भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट: येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय और मठ की शक्ति दिखा कुर्सी बचाना चाहते हैं


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बेंगलुरु2 मिनट पहलेलेखक: मनोरमा सिंह

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कर्नाटक में येदियुरप्पा समेत कई मंत्रियों पर लटकी तलवार

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है। येदियुरप्पा से मिलने प्रमुख मठों के संत पहुंच रहे हैं। 300-400 लिंगायत संतों के बेंगलुरू में डेरा डालने की तैयारी है, ताकि केंद्रीय नेतृत्व को मजबूत संकेत भेजा जा सके। उनके समर्थन में कांग्रेस के लिंगायत नेता भी आवाज बुलंद कर रहे हैं। सोमवार 26 जुलाई को संभावित विधायक दल की बैठक में नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो सकता है। देर शाम येदियुरप्पा ने ट्वीट कर अपने समर्थकों से ऐसा कोई बयान नहीं देने को कहा है, जिससे पार्टी की छवि खराब हो।

हालांकि येदियुरप्पा जानते हैं कि उनके पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लेकिन इस प्रदर्शन के जरिए अपने दोनों बेटों भाजपा उपाध्यक्ष विजयेंद्र और शिवमोगा सांसद बीवाई राघवेंद्र को उच्च पद दिलवाना चाहते हैं। दिल्ली में उन्होंने नेतृत्व के सामने एक बेटे को डिप्टी सीएम और दूसरे को केंद्रीय मंत्री बनाने के लिए माहौल बनाया था, लेकिन सफल नहीं हुए। इधर, कर्नाटक में कई वरिष्ठ मंत्रियों की छुट्‌टी होना तय है।

इनमें ग्रामीण विकास मंत्री केएस ईश्वरप्पा, उद्योग मंत्री जगदीश शेट्टार, आवास मंत्री वी सोमन्ना और राजस्व मंत्री आर अशोक जैसे नाम शामिल हैं। सिद्धगंगा मठ के श्री सिद्धलिंग स्वामी के नेतृत्व में संतों ने येदियुरप्पा से मुलाकात की है। कर्नाटक में 600 से अधिक मठ हैं, इन मठों का सीधा प्रभाव 35% आबादी पर है। यानी सरकार तय करने में इनकी भूमिका अहम हैं। येदियुरप्पा लगातार इन मठों को बढ़ावा देते आए हैं।

तो येदियुरप्पा की जीत तय

भाजपा से जुड़े राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक अगर येदियुरप्पा इस लड़ाई को लिंगायत सम्मान से जोड़ देते हैं तो केंद्रीय नेतृत्व को पीछे हटना होगा। राज्य में इनकी आबादी 18% है। येदियुरप्पा इस समुदाय के सर्वमान्य नेता हैं। कर्नाटक में सत्ता की चाभी लिंगायत या वोक्कालिगा के हाथ में ही रहती है। जनता दल (एस) के कुमारस्वामी वोक्कालिगा समुदाय के नेता हैं। राज्य में इस समुदाय की आबादी 12% है। दूसरी तरफ, डीके शिवकुमार व पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बीच कलह के मद्देनजर कांग्रेस अब लिंगायतों को महत्व देने पर विचार कर रही है।

आखिर किस आधार पर कुर्सी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है, 4 बड़े कारण

1 येदियुरप्पा पर कोविड कुप्रबंधन व भ्रष्टाचार के आरोप हैं। नया विवाद जेएसडब्ल्यू स्टील को 3,667 एकड़ जमीन बेचने की मंजूरी देने का है, खुद येदियुरप्पा इसके खिलाफ थे। 4 मंत्रियों रविंद्र बेलाड, यतनाल, के. पूर्णिमा व उदय गरुड़चर ने पत्र लिखकर सवाल खड़े किए हैं।

2 विधायकों का आरोप है कि उन्हें विकास कार्यों में पसंद के ठेकेदार नहीं चुनने दिए जा रहे। आरोप है कि सीएम कांग्रेस-जेडीएस विधायकों के फंड जारी कर रहे हैं पर भाजपा विधायकों के नहीं। अब येदियुरप्पा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए 1000 करोड़ का फंड जारी किया है।

3 भाजपा नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से शिकायत की है कि 77 साल के येदियुरप्पा की तबीयत खराब होने के कारण उनके बेटे विजयेंद्र और बेटी उमा सरकार चला रही हैं। साथ ही उनके बेटे विजयेंद्र सरकार के तमाम फैसलों में कथित हस्तक्षेप भी कर रहे हैं।

4 भाजपा 3 बार सत्ता में पहुंची है। तीनों बार येदियुरप्पा की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। केंद्रीय नेतृत्व उनकी जगह एक स्वच्छ छवि वाला युवा नेता चाहता है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नवीन कतील कथित लीक ऑडियो में कह रहे हैं कि ईमानदार, हिंदू समर्थक ही नया सीएम बनेगा।

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