भास्कर पड़ताल: तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा खतरे की आशंका, पर अब तक वही सबसे सुरक्षित, ढाई महीने में 2.70 लाख मरीजों में सिर्फ 8129 बच्चे ही संक्रमित


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रायपुर2 घंटे पहलेलेखक: पीलूराम साहू

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प्रदेश में 0-18 के बीच के 86 लाख बच्चे और किशोर, मई से अब तक 5 हजार मौतें, जिनमें 15 बच्चे शामिल।

तीसरी लहर को लेकर लगाए गए पूर्वानुमान के हिसाब से समय करीब आ रहा है, लेकिन एक अच्छी खबर यह है कि अब तक बच्चों में कोरोना का संक्रमण नहीं के बराबर ही है। प्रदेश में पिछले ढाई माह (1 मई से अब तक) में केवल 8129 बच्चे पॉजिटिव आए हैं, जबकि 0-18 साल के बीच के 86 लाख बच्चे-किशोर प्रदेश में हैं।

इस दौरान हर आयु वर्ग को मिलाकर प्रदेश में 270988 मरीज मिले और 4913 मरीजों की मौत भी हुई। इसमें बच्चे-किशाेरों की संख्या 15 ही है। उनमें भी ज्यादातर मामले को-माॅर्बिडिटी के हैं, यानी कोरोना के अलावा उन्हें दूसरी गंभीर बीमारियां भी थीं। इस तरह कुल मौतों में बच्चे एक फीसदी भी नहीं है। उनके संक्रमित होने की दर भी 4 फीसदी से कम है।

तीसरी लहर की शुरुआत अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर से होने की आशंकाएं जताई गई हैं। इसमें सबसे ज्यादा बच्चों के संक्रमित होने की आशंका है। हालांकि विशेषज्ञ इस पर एकराय नहीं है। प्रदेश में 14 साल तक के 46 लाख व 14 से 18 वर्ष वाले 40 लाख किशोर हैं। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि मई में 242763, जून में 23017 व 17 जुलाई तक 5208 मरीज मिले। मई में 4467, जून में 391 व जुलाई में अब तक 55 मरीजों की मौत हुई है।

खास बात ये है कि उन्हीं के घरों में बच्चे संक्रमित हुए, जहां उनके माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्य संक्रमित हुए। ऐसे केस की संख्या कम है, जहां परिवार में केवल बच्चे संक्रमित हुए हों। दरअसल कोरोनाकाल में बच्चों का बाहर जाना कम रहा। स्कूल भी बंद रहे। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य के पॉजिटिव आने पर उनके संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार 99 फीसदी से ज्यादा केस ऐसे ही रहे, जिसमें वे घर में संक्रमित हुए। जुलाई में बच्चों के संक्रमित होने का मामला नहीं के बराबर है। ऐसे बच्चों की मौत हुई, जो पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। स्वस्थ बच्चों की मौत के मामले काफी कम है।

वेंटीलेटर और सीपैप 300, बढ़ाएंगे संख्या

बच्चों के लिए प्रदेश में 300 से ज्यादा वेंटीलेटर है, जो मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पतालों में उपलब्ध है। एसएनसीयू व एनआईसीयू में वेंटीलेटर है। अंबेडकर अस्पताल में बच्चों के लिए 35 से ज्यादा वेंटीलेटर है। अंबेडकर में 100 बेड का आईसीयू तैयार है। इसमें 30 बेड बच्चों के लिए रखे जाएंगे।

सबसे बड़े अंबेडकर अस्पताल में अब तक 51 बच्चे ही हुए भर्ती
अंबेडकर अस्पताल में डेढ़ साल में केवल 51 संक्रमित बच्चों का इलाज किया गया। ये बच्चे कोरोना के अलावा दूसरी गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित थे। इनमें ज्यादातर बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हुए हैं। ये ऐसे बच्चे थे, जो गंभीर थे। निजी अस्पतालों व दूसरे जिला अस्पतालों में बच्चों का इलाज किया गया। जो बच्चे नहीं संभले, उन्हें अंबेडकर रिफर किया गया।

बच्चों को स्टेरायड और रेमडेसिविर नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमित बच्चों को रेमडेसिविर, स्टेरायड, आयवरमेक्टिन या दूसरी दवा देने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इलाज के लिए गाइडलाइन आ गई है। माइल्ड व मॉडरेट लक्षण वाले मरीज होम आइसोलेशन में ठीक हो जाएंगे।

बच्चों को मल्टी विटामिन व लक्षण के अनुसार दवा दी जाएगी। मरीज गंभीर है, तभी हाई एंटी बायोटिक व एंटी वायरल दवा दी जा सकती है। गंभीर बीमारी है तो इसकी दवा अलग से दी जाएगी। प्रदेश में मल्टी विटामिन, सर्दी, खांसी व बुखार की दवा की कोई कमी नहीं है।

एक्सपर्ट व्यू

पैरेंट्स के वैक्सीनेशन से बच्चे सुरक्षित

  • प्रदेश में शुरू से अब तक कोरोना से बहुत कम बच्चे संक्रमित हुए। पिछले डेढ़ साल में पीडियाट्रिक विभाग में केवल 51 बच्चों का इलाज किया गया। पैरेंट्स के वैक्सीनेशन से तीसरी लहर में बच्चे भी सुरक्षित हो जाएंगे। केंद्र से इलाज की गाइडलाइन आ गई है। इसमें माइल्ड व मॉडरेट लक्षण वाले बच्चों को सामान्य दवा दी जानी है। अगर वे गंभीर हुए, तभी लक्षण के अनुसार दवा दी जाएगी। – डॉ. शारजा फुलझेले, एचओडी-पीडियाट्रिक्स, पं. नेहरू मेडिकल कॉलेज

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