रेलवे का निजीकरण की ओर दूसरा बड़ा कदम: जयपुर सहित देश के 15 शहरों के रेलवे स्टेडियम को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी, सुविधाओं के नाम पर रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर


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जयपुर41 मिनट पहले

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रेलवे स्टेडियम (फाइल फोटो)

रेलवे बोर्ड ने पिछले दिनों राजस्थान सहित देशभर में 13 हजार 400 पदों को खत्म करने का आदेश दिया था। राजस्थान के 90 फीसदी हिस्से में फैले उत्तर पश्चिम रेलवे के भी 600 पद इसमें शामिल थे। राजस्थान में स्वीकृत कैडर 60 हजार में से 15 हजार पदों को पहले ही खत्म करने से यहां कर्मचारियों की संख्या कम है।

अब रेलवे ने निजीकरण की ओर अपना दूसरा कदम बढ़ाते हुए बड़ा फैसला लिया है। इस बार यह कदम रेलकर्मियों की सुविधाओं और मनोरंजन से जुड़ा है। रेलवे बोर्ड ने जयपुर सहित देश के 15 शहरों में अपने कर्मचारियों के लिए बनाए गए स्टेडियम और मैदानों में वाणिज्यिक गतिविधि शुरू करने के लिए रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) को जिम्मेदारी दी है। ताकि यहां सुविधाएं विकसित कर आय बढ़ाई जा सके।

सुविधाओं के नाम पर निजी हाथों में सौंपेगे स्टेडियम
RLDA और स्पोर्ट्स एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बोर्ड ने आरएलडीए से कहा है कि एक निजी कंसल्टेंसी से इन स्टेडियम में भविष्य में होने वाली गतिविधियों का आंकलन करवाएं। इनमें जरूरी सभी सुविधाएं विकसित कराई जाएं। साथ ही, इनमें निजी स्पोर्ट्स एकेडमी या क्लब खोले जा सकें और कुछ लैंड पर व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू की जा सकें।
सेकंड फेज में जयपुर भी शामिल
व्यावसायिक गतिविधियों को शुरू कर रेलवे टिकटिंग और गुड्स रेवेन्यू के साथ दूसरे तरीके से आय बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अगर इन 15 शहरों में निजीकरण किए जाने की यह योजना सफल होती है, तो सेकंड फेज में जयपुर के केपी सिंह स्टेडियम सहित अन्य शहरों के स्टेडियम को भी इसी तर्ज पर विकसित किया जाएगा।

रिपोर्ट : शिवांग चतुर्वेदी

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