भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट: 350 कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान कोरोना से मौत; मुआवजा सिर्फ 6 को, डेथ सर्टिफिकेेट पर लिखा- हार्ट अटैक, शुगर से मौत


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जयपुर2 घंटे पहले

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लॉकडाउन में ड्यूटी पर तैनात रहे थे कोरोना वॉरियर्स।

प्रदेश में कोरोना की अलग-अलग लहर के बीच कोविड ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की जिंदगी भी हिचकोले खा रही है। कोरोनाकाल के 15 महीने में अलग-अलग विभाग के 347 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। ये सभी कर्मचारी कोविड ड्यूटी में लगे थे। लेकिन सरकार अपने इन सभी कर्मचारियों की मौत काेरोना से नहीं मान रही।

वजह- डॉक्टर डेथ सर्टिफिकेट में इसे हार्ट अटैक, डायबिटीज या अन्य बीमारी बता रहे हैं। इस कारण सरकार ने कोविड ड्यूटी में कर्मचारी की मौत होने पर 50 लाख रुपए की सहायता का जाे आदेश जारी किया था, उसका क्लेम अब तक सिर्फ 6 कर्मचारियों के परिजनों को ही मिल सका है। 15 माह तक दिन-रात ड्यूटी में लगे इन कर्मचारियों के परिवार को इस समय मदद की सबसे अधिक जरूरत है, लेकिन वेतन कटौती में तत्परता दिखाने वाली सरकार इन्हें अनुग्रह राश देने के नाम पर सिर्फ फाइल सरका रही है।

किन्हें मिलनी थी मदद : काेविड ड्यूटी में राज्य सरकार के कर्मचारी, निगम, बोर्ड व संविदा कर्मचारियों के निधन पर 20 लाख रुपए एक्स ग्रेशिया व 50 लाख रुपए की अनुग्रह राशि।

  • केस- 1 – भरतपुर के एक शिक्षक की कोरोना ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक लिखा गया। अनुग्रह के लिए प्रस्ताव निदेशालय आया तो आक्षेप लगाकर वापस भिजवा दिया गया। अनुग्रह राशि का मामला अटका है।
  • केस-2- काॅपरेटिव विभाग में इंस्पेक्टर की काेराेना के दाैरान ऑडिट में ड्यूटी लगी। तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती हुए, कुछ दिनों बाद कोरोना से निधन हो गया। अनुग्रह राशि नहीं मिली।
  • केस-3- जोधपुर के शिक्षक की कोविड ड्यूटी से लौटते समय सड़क हादसे में मौत हो गई। शिक्षक लेकिन कोरोना ड्यूटी में था, लेकिन मौत कोरोना से नहीं हुई, इसलिए मुआवजा अटक गया।

अब तक 100 शिक्षक, 50 चिकित्साकर्मी जान गंवा चुके

  • शिक्षा विभाग 100
  • चिकित्सा विभाग 50
  • पशु चिकित्सक 23
  • बिजली कंपनियां 80
  • खान 6
  • सहकारिता 8
  • पुलिस 30
  • अन्य विभाग 50

(कर्मचारी संगठनों के अनुसार)

सरकार के पास आंकड़े नहीं, भास्कर में नाम के साथ पढ़ें पूरी सूची

बिजली निगम-

  • एमएल गुप्ता, एसई, प्लान
  • संदीप मौर्य, जेईएन, झालावाड़
  • अवधेश नागर, जेईएन, बारां
  • सत्यनारायण, टेक्निकल हेल्पर, लाखेरी
  • मनोज परिहार, टेक्निकल, हेल्पर बूंदी
  • रामकिशन पाटीदार, यूडीसी, झालावाड़
  • जितेंद्र सिंह, हेल्पर, दूदू
  • रामप्रसाद मीणा, टेक्निकल हेल्पर, दूदू
  • राम अवतार मीणा, टेक्निकल, इंदरगढ़
  • भरत लाल मीणा, इलेक्ट्रिकल, दौसा
  • सुरेंद्र सेन, हेल्पर, कोटा ग्रामीण
  • बृजेश सैनी, टेक्निकल हेल्पर, अलवर
  • उमाशंकर, टेक्निकल हेल्पर, धौलपुर
  • राजेश बंजारा, सीसीए, बूंदी
  • रामसिंह सैनी, टेक्निकल, एचटीएम-6
  • प्रेम शंकर महावर, एईएन, कोटा
  • प्रदीप गुप्ता, टेक्निकल हेल्पर, खानपुर
  • रमेश चौहान, टेक्निकल हेल्पर, राडावास
  • राकेश सखवाल, टेक. हेल्पर, बूंदी
  • राजनारायण, कॉमर्शियल, अलवर
  • शंभू सिंह, टेक्निकल हेल्पर, भांकरोटा
  • सूमरन सिंह, एसएसए, भरतपुर
  • मदन लाल, हेल्पर, सांभर
  • एनके गोयल, एईएन ट्रेनिंग, जयपुर

