लॉकडाउन का एक साल: कोरोनाकाल के सबसे खास सर्वे में 58% लोग बोले- कोरोना से खुद ही लड़ना होगा; 59% करना चाहते हैं अपना काम-धंधा


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13 मिनट पहले

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  • सर्वे में शामिल 76% लोग 18 से 40 वर्ष की उम्र के, 32% प्रतिभागी नौकरीपेशा और 29% विद्यार्थी

22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद प्रधानमंत्री ने 24 मार्च, 2020 को घोषणा की थी कि देश में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक 21 दिन लाॅकडाउन रहेगा…उस बात को आज एक साल पूरा हो गया। तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह लॉकडाउन बढ़ते हुए 15 अप्रैल से 3 मई, फिर 17 मई और अंतत: 31 मई तक पहुंच जाएगा। पूर्ण लॉकडाउन के ये 68 दिन देश कभी नहीं भूलेगा। इसके बाद 1 जून से 30 नवंबर तक 6 चरणों में अनलॉक हुआ, जो आज तक जारी है।

बहुत कुछ खुल गया, मगर सभी ट्रेनों और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा का खुलना अभी बाकी है। लॉकडाउन से अनलॉक के बीच का फासला तय करते हुए इस साल ने 1.17 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना संक्रमण की चपेट में आते देखा तो हमने 1.60 लाख से ज्यादा लोगों को खो भी दिया। यह साल हमें बहुत कुछ सिखा गया। परिवार की अहमियत और संकट से निपटने की तैयारी हमने पहचानी। मगर सबसे अहम बात जो हमने सीखी-प्रकृति से ज्यादा ताकतवर कुछ भी नहीं…।

सिर्फ 15.5% मानते हैं- कोरोना नियंत्रण में सरकार अहम
हमारा सवाल था कि कोरोना पर नियंत्रण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका किसकी है। 58.1% ने जहां स्वयं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना। यानी लोग महामारी में अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। वहीं 21.1% लोगों ने डॉक्टर्स को अहम बताया। सिर्फ 15.5% लोगों ने सरकार और 5.3% ने समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।

22% को लॉकडाउन के दौरान अकेलापन लगा
सर्वे में 22% लोगों ने कहा कि वे लगातार घर पर रहने और दोस्तों से दूर होने की वजह से अकेलेपन का शिकार हुए। जबकि एक अन्य सवाल के जवाब में 15% ने कहा कि उन्होंने इस दौरान योग और ध्यान की आदत को अपनाया। 16% ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान फालतू खर्च कम हुआ, बचत करना सीखा। 4% ने कहा कि नशे की लत छूट गई।

69% बोले- मजदूरों पर सबसे भारी गुजरा दौर
यह दौर किस पर सबसे भारी गुजरा, इस सवाल के जवाब में 69.2% लोगों ने कहा-मजदूर। एक अन्य सवाल के जवाब में 52% से ज्यादा लोगों ने कहा कि मजदूरों की घर वापसी का इंतजाम समय पर न करना गलत फैसला था। 32.3% को पार्टियों की चुनावी रैलियां होने देना भी गलत लगा। 10.1% ने कहा कि इस दौरान चुनाव करवाना ही गलत फैसला था।

48% ने कहा- रोजगार ही हमारी प्राथमिकता
सर्वे में 62% लोगों ने कहा कि रोजगार जाने से दिक्कत हुई, जबकि 20% लोगों ने कहा कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान किसी न किसी रूप में वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। तभी कोरोनाकाल के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता के सवाल पर 48% लोगों ने रोजगार को पहली प्राथमिकता बताया। रोजगार अभी लोगों के लिए प्राथमिकता में परिवार से भी ऊपर है।

45.5% इस विपदा से निपटने के बाद अब लेना चाहते हैं अपना घर
हमने सर्वे में लोगों से सवाल पूछा कि कोरोनाकाल की दिक्कतों के बाद कौन सी चीज सबसे पहले लेना चाहेंगे। 45.5% लोगों ने कहा कि वे इस संकट के दौर में पहले अपना घर लेना चाहेंगे। जबकि 41.6% लोगों ने कहा कि वे बच्चे की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नया स्मार्टफोन या लैपटॉप लेंगे। जबकि 13% लोगों ने कहा कि वे सबसे पहले अपनी गाड़ी लेना चाहते हैं।

42.1% बोले- संकट के लिए तैयार रहना सीखा
हमने पूछा कि कोरोनाकाल आपको क्या सिखा गया। इसके जवाब में 42.1% लोगों ने कहा कि संकट के लिए हमेशा तैयार रहने की सीख इस दौर में मिली। जबकि 27.1% ने सीखा कि अच्छी सेहत सबसे जरूरी है। 15.2% ने बचत करना सीखा जबकि 15.6% ने परिवार को महत्व देना सीखा। लोगों के लिए सेहत एक बड़ी जरूरत बनकर सामने आया है।

30.7% बोले- सब सामान्य होने में लगेगा वक्त
सर्वे में 34.5% लोगों ने कहा कि महामारी के काबू में आने के बाद स्थितियां पूरी तरह सामान्य होने में 2-3 साल लगेंगे, जबकि 30.7% लोगों का मानना है कि अभी और वक्त लगेगा। 19.4% लोग ऐसे भी हैं जिन्हें लगता है कि इसी साल स्थितियां सामान्य हो जाएंगी। 15.4% लोग अगले साल तक सब सामान्य होने की आस लगाए बैठे हैं।

22% लोगों ने पहली बार जानी घर की महिलाओं में कुकिंग की प्रतिभा
सर्वे में 22% लोगों ने बताया कि उन्हें इस दौर में पहली बार पता चला कि उनके घर की महिलाएं कितना अच्छा खाना बनाती हैं। हमने पूछा था कि लॉकडाउन के दौरान घर की महिलाएं की किस प्रतिभा का पता चला। 12% को पता चला कि घर की महिलाएं कम बजट में कितना अच्छा मैनेजमेंट कर सकती हैं। कुछ लोगों ने महिलाओं के गाने की प्रतिभा भी जानी। हालांकि सभी लोगों ने यह माना कि अब महिलाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

41% के लिए अब सबसे बड़ी प्राथमिकता परिवार
सर्वे में 70% लोगों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें घर पर या परिवार के साथ समय बिताने की खुशी सबसे अहम लगी। जबकि एक अन्य सवाल के जवाब में 41% लोगों ने कहा कि अब उनकी पहली प्राथमिकता परिवार ही है। 33% ने कहा कि इस दौर में उन्होंने परिवार की मदद करना सीखा। घर पर रहकर हर काम में हाथ बंटाया।

सर्वे में दिखा आत्मनिर्भर भारत: 27.3% के मन में अपने गांव लौटने की इच्छा
हमने लोगों से पूछा कि कोरोनाकाल में आपने क्या महसूस किया। इसके जवाब में लोगों की आंत्रप्रेन्योरशिप की इच्छा सामने आई। 29.5% लोगों ने कहा कि उन्हें नौकरी गंवाने का खतरा महसूस हुआ। जबकि 32% लोगों के मन में खुद का व्यवसाय करने और 27.3% लोगों के मन में गांव लौटकर अपना काम-धंधा करने की इच्छा आई। इन दोनों को मिला दें तो आंकड़ा 59.3% होता है। 11.1% लोग ऐसे थे जिन्हें कठिन दौर में कारोबार बदलने का विचार आया।

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