मुंशी मालू से सीख: लोग उन्हें अदना मुंशी समझते थे, 65 साल की सेवा के सम्मान में हाईकोर्ट के सात जज पहुंच गए तो छलकी आंखें


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जोधपुर26 मिनट पहले

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बाएं से तीसरे मुंशी मालू। जस्टिस दिनेश मेहता, विजय विश्नोई, संगीत लोढ़ा, संदीप मेहता, अरुण भंसाली, डॉ. पीएस भाटी एवं जस्टिस देवेंद्र कच्छवाह।

  • जज बोले-मुकदमे की तारीख, फाइलें उन्हें मुंहजुबानी याद रहती हैं

राजस्थान में 65 साल तक वकील के सहयोगी के रूप में काम किया मुंशी गुलाबचंद मालू ने। शुक्रवार को बार एसोसिएशन ने उनका सम्मान किया तो राजस्थान हाईकोर्ट के सात जज खुद ही समारोह में चले आए। कारण- अब तक उनके साथ ऑफिस में काम करने वाले सात वकील सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट में जज बन चुके हैं, जबकि एक केंद्रीय विधि मंत्री बने और एक वर्तमान में राज्य के महाधिवक्ता हैं।

इन सबने उनसे सीखा। सम्मान के दौरान उनकी आंखें छलक आईं। अभिनंदन के वक्त हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संगीतराज लोढ़ा बोले- ‘जब मैंने वरिष्ठ वकील मरुधर मृदुल का ऑफिस ज्वाइन किया तो मुंशी मालू से खूब काम सीखा, वे एक तरह से मेरे प्रथम गुरु रहे। उनकी खासियत है कि उन्हें ऑफिस की सभी फाइलें व मुकदमों और पेशी की तारीखें मुंहजुबानी याद रहती हैं। किसी भी फाइल का नंबर पूछने पर वे झट बता देते थे।’

जस्टिस लोढा ने मुंशी मालू को सम्मानित करते हुए कहा- ‘उस वक्त मालू साहब कहा करते थे कि मुंशी को फरियादी के पैसों का हिसाब-किताब रखना चाहिए। वे अपने पास हमेशा एक डायरी रखते थे, जिसमें वे फरियादी के पैसों का हिसाब, तारीख पेशी आदि नोट करके रखते थे। एडवोकेट क्लर्क विधिक संस्थान की आत्मा होते हैं। वकालत के शुरुआती दिनों में मुंशी ही वकीलों के प्रथम गुरु होते हैं।

उनके साथ काम करते हुए मैंने भी काफी कुछ सीखा।’ 1935 में फलौदी में जन्मे मालू ने 1951 में एडवोकेट मंगलचंद वैद्य के ऑफिस से काम शुरू किया। इसके बाद मोहनलाल जोशी और मरुधर मृदुल जैसे नामी वकीलों के साथ लंबे समय तक काम किया।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जीएस सिंघवी, जस्टिस राजेंद्र व्यास, जस्टिस प्रेम आसोपा, जस्टिस विनीत कोठारी, जस्टिस संगीतराज लोढ़ा, जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस विनीत माथुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी व महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कोर्ट का प्रक्रियात्मक ज्ञान मुंशी गुलाबचंद मालू से ही सीखा।

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