जलदाय विभाग-

  • अरविंद माथुर, एईएन, जोधपुर
  • जयचन्द मालसरिया, एक्सईएन, झुंझुनूं
  • एसएल चौधरी, जेईएन, माउंट आबू
  • बंशीधर रेगर, एक्सईएन, फतेहपुर
  • बीएन अटल, एईएन, नीमकाथाना
  • कुलदीप चौधरी, एईएन, बांसवाड़ा

आईटी विभाग

  • नवीनराज, जयपुर
  • रश्मि खुड़िया, बीकानेर,
  • अमरा राम, जयपुर

पशुपालन विभाग

  • दीनदयाल, पशुचिकित्सा, पाली
  • आशाराम मीणा, पशुधन सहायक, टाेंक
  • महीपाल, पशुचिकित्सा, प्रतापगढ़
  • गाैरव, पशुधन सहायक, भरतपुर
  • वीरभ्रद खरवड़, पशु चिकित्सा, उदयपुर
  • गाेकुल प्रसाद मीणा, पशुधन, उदयपुर
  • गाेमाराम जाट, पशुधन सहायक, नागाैर
  • प्रेमसिंह गहलाेत, पशु चिकित्सा, जाेधपुर
  • इंदुबाला शर्मा, पशुधन, अजमेर
  • ओमप्रकाश लिलेरिया, पशु, टाेंक
  • कांतिलाल डामाेर, पशुधन, बांसवाड़ा
  • डॉ. नरेश नागर, पशु चिकित्सा, बूंदी
  • डॉ. मृगराज सैनी, पशु चिकित्सा अधिकारी, दाैसा
  • गिर्राज गुर्जर, पशुधन सहायक, जयपुर
  • डाॅ. आरडी मिश्रा, उपनिदेशक, अजमेर
  • धर्मचंद, पशुधन सहायक, चित्ताैड़गढ़
  • राजेश शर्मा, पशु चिकित्सा अधिकारी, जैसलमेर
  • विजयपाल बाेयल, पशुधन सहायक, झुंझुनूं
  • सुरेश शर्मा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चित्ताैड़गढ़

सहकारिता से जुड़े कार्मिक
सोमदत्त, आईदानराम चौधरी घेवड़ा पैक्स जोधपुर, कुनाराम डूकिया बुटाटी पैक्स नागौर, नितिन कुमार बेनीवाल हिंडौन करोली, मोहनराम रावतभाटा चित्तौड़, गुलाब सिंह मांडलगढ़ भीलवाड़ा, रीना शर्मा हिमतगढ़ झालावाड़, हीरालाल रावत मालवी उदय, वीरेंद्र सिंह श्री गंगानगर

  • मौतों के आंकड़े और कर्मचारियों के नाम कर्मचारी संगठनों के अनुसार

इन स्थितियों को लेकर आदेश स्पष्ट नहीं है

  • 1 क्या सिर्फ कोविड ड्यूटी के दौरान कोरोना से मौत होने पर ही यह राशि मिलेगी। यदि कर्मचारी संक्रमित है तो वह ड्यूटी पर कैसे आएगा?
  • 2 कोरोना में ड्यूटी दी हो, बाद में ड्यूटी से हट जाए और संक्रमण से मौत हो जाए तो यह राशि मिलेगी या नहीं?
  • 3 ड्यूटी खत्म होने के बाद घर जाते समय यदि दुर्घटना में कर्मचारी की मौत हो जाए तो यह राशि मिलेगी या नहीं?
  • 4 ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुआ और इलाज के दौरान कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। बाद में मौत हुई तो राशि मिलेगी या नहीं?

राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ के प्रमुख महामंत्री अर्जुन शर्मा ने कहा- कर्मचारियों की मौत को लेकर पशु पालन विभाग पर आपराधिक केस दर्ज कराएंगे।

राजकीय दायित्व निभाते हुए कर्मचारी का किसी भी कारण से निधन हो, उसे अनुग्रह राशि का लाभ दिया जाना चाहिए।-रवि आचार्य, मंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय

कोरोना से मौत पर भी कर्मचारियों के डेथ सर्टिफिकेट में वजह डाइबिटीज, हार्ट अटैक या अन्य बीमारी लिखी रही है।-यतीश शर्मा, अध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ

कोरोना के चलते जिन पुलिस कर्मचारियों की मृत्यु हुई, उनमें से 6 को 50 लाख रु. की अनुग्रह राशि दी गई।-आलोक माथुर, वित्तीय सलाहकार, पीएसक्यू

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