ममता के सलाहकार का केंद्र को जवाब: पश्चिम बंगाल के पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय ने कहा- मुख्यमंत्री ने जैसा कहा, वैसा किया


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कोलकाता9 मिनट पहले

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28 मई को PM मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे। उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के कलाईकुंडा में रिव्यू बैठक बुलाई थी। आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तब के चीफ सेक्रेटरी ने उन्हें इंतजार करवाया।

केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा रहे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सलाहकार और राज्य के पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय ने केंद्र सरकार के नोटिस का जवाब भेज दिया है। अलपन ने अपने जवाब में लिखा है कि मैंने मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन किया है।

सूत्रों के मुताबिक, अलपन ने अपने जवाब में लिखा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुझे जो निर्देश दिए, मैंने उसका पालन किया है। पीएम की बैठक से नदारद होने के सवाल पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि 28 मई को मैं मुख्यमंत्री के साथ तुफान प्रभावित उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले का हवाई सर्वेक्षण कर रहा था। वह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर दीघा गया था।

28 मई को ओडिशा से PM मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे। उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के कलाईकुंडा में दोपहर 2 बजे बैठक की। इसमें राज्यपाल जगदीप धनखड़ तो आए, लेकिन CM ममता बनर्जी की कुर्सी खाली रही। मोदी करीब 30 मिनट तक उनका इंतजार करते रहे।

28 मई को ओडिशा से PM मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे। उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के कलाईकुंडा में दोपहर 2 बजे बैठक की। इसमें राज्यपाल जगदीप धनखड़ तो आए, लेकिन CM ममता बनर्जी की कुर्सी खाली रही। मोदी करीब 30 मिनट तक उनका इंतजार करते रहे।

कब क्या हुआ? पूरा मामला ऐसे समझें..

  • 28 मई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यास तूफान प्रभावित ओडिशा और पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए। ओडिशा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ बैठक के बाद उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के कलाईकुंडा में दोपहर 2 बजे रिव्यू मीटिंग रखी थी। इसमें राज्यपाल जगदीप धनखड़ तो आए, लेकिन CM ममता बनर्जी की कुर्सी खाली रही। मोदी करीब 30 मिनट तक उनका इंतजार करते रहे। इसके बाद ममता आईं और तूफान से हुए नुकसान की प्राइमरी रिपोर्ट सौंपकर बिना मीटिंग किए निकल गईं। ममता शुभेंदु अधिकारी को समीक्षा बैठक में बुलाने पर नाराज थीं।
  • 28 मई: देर रात केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय को वापस बुला लिया। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने इसका आदेश कर राज्य सरकार से गुजारिश की है कि उन्हें तुरंत रिलीव किया जाए। अलापन को 31 मई सुबह 10 बजे तक DoPT, दिल्ली रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। ममता बनर्जी ने 24 मई को कहा था कि बंद्योपाध्याय का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल कैडर के 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं।
  • 30 मई: केंद्र सरकार के आदेश पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने बताया कि अलपन 31 मई को रिटायर हो रहे हैं और वे दिल्ली में जॉइन करने नहीं जा रहे हैं। उन्हें 3 साल के लिए मुख्य सलाहकार बनाया गया है। उनकी जगह एचके द्विवेदी को नया मुख्य सचिव और बीपी गोपालिका को नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है। अलपन दिल्ली रवाना नहीं हुए।
  • 31 मई: ममता के इस फैसले के बाद केंद्र भी कार्रवाई पर अड़ गया। केंद्र ने कहा-भले ही अलपन रिटायर हो रहे हों, लेकिन हम चार्जशीट भेजकर उन पर कार्रवाई करेंगे। प्रधानमंत्री को मीटिंग रूम में राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए 15 मिनट इंतजार करना पड़ा। जब मुख्य सचिव नहीं पहुंचे थे तो उन्हें अधिकारियों ने फोन लगाया और पूछा कि वो इस मीटिंग में शामिल होंगे या नहीं? इसके बाद मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री मीटिंग रूम में आए और तुरंत ही चले भी गए। इसे प्रधानमंत्री की रिव्यू मीटिंग से अनुपस्थित रहना ही माना जाएगा। प्रधानमंत्री नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के चेयरमैन भी हैं। अलपन बंधोपाध्याय की ये हरकत केंद्र द्वारा कानूनी तौर पर दिए गए निर्देशों को दरकिनार करना ही माना जाएगा। ऐसे में उन पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 51(b) लगाई जाती है। हमने अलपन से लिखित में ये जवाब मांगा है कि आपदा राहत एक्ट का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ धारा 51(b) के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। उन्हें 3 दिन के भीतर कारण बताना होगा।

क्या है आपदा प्रबंधन एक्ट की धारा 51
केंद्र और राज्य के किसी भी अधिकारी को या इन सरकारों द्वारा अधिकृत व्यक्ति के कामों में बिना उचित कारण के बाधा डालने पर एक्शन लिया जा सकता है। इसके अलावा केंद्र, राज्य, राष्ट्रीय समिति, या राज्य की समिति द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन न करने पर भी एक्शन का प्रावधान है।
इस एक्ट के तहत एक वर्ष की जेल या जुर्माना हो सकता है। जेल और जुर्माना दोनों भी लागू किए जा सकते हैं। अगर काम में बाधा से या फिर निर्देशों को न मानने से किसी की जान जाती है या नुकसान होता है तो ऐसा करने वाले व्यक्ति को 2 साल की सजा दी जा सकती है।

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