राजस्थान के 8 जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट: 1000 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर कोरोना का असर; कई के बंद होने से 2 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित, 50 हजार मजदूर बेरोजगार


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राजस्थान/झुंझुनूंएक घंटा पहले

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प्रतीकात्मक फोटो।

कोरोना की दूसरी लहर ने उद्योग-धंधे पूरी तरह बर्बाद कर दिए हैं। मजदूर पलायन कर चुके हैं। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों पर ताले लग गए हैं। सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की नई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसमें कहा गया है कि उद्योग धंधे बंद होने से बेरोजगारी के मामले में राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर आ गया है।

सर्वाधिक 35 फीसदी बेरोजगारी दर हरियाणा में है। जबकि राजस्थान में यह दर 28 फीसदी तक पहुंच चुकी है। कोरोना के कारण बिगड़े हालात जांचने के लिए भास्कर टीम 8 जिलों के इंडस्ट्रियल एरिया में गई, प्रमुख उद्योगपतियों से बात की और औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों से बात की।

अलवर के भिवाड़ी के हालात देखिए। यहां 3750 मजदूर सड़क पर आ गए हैं। पथरेड़ी में 3500 मजदूरों वाली गारमेंट कंपनी ओरिएंट क्राफ्ट और कहरानी में ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाली 250 मजदूरों वाली ओसीएल कंपनी बंद हो गई। ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी 30 एकड़ में फैली थी। कंपनी ने अपने मजदूरों के रहने के लिए 108 फ्लैट भी बनवाए थे।

इसके बंद होने से जॉब वर्क करने वाली करीब 15 से 20 छोटी कंपनियां भी प्रभावित हुई हैं। यही हालात सीकर के हैं। 200 फैक्ट्रियों में काम ठप है। 400 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होने से 10 हजार मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।

ऐसे हालात सिर्फ इन दो जिलों के नहीं हैं। सभी जगह ऐसे ही हालात हैं। फैक्ट्री मालिक बताते हैं कि फैक्ट्रियां बंद होने से 2 हजार करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। जबकि 50 हजार से ज्यादा मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं।

सीकर- 200 फैक्ट्रियों में काम ठप, प्रभावित हुआ 400 करोड़ रु. का कारोबार
कच्चा माल नहीं मिलने, डिमांड कम होने और मजदूर नहीं मिलने के कारण रीको इंडस्ट्रियल एरिया में ग्रेनाइट, नमकीन, ट्रांसफार्मर सहित अन्य करीब 20 फैक्ट्रियों में काम बंद है। श्रीमाधोपुर उद्योग संघ के अध्यक्ष द्वारकेश स्वामी कहते हैं-तिजोरी बनाने वाली आधा दर्जन फैक्ट्रियां बंद हैं। यहां करीब 80 करोड़ का काम ठप है।

नीमकाथाना उद्योग संघ के अध्यक्ष दौलतराम गोयल ने बताया कि नीमकाथाना, अजमेरी, हरिपुरा व अजीतगढ़ इंडस्ट्रियल जोन में खनिज आधारित 250 फैक्ट्रियां हैं। आगे डिमांड नहीं होने से 115 फैक्ट्रियों में काम बंद हैं। यहां सालाना 240 करोड़ का कारोबार होता है। पलसाना के रीको एरिया में प्लास्टिक, फर्नीचर, फूड-प्रोडक्ट की 20 फैक्ट्रियां बंद हैं। इनमें करीब तीन हजार लोगों को रोजगार मिलता है।

झुंझुनूं- फैक्ट्रियां बंद तो नहीं हुई, काम कम हो गया
जिले में करीब 350 छोटी और मध्यम इंडस्ट्री हैं। इनका संचालन मुश्किल हो गया है, मजदूरों को काम मिलना कम हो गया है। इनमें पशु चारा, आटा मिल, तेल मिल और निर्माण सामग्री की छोटी इकाइयां हैं। एक इकाई में औसत 10 से 15 श्रमिक काम करते हैं।

हनुमानगढ़- 50% फैक्ट्रियां बंद, 200 करोड़ रुपए का नुकसान
रीको इंडस्ट्रियल एरिया में 50 प्रतिशत से अधिक फैक्ट्रियां बंद हैं। मजदूर भी पलायन कर चुके हैं। अब तक करीब 200 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। जिले में 2500 से अधिक लघु उद्योग आखिरी सांसें गिन रहे हैं।

