राकेश टिकैत से भास्कर की विशेष बातचीत: बोले- सरकार से हमारे सींग उलझ गए हैं; किसान आंदोलन कब खत्म होगा पता नहीं, लेकिन दिसंबर तक की तैयारी हमने कर रखी है


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भरतपुर8 मिनट पहले

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टिकैत दौसा में एक सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे। वे युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव दुष्यंत सिंह के होटल पार्क रीजेंसी में ठहरे थे। इस मौके पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव व नगर निगम में उप महापौर गिरीश चौधरी, पूर्व प्रधान मीनू सिंह, भरत सिंह सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। 

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत शनिवार को राजस्थान के दौसा पहुंचे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के साथ हमारे सींग उलझ गए हैं। सरकार अपने शर्तों पर बातचीत करना चाहती है तो हम भी कानून वापसी की शर्त पर ही बात करेंगे। आंदोलन कब खत्म होगा पता नहीं, लेकिन हमने दिसंबर तक की तैयारी कर ली है। पढ़िए भास्कर से टिकैत की पूरी बातचीत…

भास्कर. कांग्रेस पार्टी पीछे से आंदोलन को सपोर्ट कर रही है?
टिकैत. कांग्रेस तो पहले से ही डरी हुई है। विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस को किसान आंदोलन चलाना चाहिए, लेकिन बाहर निकल कर नहीं आ रही। यह विपक्ष की कमजोरी है। BKU के इससे पहले के बडे़ आंदोलनों को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि भाजपा के लोग अबकी कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा सक्रिय रहते थे। इसलिए विपक्ष को खुलकर आंदोलन में साथ आना चाहिए।
भास्कर. क्या आपके आंसुओं का असर खत्म हो गया है?
टिकैत. भारत बंद सफल रहा था। हमने सील बंद करने की बात तो कभी नहीं कही थी। ट्रांसपोर्टर और छोटे व्यापारी सभी ने साथ दिया। इसके अलावा खेतों में काम चल रहा है। इसलिए कहीं-कहीं थोड़ा कम प्रभाव दिखा। खेती में कामकाज के कारण कुछ सभाओं में भीड़ कम रही उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
भास्कर. सरकार और किसानों के बीच एक फोन कॉल की दूरी कब खत्म होगी?
टिकैत. यह तो सरकार को ही पता होगा। सरकार बात तो करना चाहती है, लेकिन शर्तों के साथ। अब तो हरियाणा के सीएम भी कह चुके हैं कि तीनों कानून वापस नहीं होंगे। तो हमारी भी शर्त है कि तीनों कानून वापस लेने का सरकार वादा करेगी तभी बात करेंगे।
भास्कर. आपके बयानों को अराजकता भरा बताया जा रहा है?
टिकैत. ट्रैक्टर रैली से पहले हमने कहा था कि वक्कल उड़ा देंगे। उन्होंने तो बहुत कुछ कहा। अब हम यही तो कह रहे कि संसद पर फसल बेचेंगे। पीएम खुद कह चुके हैं कि किसान कहीं भी माल बेच सकता है। सरकार को चाहिए कि संसद पर काउंटर खोले।
भास्कर. सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ा दिए जाने के कारण फसल के MSP से ज्यादा भाव है?
टिकैत. हां हैं, लेकिन यह कब तक रहेंगे। कुछ पता नहीं। हम भी यही तो कह रहे हैं कि MSP की सरकार गारंटी दे। कानून लेकर आए।
भास्कर. आरोप है कि आप राजनीतिज्ञ है और आंदोलन के जरिए राजनीति कर रहे हैं?
टिकैत. हां मैंने चुनाव लड़ा था। सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। हम राजनीति नहीं कर रहे, किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम बंगाल में किसानों से एक मुट्ठी चावल मांगने गए थे। किसानों से कहा था कि वे भी चावल की न्यूनतम समर्थन मूल्य की बात रखें। इससे किसे फायदा/नुकसान होगा, हमें मतलब नहीं है।
भास्कर. अब फोकस क्या है?
टिकैत. गुजरात को आजाद करना है। वहां सरकार मनमानी कर रही है। BKU के पदाधिकारियों को पुलिस प्रेस वार्ता में से उठा ले गई। 4-5 अप्रैल को गुजरात में आंदोलन करेंगे। कानून के जरिए बड़ी कंपनियां किसानों की जमीन हड़प लेंगी। किसान को मजदूर बना दिया जाएगा। सभी संस्थानों को सरकार बेचना चाहती है।

(रिपोर्ट: प्रमोद कल्याण)

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