राजनीतिक पार्टियों के घेराव पर बंटे बड़े किसान नेता: BKU उग्राहां अध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने कहा- हम सिर्फ भाजपा का विरोध करेंगे; राजेवाल बोले- हमारे लिए सभी पार्टियां एक जैसी


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लुधियाना।6 मिनट पहले

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भारतीय किसान यूनियन उग्राहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां।

चुनावी साल के दौरान अपने-अपने तरीके से चुनाव प्रचार में लगीं राजनीतिक पार्टियों के घेराव को लेकर अब किसान यूनियन के बड़े नेता अब बंटे नजर आ रहे हैं। दिल्ली में चल रहे संयुक्त किसान मोर्चा में भी बिखराव नजर आ रहा है। भारतीय किसान यूनियन उग्राहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा है कि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का विरोध होना चाहिए और वह सिर्फ उनका ही विरोध करेंगे। जबकि भारतीय किसान यूनियन राजेवाल समेत कई संगठन सभी दलों का विरोध करने की बात पर अड़े हैं। इससे साफ है कि इस मुद्दे पर सभी 32 किसान संगठनों की अपनी अपनी राय बनी हुई है। जिससे आने वाले समय में जमीनी स्तर पर काम कर रहे किसान भी बंट सकते हैं। इसका सीधा असर दिल्ली में चल रहे संघर्ष पर पड़ने सकता है।

जोगिंदर सिंह उग्राहां से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा है कि कृषि कानून भाजपा लेकर आई है और प्रधानमंत्री व अन्य नेता इस बात पर अड़े है कि कानून रद्द नहीं होंगे। इसलिए इनका ही विरोध होना चाहिए और उनका संगठन यही काम करेगा। पिछले दिनों हुई बैठक में दूसरी राजनीतिक पार्टियों द्वारा सभी पार्टियों का विरोध करने के लिए फैसले पर उनका कहना था कि जिस बैठक में यह फैसला लिया गया है, वह वहां पर नहीं थे। यह संयुक्त किसान मोर्चा का फैसला नहीं है क्योंकि वहां पर फैसले राष्ट्रीय स्तर पर लिए जाते हैं। यह फैसला पंजाब के संगठनों का है, जिससे वह इतफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि बहुत से संगठन तो ऐसे हैं, जो किसी न किसी ढंग से राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए हैं।

बलवीर सिंह राजेवाल।

बलवीर सिंह राजेवाल।

राजनीतिक पार्टियों का प्रचार बंद होगा जरूरीः राजेवाल
दूसरी तरफ बलबीर सिंह राजेवाल से फोन पर हुई बात में वह अपनी उस बात पर अड़े हुए दिखाई दिए। उन्होंने कहा था कि सभी राजनीतिक पार्टियों को अपना प्रचार बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इससे गांवों में भाईचारक सांझ खत्म होगी और इससे दिल्ली में चल रहे संघर्ष पर भी असर पड़ेगा। राजनीतिक पार्टियों को रविवार को फैसला भी सुना दिया गया था कि वह राजनीतिक सभाएं करें। राजेवाल का कहना है शिरोमणी अकाली दल बादल समेत अगर दूसरी पार्टियां जन सभाएं करती हैं, तो इसका विरोध होना लाजिमी है। इन नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी से बाकी संगठन बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। किरती किसान यूनियन प्रधान रजिंदर सिंह दीप सिंह वाला भी कहते हैं कि वह शुरू से कहते आ रहे हैं कि सभी राजनीतिक पार्टियां एक सी हैं और इनका विरोध होना चाहिए।

मोगा में लाठीचार्ज के बाद पैदा हुआ बिखराव
दरअसल किसान संघर्ष को लेकर भी किसान संगठनों में काफी मतभेद देखने को मिल चुके हैं। पहले दिल्ली जाने को लेकर, फिर पश्चिम बंगाल में प्रचार को लेकर, उत्तर प्रदेश में जन सभा करने को लेकर संगठनों में मतभेद रहे हैं। दिल्ली सिंघु बार्डर में होने वाली बैठकों में भी नेता एक दूसरे का विरोध करते रहे हैं। मगर अब सीधी बयानबाजी सामने आने लगी है।

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