श्रीगंगानगर- 600 उद्योग बंद हुए, 12 हजार मजदूर बेराेजगार
1500 उद्योग धंधों में से 600 बंद हैं। लगभग 12 हजार मजदूर बेरोजगार हा़े गए हैं। वे लॉकडाउन के कारण घराें में बंद हैं। उद्याेगपतियाें का कहना है कि काेराेनाकाल में कच्चे माल की उपलब्धता में कमी व अन्य दिक्कतों के कारण उद्याेग घाटे में चल रहे हैं।

चूरू- पीओपी की फैक्ट्रियां बनाने लगीं दूसरे उत्पाद

चूरू औद्योगिक इकाई के सचिव अजीत अग्रवाल बताते हैं-यहां 150 फैक्ट्री हैं। 1600 मजदूरों में से अब 800 ही कार्यरत हैं। सरदारशहर औद्योगिक इकाई के बनवारीलाल जांगिड़ ने बताया-यहां पीओपी की 13 फैक्ट्री थी, जिसमें से 11 बंद हो चुकी हैं, उनमें दूसरे उत्पाद बनाए जा रहे हैं। फैक्ट्रियों में पांच हजार मजदूर काम करते थे, जो अब दो हजार ही रह गए हैं। रतनगढ़ में 70-80 फैक्ट्री में 1500 मजदूर भी कम हो गए।

अलवर- 225 कंपनियां अस्थायी रूप से बंद, 10 हजार हुए बेरोजगार
ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं मिलने से भिवाड़ी की करीब 200 फेब्रिकेशन कंपनियां और 25 इंगट कंपनियों ने अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया। गायत्री फर्टिप्लांट इंटरनेशनल प्रा. लिमिटेड के निदेशक केआर शर्मा ने बताया कि भिवाड़ी में फेब्रिकेशन 200 कंपनियां में 10 हजार मजदूर काम करते थे, लेकिन अब वह बंद है। बिजली निगम के एईएन कमल वर्मा के अनुसार भिवाड़ी में बिजली का कंजप्शन 24 करोड़ यूनिट प्रतिमाह से घटकर 21 करोड़ यूनिट रह गया है।

धौलपुर/भरतपुर- एक साल में 8-10 इकाइयां बंद
धौलपुर में पिछले एक साल के दौरान 8-10 इकाइयां बंद हुई हैं। पत्थर इकाइयों समेत कई इंडस्ट्रीज लॉकडाउन के दौरान बंद रहने से करीब 1500 लोगों का रोजगार अस्थायी तौर पर प्रभावित हुआ है। भरतपुर में करीब 25 होटलों ने 400 कर्मचारियों को हटाया है। प्रिंटिंग प्रेस में भी काम नहीं रहने से करीब 3000 लोग बेरोजगार हुए हैं।

एक्सपर्ट व्यू : ये राहत दे सकती है राज्य सरकार, 1. बिजली बिल माफ किए जाए और 2. लोन पर ब्याज में छूट मिले

  • सीकर में खेतान ग्रेनाइट के अरुण खेतान कहते हैं- फैक्ट्री बंद है, लेकिन बिजली निगम 32 हजार रुपए एवरेज बिल भेज रहा है। यह बड़ी परेशानी है, जिससे संकट गहरा रहा है।
  • वर्ष 2021-22 प्रथम तिमाही की ब्याज व मासिक किश्त स्थगित की जाए। ब्याज में छूट भी दी जाए और नए लोन पर ब्याज दरें कम रखी जाएं। इसमें टर्म लोन का ब्याज भी शामिल किया जाए।
  • अलवर मत्स्य उद्याेग संघ के अध्यक्ष अशाेक गाेयल और सचिव विनाेद शर्मा कहते हैं-रिटर्न की अंतिम तिथि 3 से 6 माह तक बढ़ाई जाए। एनपीए के सभी नॉर्म्स 90 से 180 दिन तक बढ़ाए जाएं।
  • एमएसएमई मंत्रालय की ओर से बैंक लोन में कई रियायतें दी जाती हैं, लेकिन बैंक आरबीआई के निर्देशों को ही मानते हैं। इसलिए सरकार एमएसएमई के निर्देश मानने के लिए बैंकों को बाध्य करें।
  • उद्योग रत्न से सम्मानित हनुमानगढ़ के शिवरतन खड़गावत व अमृतलाल सिंगला कहते हैं-सर्विस चार्ज नहीं बढ़ना चाहिए। मनरेगा श्रमिकों को फैक्ट्री या कंस्ट्रक्शन साइट पर लगा सकते हैं।

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