वैक्सीनेशन: चंडीगढ़ देश में पीछे, हेल्थ-फ्रंटलाइन वर्कर्स बहाना बनाने में आगे


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चंडीगढ़8 घंटे पहले

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वैक्सीनेशन

  • सोमवार को 1151 वर्कर्स को टीका लगना था, लेकिन पहुंचे सिर्फ 382

कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम में चंडीगढ़ बहुत पीछे चल रहा है। देशभर में 10 राज्य वैक्सीनेशन प्रोग्राम में पीछे चल रहे हैं, जिनमें चंडीगढ़ भी है। कारण है हेल्थ वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स का पीछे हटना। जिस हिसाब से चंडीगढ़ में काम चल रहा है, उससे टारगेट अचीव करना मुश्किल है। चंडीगढ़ में सोमवार को 1151 हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का टारगेट था, लेकिन 382 ही पहुंचे।

हेल्थ अथॉरिटी का कहना है कि हेल्थ वर्कर्स वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। चंडीगढ़ में 19830 हेल्थ वर्कर्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इनमें से 6097 ने टीका लगवाया है। बीते शुक्रवार और शनिवार को मनीमाजरा के सिविल हॉस्पिटल में 200 हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य था, लेकिन यहां एक भी वर्कर वैक्सीन लगवाने नहीं आया।

सोमवार को भी 811 हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य था, लेकिन मात्र 201 ने ही वैक्सीन लगवाई। हेल्थ वर्कर्स की बात करें तो 340 वर्कर्स को लक्ष्य था, जिनमें से 181 ने ही वैक्सीन लगवाई। सोमवार को मनीमाजरा सिविल हॉस्पिटल में 100 हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का टारगेट था, लेकिन मात्र 9 ने ही लगवाई।

जीएमएसएच-16 में 157 हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लगवाने का लक्ष्य था, लेकिन मात्र 29 ने वैक्सीन लगवाई। वहीं, पीजीआई के एपीसी में 100 का लक्ष्य था, लगवाई सिर्फ 43 ने। वहीं, जीएमसीएच-32 की साइट 1 में 100 का लक्ष्य था, लेकिन 10 हेल्थ वर्कर्स ने ही वैक्सीन लगवाई। साइट-2 में 100 का लक्ष्य था, लेकिन 9 ने ही वैक्सीन लगवाई। फ्रंटलाइन वर्कर्स की बात करें तो 340 को टीका लगना था, लेकिन लगवाया सिर्फ 161 ने।

बहाने घर में फंक्शन है, कोई कहता है बाहर हूं…
फ्रंटलाइन वर्कर्स की जिस दिन वैक्सीन की बारी होती है तो ये तरह तरह के बहाने बनाते हैं। कोई कहता है कि आज उसे बाहर जाना है, इसलिए छुट्‌टी पर है। कोई बोलता है कि उसके घर में कोई फंक्शन है। कोई बहाना लगाता है कि उसे बुखार है। टीके के फायदों के बारे में बताने के लिए तीन-चार बार काउंसिलिंग भी करवा ली। इसके बावजूद वर्कर्स वैक्सीनेशन के लिए नहीं आ रहे हैं। ज्यादा दिक्कत फ्रंटलाइन वर्कर्स को लेकर आ रही है। डॉ. अमनदीप कंग, डीएचएस

काउंसिलिंग में कहते हैं-हम तैयार हैं, बाद में मुकर जाते हैं…

डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि जब इन वर्कर्स का कोई बहाना काम नहीं आता तो कोई हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दिल की बीमारी का बहाना लगा देते हैं। काउंसिलिंग में वैक्सीन एक्सपर्ट्स के अलावा जो लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं, उन्हें बुलाया जा रहा है।

ये लोग वैक्सीन को लेकर अपने अनुभव सांझा कर रहे हैं। बता रहे हैं कि वैक्सीन से उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ है। वैक्सीन उनके फायदे के लिए सभी को लगवानी चाहिए। उस समय सब तैयार हो जाते हैं, लेकिन जब बारी आती है तो मुकर जाते हैं।

सभी वर्कर्स को दो-दो मौके दिए, अब तीसरा नहीं मिलेगा…
हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों का कहना है कि हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को मैसेज भेजकर वैक्सीनेशन लगवाने के दो-दो मौके दे दिए हैं। जो आ रहे हैं, अब डिपार्टमेंट इनकी डोज पूरा करने के बाद अगले 15 दिन में 50 साल या इससे अधिक उम्र के व्यक्तियों के रजिस्ट्रेशन की तैयारी कर रहा है। डिपार्टमेंट का कहना है कि बार-बार मौके नहीं दिए जा सकते।

हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को मैसेज भेजने पर नहीं आने के बाद उन्हें फोन करके बुलाया गया था। इसके बावजूद भी ये लोग वैक्सीन लगवाने में रूचि नहीं ले रहे हैं। डिपार्टमेंट का कहना है कि अगर ये लोग नहीं आते हैं तो इन्हें तीसरा मौका नहीं दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें सेल्फ रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

25 पॉजिटिव आए 26 ठीक, एक की मौत…
सोमवार को शहर में कोरोना के 25 पॉजिटिव पाए गए। वहीं, शहर के विभिन्न हॉस्पिटल में दाखिल कोरोना पॉजिटिव 26 मरीज ठीक होकर अपने-अपने घरों को रवाना हो गए। अब शहर में 169 मरीज एक्टिव हैं। अभी तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 21133 है। ठीक होकर जाने वाले मरीजों की संख्या 20623 रह गई है। सोमवार को कोरोना के चलते एक मरीज की मौत हो गई। इसके साथ ही कोरोना से मौतों की संख्या 341 हो गई है।

पंचकूला में…काेविशील्ड के साथ अब कोवैक्सीन की डोज भी
पंचकूला | जिले में सोमवार को 10 सेंटराें पर हेल्थ केयर वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कराें को टीका लगाया गया। इन सेंटरों पर 3500 फ्रंटलाइन वर्करों काे टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 2671 वर्कर टीका लगवाने के लिए सेंटराें पर पहुंचे। 829 वर्कर ऐसे हैं, जाे वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आए। जिले में सोमवार को पहली बार कोवैक्सीन भी लगवाई गई। यहां 1886 को कोविशील्ड और 785 को कोवैक्सीन लगाई गई।

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