मध्यप्रदेश की घटना: भालू के हमले में 5 घायल, घर में घुसा तो 10 साल की बच्ची ने कैद कर नानी की जान बचाई; रेस्क्यू टीम ने जंगल में छोड़ा


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खंडवा4 घंटे पहले

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पिंजरे में कैद भालू।

जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर सालई पंचायत के निंगी फालिया में शुक्रवार सुबह 8 बजे जंगली भालू ने 5 लोगों को घायल कर दिया। हमले के दौरान एक युवक ने पेड़ पर चढ़कर जान बचाने की कोशिश की तो उसका पैर खींचकर नीचे पटक दिया। घायलों के मुताबिक भालू इतनी फुर्ती से हमला कर रहा था कि उसने चंद मिनट में चार युवकों व एक बुजुर्ग महिला को घर में घुसकर नोंच लिया।

इसके बाद भालू एक घर में घुस गया। यहां दस वर्षीय बालिका ने नानी की जान बचाकर दरवाजा बाहर से बंदकर भालू को अंदर कैद कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। इंदौर की रेस्क्यू टीम ने 7 घंटे बाद दोपहर 3 बजे पिंजरा रखकर भालू को पकड़ लिया।

भालू के हमले में घायल हुए मेहताब पिता शंकर डावर (25) निवासी ग्राम सालई ने बताया सुबह 8 बजे हम लोग खेत में बक्खर चला रहे थे। तभी आवाज आई कि भागो-भागो, गांव में भालू आ गया है। हम भी बैल जोड़ी को छोड़ भागने लगे। तभी भालू ने मुझ पर हमला कर दिया। मेरे हाथ में उसके पंजे के नाखून घुस गए। भालू ने मेरे मामा करणसिंह पिता छीतू जमरे (30) पर हमला कर हाथ व पैर में नाखून मारे। निहाल पिता इडला जमरे (20) व अनारसिंह पिता छीतू (38) पर भी हमला किया। बचने के लिए अनारसिंह पेड़ पर चढ़ने लगे तो उनका पैर मुंह से पकड़कर नीचे खींच लिया।

अनारसिंह की चप्पल भालू के मुंह में रह गई। इस कारण जान बच गई। इसके बाद भालू केलीबाई पति भूरा (65) के घर में घुस गया। घटना के समय केलीबाई रोटी बना रही थी। जबकि परिवार के अन्य लोग खेत में काम कर रहे थे। उनके पेट व अन्य जगहों पर पंजे के निशान हैं। सीने पर भी अंदरुनी चोट लगी है। दोपहर 3 बजे भालू को खंडवा व इंदौर की रेस्क्यू टीम ने पिंजरा लगाकर पकड़ लिया। इधर, भालू के हमले में घायल चार युवक व एक बुजुर्ग महिला को जिला अस्पताल में भर्ती किया है। जहां सभी की हालात खतरे से बाहर बताई जा रही है।

नानी बोलीं – मेरी नातिन बाली नहीं होती तो भालू मेरा पेट फाड़ देता
मैं घर में रोटी बना रही थी। बाहर से तेज आवाज आ रही थी। मैंने ध्यान नहीं दिया। फिर अचानक मेरे घर में भालू घुसा और सीधा मुझ पर हमला कर दिया। पेट, सीने व घुटने के ऊपर मुंह व पंजे से नोचा। मैंने उस समय हिम्मत दिखाई और बाहर निकलने की कोशिश की। मैं जैसे ही बाहर निकली तो मेरी 10 वर्षीय नातिन बाली ने दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया। अगर एक सेकेंड की भी देरी हो जाती तो भालू मेरा पेट फाड़कर मार डालता। भगवान ने बाला को फरिश्ता बनाकर भेजा। जिससे मेरी जान बच गई।
– भालू के हमले में घायल 65 वर्षीय केली बाई पति भूरा ने जिला अस्पताल में जैसा भास्कर को बताया।

इंदौर से आई टीम : दरवाजे पर पिंजरा अड़ाते ही कैद हुआ
भालू को पकड़ने के लिए इंदौर से रेस्क्यू टीम दोपहर डेढ़ बजे सालई गांव पहुंची। केलीबाई के घर के चारों तरफ करीब डेढ़ हजार लोग जमा थे। रेस्क्यू टीम ने मुख्य दरवाजे को खोलने से पहले वहां पिंजरा लगाया। दरवाजे को चारों तरफ से लॉक किया, ताकि भालू कहीं से भी भागने न पाए। मशक्कत के बाद पिंजरे के पास आते ही भालू कैद हो गया।

भालू को पिंजरे में बंद कर ले जाते हुए खंडवा वन विभाग की टीम व इंदौर की रेस्क्यू टीम के सदस्य।

भालू को पिंजरे में बंद कर ले जाते हुए खंडवा वन विभाग की टीम व इंदौर की रेस्क्यू टीम के सदस्य।

सिरपुर व लखनगांव में तेंदुए की दहशत बरकरार
शहर से पांच किमी दूर ग्राम सिरपुर में 22 मई को तेंदुए के हमले में पांच लोग घायल हो गए। इसके दूसरे ही दिन लखनगांव में तेंदुआ एक बकरी को खा गया व तीन को घायल कर दिया। दोनों ही गांवों में तेंदुए की दहशत बरकरार है।

नर्मदानगर के जंगल में छोड़ा
सालई-गजवाड़ा क्षेत्र में भालू, तेंदुए के अलावा के अन्य जंगली जानवर है। वहां के ग्रामीणों को पहले से ही अलर्ट कर रखा है। खंडवा व इंदौर की टीम ने रेस्क्यू कर भालू को पकड़ा। शुक्रवार शाम नर्मदानगर के जंगल में छोड़ दिया।
विजय सिंह चौहान, वन परिक्षेत्राधिकारी, खंडवा

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