महामारी में ब्लैक मार्केटिंग: पटना में रेमडेसिविर की कालाबाजारी में जिस अस्पताल पर केस हुआ था, मानवीय भूल बता उसे दी क्लीनचिट


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पटनाएक घंटा पहले

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महज तीन दिन की जांच में कंकड़बाग का साईं अस्पताल सभी आरोपों से बरी।

राजधानी में रेमडेसिविर की कालाबाजारी में जिस अस्पताल पर केस दर्ज किया गया था, जांच में तीन दिन बाद ही उसे मानवीय भूल बताकर क्लीनचिट दे दी गई। मामला कंकड़बाग के साईं हॉस्पिटल का है। 17 मई को शिकायत मिलने के बाद ड्रग डिपार्टमेंट की टीम ने साईं अस्पताल में छापेमारी की थी और फिर कंकड़बाग थाने में एफआईआर कराया था।

आरोप लगाया कि 65 वायल रेमडेसिविर साईं मेडिकल्स के द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत यानी 4000 रुपए प्रति वायल के हिसाब से बेची गई है। मामला अब पुलिस की जांच का था लेकिन ड्रग डिपार्टमेंट की तरफ से सहायक औषधि नियंत्रक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई। टीम ने 20 मई को जांच की और 21 मई को राज्य औषधि नियंत्रक को रिपोर्ट सौंपते हुए लिखा कि श्री साईं मेडिकल्स द्वारा जो उल्लंघन किया गया वह

टंकणीय/मानवीय भूल का प्रकार है। इसे आपराधिक नीयत से नहीं किया गया है। प्राथमिकी दर्ज कराना आवश्यक प्रतीत नहीं होता है, विभागीय स्तर से चेतावनी इत्यादि दी जा सकती है। अगर भविष्य में संबंधित संस्थान द्वारा इसकी पुनरावृत्ति की जाती है तो औषधि एवं अंगराग अधिनियम 1945 के तहत नियमसंगत कार्रवाई की जा सकती है।

17 मई को पकड़ में आई थी अस्पताल की जालसाजी

17 मई को श्री साईं मेडिकल्स में धावा दल ने छापेमारी की। ड्रग इंस्पेक्टर संजय पासवान, शशि भूषण और के. अंसारी की टीम ने छापेमारी की। छापे के बाद ड्रग इंस्पेक्टर राजीव राज ने कंकड़बाग थाने में एफआईआर कराई। इसमें कहा गया कि साईं ने न्यू पूरन मेडिकल एजेंसी से 17 और 19 अप्रैल को 72 वायल रेमडिसिविर खरीदा। बिल पर एमआरपी 3000 रुपए प्रति वायल अंकित है। जांच के दौरान पाया गया कि 72 वायल में से 65 वायल को साईं के द्वारा 4000 प्रति वायल में बेचा गया। एफआईआर में लिखा है कि महामारी के दौर में जीवन रक्षक दवाओं को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना कालाबाजारी की श्रेणी में आता है।

जब दोबारा हुई जांच तो अस्पताल ने कहा- एक-एक हजार लौटा दिए
एफआईआर के तीन दिन बाद ही ड्रग कंट्रोलर के आदेश के बाद असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम 20 मई को जांच करने साईं पहुंची। जांच रिपोर्ट के अनुसार प्रतिष्ठान को 22 अप्रैल को मालूम होता है कि दवा की कीमत 3000 प्रति वायल कर दी गई है तब जिन लोगों को 4000 प्रति वायल के हिसाब से बेचा गया उन्हें सूचित किया और एक-एक हजार रुपए लौटाए भी गए।

साईं में छापे के बाद सुस्त पड़ गया धावा दल, नहीं की कोई कार्रवाई
कोरोना महामारी के दौरान कालाबाजारी न हो इसके लिए ड्रग डिपार्टमेंट की तरफ से धावा दल गठित किया गया। दल में तीन ड्रग इंस्पेक्टर को रखा गया। दानापुर, कंकड़बाग, गांधी मैदान, पत्रकार नगर, शास्त्रीनगर सहित कई थानों में कालाबाजारियों पर एफआईआर कराई गई। गिरफ्तारी भी हुई। क्या यह महज संयोग है कि 17 मई को साईं अस्पताल में हुई छापेमारी के बाद धावा दल ने कहीं कोई कार्रवाई नहीं की।

एमआरपी है 3 हजार, तब 4 हजार वसूलना कैसी मानवीय भूल?
भारत सरकार द्वारा 17 अप्रैल को ही रेमडेसिविर की कीमत 4000 रु. प्रति वायल की जगह 3000 रु. कर दी गई थी। साईं मेडिकल्स ने 59 वायल रेमडेसिविर 19 अप्रैल से 22 अप्रैल के बीच 4000 रु. प्रति वायल के हिसाब से बेचा। अगर सरकार का आदेश नहीं मालूम होने की बात भी मान ली जाए तो जिस पूरन एजेंसी से साईं ने रेमडेसिविर खरीदी है उसमें भी एमआरपी 3000 ही अंकित है।

इसके बाद भी साईं ने मरीजों को 4000 रुपए प्रति वायल के हिसाब से बेचा। हालांकि पूरन से साईं ने 17 अप्रैल और 19 अप्रैल को कुल 72 वायल रेमडेसिविर खरीदी है। कागजात को देखें तो पूरन ने साईं से 36 वायल के 52877 रुपया लिए। इस हिसाब से साईं को एक वायल रेमडेसिविर के 1468.80 रुपए चुकाने पड़े।

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