विचार: तन से मन से वचन से काहु को दुःखवत नाहि


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पटना2 मिनट पहले

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कबीरपंथी मठ चकनूरी,बोरिभट्ठी पटना सिटी में आयोजित कबीर महोत्सव के दूसरे दिन हृदय नारायण झा ने कहा कि तन थिर मन थिर वचन थिर सूरत निरत थिर होय। सद्गुरु कबीर साहेब के इस वाणी में समाहित है वेद, पुराण, गीता और अष्टांग योग का सार।

आसन के अभ्यास से तन की स्थिरता, प्राणायाम के अभ्यास से मन की स्थिरता, यम नियम के अभ्यास से वचन की स्थिरता प्राप्त होती है। संत शिवमुनि शास्त्री ने अपने सत्संग में कहा कि सद्गुरु कबीर ने इस मानव शरीर को ही मुक्ति का धाम बताया है। सद्गुरु कबीर साहेब कहते हैं साधो जीवत ही करू आशा।

जीबत समुझे जीबत बूझे जीवत मुक्ति निवासा। महंथ मनभंग दास शास्त्री ने परम्परागत चौका आरती किया। इस अवसर पर महंथ राजेश दास, रामचंद्र दास, नगीना राय, नित्यानंद गिरी, सुनील मुनि, चंदन दास मौजूद रहे।

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