्स के आधार पर मार्किंग का फॉर्मूला भी बन सकता है।

दूसरा प्रपोजल: 30 मिनट की परीक्षाएं होंगी और इनमें ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएंगे। इस परीक्षा में विषयों की संख्या भी सीमित कर दी जाएगी, पर इसके बारे में स्पष्ट अभी कुछ नहीं बताया गया है।

तीसरा प्रपोजल: अगर देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति ठीक नहीं होती है तो 9वीं, 10वीं और 11वीं तीनों का इंटरनल असेसमेंट किया जाएगा। इसके बाद इसके आधार पर ही 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा।

क्यों आसार थे परीक्षा टाले जाने के
कोरोना के बीच 12वीं की परीक्षा टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट तानवी दूबे और ममता शर्मा ने याचिका दाखिल की थी। इस पर सुनवाई के दौरान जस्टिस खानविलकर ने कहा था कि छात्रों को बहुत उम्मीद थी कि इस साल भी पिछले साल की तरह परीक्षा नहीं होगी और नंबरिंग के लिए मेथड सिस्टम अपनाया जाएगा।

सरकार ने 2 दिन में फैसले की बात कही थी
अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा था कि केंद्र सरकार 2 दिन में तय कर लेगी कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) और काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस ICSE की 12वीं की परीक्षा होगी या नहीं।

PM ने छात्रों की सुरक्षा को अहम बताया
मीटिंग में परीक्षा टालने के फैसले के बाद PM मोदी ने कहा कि छात्रों के हित को ध्यान में रखकर ही 12वीं की परीक्षा पर फैसला लिया गया है। छात्रों की सुरक्षा और सेहत हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। परीक्षा को लेकर छात्र, पैरेंट्स और टीचर्स सभी परेशान थे। इस फिक्र को खत्म किया जाना जरूरी था। ऐसे दबाव भरे माहौल में छात्रों को परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जाना ठीक नहीं होगा।

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