भेदभाव: शहर की सफाई पर महीने में हो रहे साढ़े 3 करोड़ खर्च, 15 पंचायतों के 47 हजार घरों को डस्टबिन नहीं मिले


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बिलासपुर39 मिनट पहलेलेखक: सूर्यकान्त चतुर्वेदी

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  • निगम में शामिल होने के 17 माह बाद भी पंचायत क्षेत्रों में सफाई की व्यवस्था नहीं

30.500 वर्ग किलोमीटर में फैले नगर निगम का एरिया सितंबर 2019 में सीमा वृद्धि के बाद बढ़कर 137.768 किलोमीटर हो गया। तिफरा नगर पालिका, सकरी और सिरगिट्टी नगर पंचायत सहित 18 ग्राम पंचायतों के लोगों को निगम में शामिल होने के 17 महीने बाद भी बुनियादी सहूलियतें नहीं मिल रही हैं। अकेले 15 पंचायत क्षेत्रों की बात करें तो वहां के लोगों को डस्टबिन तक नहीं दिए गए हैं।

जबकि निगम में शामिल होते साथ इन पंचायतों की करीब 1.40 लाख आबादी को अब निगम का टैक्स हर महीने भरना पड़ रहा है। ‘दैनिक भास्कर’ ने खमतराई, राजकिशोरनगर और मोपका की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया तो वहां बजबजाती नालियां, कचरे के ढेर और गंदगी मिली। नाली नहीं होने से गंदा पानी गलियों में बहता नजर आया। मार्च में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की तैयारियों में जुटे नगर निगम प्रशासन द्वारा लिंक रोड की दरो दीवार को आकर्षक पेंटिंग से सजाया जा रहा है। सड़कों पर इटेलियन स्वीपिंग मशीन से मैकेनाइज्ड सफाई होती है। बाजारों में तो दिन में दो मर्तबा सफाई का दावा हैल्थ आफिसर करते हैं।

जानिए शहर और गांव में सफाई का अंतर, पंचायतों में सफाई के नाम पर दिए गए कम कर्मचारी
हैल्थ आफिसर डा.ओंकार शर्मा के मुताबिक पुराने निगम के 66 में 59 वार्डों की मैकेनिकल सफाई पर 1.50 करोड़, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, प्रोसेसिंग पर 1.20 करोड़ और निगम के सफाई अमले (दैनिक व टास्क कर्मी सहित) मासिक वेतन पर 80 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। यानी हर महीने 3.50 करोड़ रुपए सफाई और 5 लाख फॉगिंग और एंटी लार्वा दवा पर खर्च किए जाते हैं। दूसरी तरफ पंचायतों में सफाई के नाम पर गिनती के चंद कर्मचारी दिए गए हैं, जो कभी कभार ही आते हैं। पार्षद कहते हैं कि हजारों की आबादी में गिनती के कर्मचारियों से भला क्या सफाई मिल सकती है? पंचायतों में सफाई व्यवस्था के लिए 5 नवंबर 2020 को मुख्य अभियंता नगरीय प्रशासन संचालनालय ने स्वच्छता मिशन के अंतर्गत 8.15 करोड़ की स्वीकृति चौदहवें वित्त आयोग के अंतर्गत दी। इतनी बड़ी राशि मिलने के बाद उसका उपयोग अभी तक नहीं हो पाया है।

ग्राउंड रिपोर्ट: कंटेनर की मांग करते थक गए, कचरा नहीं उठ रहा, गंदे पानी का उपयोग मजबूरी
शहर से जुड़े लिंगियाडीह पंचायत के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 51 राजकिशोर नगर की पार्षद संध्या तिवारी, 48 बिसाहूदास महंत नगर यानी मोपका की नंदिनी साखन दर्वे और 58 रानी दुर्गावती नगर यानी खमतराई की पार्षद कमला पुरुषोत्तम पटेल से बात की गई। उनका कहना है कि 17 महीनों में कंटेनर की मांग करते थक चुके हैं, परंतु डस्टबिन तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इनके वार्डों में सफाई के िलए क्रमश: 17, 9 और 7 कर्मचारी मिले हैं। बीसियोंं गलियों का जायजा लेने पर वहां सफाई नजर नहीं आई। खमतराई के लोग घरों का कचरा कैकहा तालाब के किनारे फेंक रहे हैं। सीएमपीडीआई कालोनी की ओर से कभी कभार अपनी कालोनी को बदबू से बचाने के लिए सफाई कराई जाती है। तालाब का पानी गंदा हो चुका है, परंतु निस्तारी का संकट होने के कारण लोग इसका उपयोग करने मजबूर हैंं। इसी के अंतर्गत शर्मा विहार, भक्त माता कर्मा नगर, शिवम विहार, ज्योति विहार की सड़क, गलियां धूल व गंदगी से अटी मिली। आवासपारा में घरों का गंदा पानी गली में बहता पाया गया। कमला पटेल के मुताबिक बगदाई मंदिर, दुकलहिन बाड़ा और अटल चौक के पास पीने के पानी के िलए नल कनेक्शन की मांग पिछली गर्मियों में की गई थी, जो आज तक नहीं मिला। राजकिशोर नगर की पार्षद की शिकायत है कि 10 हजार की आबादी से निगम तिहरा टैक्स वसूल रहा है। प्रापर्टी टैक्स, जल कर के अलावा बीडीए के जमाने से प्रचलित अनुरक्षण शुल्क भी लिया जा रहा है, परंतु उस अनुपात में सुविधा नहीं दी जा रही है।


सीधी बात
खजांची कुम्हार, डिप्टी कमिश्नर निगम

सवाल – 15 पंचायतों में कर्मचारी तो दूर डस्टबिन तक नहीं दिए गए?
-सफाई व्यवस्था के लिए 425 मानव बल की मांग की गई है। शासन से स्वीकृति प्रतीक्षित है। 47 हजार घरों के लिए डस्टबिन का आर्डर दिया गया है। अपने पास 10 हजार डस्टबिन हैं। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुरू करते वक्त वितरित किए जाएंगे।
सवाल – पंचायतों के लिए आखिर सफाई की क्या व्यवस्था है?
6 स्थानों पर एसएलआरएम सेंटर के शेड निर्माण के लिए वर्क आर्डर जारी किया गया है। स्वसहायता समूह की महिलाएं कचरा इकट्ठा कर उससे खाद आदि बनाएंगी। 2.15 करोड़ के 39 ऑटो टिपर, 92 लाख के 27 ई रिक्शा और 10 लाख के ट्राइसाइकिल के लिए आर्डर दिया गया है, इसका उपयोग सफाई में होगा।

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