यूनिवर्सिटी प्रोफेसर से राहुल की चर्चा: कांग्रेस नेता बोले-संसद में भाजपा के MP मुझसे कहते हैं कि वे खुलकर अपनी बात नहीं रख सकते, उन्हें बताया जाता है कि क्या कहना है


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नई दिल्लीएक मिनट पहले

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को दावा किया कि संसद में भाजपा के MP खुलकर अपनी बात तक नहीं रख सकते। उन्हें क्या बोलना है, इसके लिए भी उन्हें ऊपर से निर्देश दिए जाते हैं। राहुल ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशुतोष वार्ष्णेय और वहां के स्टूडेंट्स के साथ वर्चुअली बातचीत कर रहे थे। यह चर्चा करीब डेढ़ घंटे तक चली। पढ़ें बातचीत के मुख्य अंश…

भाजपा के सांसदों को बोलने के निर्देश मिलते हैं
राहुल ने कहा कि संसद में विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता। आप मोबाइल नहीं रख सकते। टीवी में वही दिखाते हैं जितना सरकार दिखाना चाहती है। यहां तक की भाजपा के सांसदों को बोलने की आजादी नहीं है। वे अपने मन से कोई भी बात नहीं बोल सकते। संसद में उन्हें बोलने से पहले ऊपर से निर्देश मिलते हैं कि उन्हें क्या और कितना बोलना है। यही बात प्रेस और ज्यूडिशियरी के साथ भी है।

कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ हो रहा है
वार्ष्णेय ने राहुल से भारत के लोकतंत्र को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा, अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस और स्वीडन की वी-डेमोक्रेसी (वैराइटीज ऑफ डेमोक्रेसी) ने भारत के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा किया है। क्या आप उनसे सहमत हैं? इस पर राहुल ने कहा कि देखिए पहली बात तो हमें इन संस्थाओं के स्टैम्प की जरूरत नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ हो रहा है।

देश की संस्थाओं पर अतिक्रमण से देश को खतरा
वार्ष्णेय ने भारत में सिविल सोसायटी और संस्थाओं की अखंडता पर सवाल किया। उन्होंने पूछा, क्या भारत में अब इलेक्शन कमिशन जैसे संस्थान भी खतरे में हैं? राहुल ने कहा कि भारत में सभी संस्थाओं में एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। वे सरकारी संस्थाओं में बड़े पदों पर बैठाए जा रहे हैं जो अपनी विचारधारा और संस्कृति को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। यह देश की संस्थाओं पर अतिक्रमण है। इससे देश को खतरा है।

भारत की यूनिवर्सिटी में भी बोलने की आजादी नहीं
राहुल ने चर्चा में कहा कि भारत में ऐसी कई यूनिवर्सिटी हैं जहां मैं बातचीत भी नहीं कर सकता। यहां बोलने की आजादी नहीं है। इन यूनिवर्सिटीज से लोकतंत्र खत्म किया जा रहा है। यहां एक खास विचारधारा को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। उनका सीधा इशारा RSS की ओर था।

किसान आंदोलन पर भी हुई चर्चा
भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर जॉर्ज नैंसी यूनिवर्सिटी के इकॉनोमी के प्रोफेसर एंड्रयू फॉस्टर ने सवाल किया। राहुल ने कहा कि कृषि कानूनों को बेहतर बनाने के हम भी हिमायती हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून को बनाने के दौरान उनके प्रमुख स्टेकहोल्डर्स किसानों से कोई बातचीत नहीं की। उन्होंने सिर्फ अडाणी और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के फायदे के लिए कानून बना दिया। अभी जो कानून बनाए गए हैं यह पूरी तरह से किसानों को बर्बाद कर देगा।

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