मनमानी का सोना: खरे सोने का भाव एक, पर जेवराती के दाम में पांच हजार तक का अंतर; GST लागू होने के बाद नहीं होना चाहिए इतना फर्क


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मुंबई/भोपाल2 मिनट पहलेलेखक: स्कन्द विवेक धर

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सोना कहीं 41 हजार तो कहीं 45 हजार प्रति 10 ग्राम में बिक रहा। (सिम्बॉलिक फोटो)

  • जीएसटी लागू होने के बाद अलग-अलग शहरों के दाम में नहीं होना चाहिए इतना फर्क
  • 22 कैरेट सोने का कोई नेशनल रेट न होने का फायदा उठा रहीं स्थानीय एसोसिएशन

मुंबई शहर का झावेरी बाजार… देश में बिकने वाले बुलियन का 70 फीसदी और ज्वैलरी का 50 फीसदी सोना इसी बाजार से जाता है। देश के सबसे बड़े ज्वैलरी संगठन इंडियन बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक ज्वैलर यहां से 24 कैरेट सोना बुलियन के रूप में खरीदकर ले जाते हैं। जहां इसे चांदी और तांबा मिलाकर 22 कैरेट यानी जेवराती सोने में बदला जाता है। यह मानक प्रक्रिया है, लेकिन इसके बाद कीमतों को लेकर मनमानी शुरू हो जाती है।

कहीं, ये सोना 41 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम, कहीं 45 हजार, तो कहीं 46 हजार रुपए तक बिकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी लागू होने से कीमतों में सौ-दो सौ रुपए से ज्यादा का फर्क नहीं होना चाहिए। दैनिक भास्कर ने तीन मार्च को मुंबई समेत देश के 10 शहरों में जेवराती सोने की कीमतों का जायजा लिया। उस दिन मुंबई में 24 कैरेट का दाम 44,516 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

एक ही शहर में सोने के अलग-अलग दाम हैं

आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर और इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर के अध्यक्ष डॉ. अरविंद सहाय कहते हैं, ‘अंतरराष्ट्रीय बाजारों से 24 कैरेट सोने की कीमत तय होती है। देश में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज इसे तय करता है। इसलिए स्टैंडर्ड रेट होता है। लेकिन 22 कैरेट का देश में स्टैंडर्ड रेट नहीं है।’

वहीं, एक बड़े ज्वेलर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘22 कैरेट सोने की कीमत को लेकर विस्तृत जानकारी के अभाव का फायदा ज्वेलर्स उठाते हैं। जेवराती सोने की कीमत स्थानीय एसोसिएशन तय करती है। इसमें बाहरी व्यक्ति का दखल नहीं होता। भोपाल समेत कई शहरों में अलग-अलग इलाके की अलग-अलग एसोसिएशन हैं। मनमानी कीमतें तय करने से ही अलग-अलग शहरों में भाव में इतना अंतर होता है।’

देश में सोना बचत के रूप में इस्तेमाल होने वाला दूसरा सबसे बड़ा जरिया

भारतीय रिजर्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक, देश में सोना बचत के रूप में दूसरा सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला माध्यम है। इसमें भी 60 फीसदी से ज्यादा लोग ज्वैलरी के रूप में सोना खरीदते हैं। एंजेल ब्रोकिंग के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख अनुज गुप्ता कहते हैं, बैंक, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और बीमा के नियामक हैं। लेकिन 22 कैरेट सोने का न नियामक है, न स्टैंडर्ड रेट। इससे निवेशक मनमानी का शिकार बन रहे हैं। प्रो. सहाय कहते हैं, आने वाले कुछ वर्षों में देश में इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज और स्पॉट एक्सचेंज शुरू हो जाएगा। तब संभव है कि 22 कैरेट सोने के लिए भी स्टैंडर्ड मूल्य तय हो।

देश में सिर्फ बैंकों को सोना आयात करने की मंजूरी है। बैंक सभी को बराबर भाव पर 24 कैरेट सोना देते हैं। जीएसटी लागू होने से समान टैक्स है। ऐसे में 22 कैरेट सोने की कीमतें भी बराबर होनी चाहिए।

– गौरव आनंद, डायरेक्टर, आनंद ज्वेल्स

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