वैक्सीन की किल्लत पर सरकार का जवाब: टीके तैयार करने और टेस्टिंग में समय लगता है, यह रातों रात संभव नहीं; मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने का भी एक प्रोसेस होता है


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6 मिनट पहले

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सरकार का कहना है कि देश में वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाई जा चुकी है।- फाइल फोटो।

कोरोना वैक्सीनेशन में खामियों और वैक्सीन की किल्लत को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार को सफाई देनी पड़ी है। सरकार की तरफ से शुक्रवार को कहा गया कि देश की वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं है और पूरी आबादी के टीकाकरण के लिए विदेशों से वैक्सीन मंगवाने के बारे में सोच रहे हैं।

सरकार का कहना है कि वैक्सीन एक बायोलॉजिकल प्रोडक्ट है। इसे तैयार करने और टेस्टिंग में समय लगता है। यह रातों रात संभव नहीं हो सकता। मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने की भी एक प्रक्रिया होती है।

केंद्र ने कहा है कि वैक्सीनेशन में कोरोना मरीजों के प्रभावी मैनेजमेंट को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से जो कोशिशें की जा रही हैं, उन्हें शुरुआत से ही सपोर्ट किया जा रहा है।

सरकार ने कहा- दुनियाभर में वैक्सीन की डिमांड ज्यादा
सरकार ने सफाई दी है कि कोरोना महामारी का दुनियाभर में असर देखा जा रहा है। सभी देशों में वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं सीमित हैं, लेकिन दुनियाभर में वैक्सीन की मांग काफी ज्यादा है। भारत की आबादी 1.4 अरब है। यह दुनिया की आबादी में अहम हिस्सा है।

सरकार का कहना है कि देश में जिन दो कंपनियों- सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक को वैक्सीन बनाने की मंजूरी मिली है, उनकी दिसंबर 2020 तक 1 करोड़ डोज उपलब्ध करवाने की क्षमता थी। मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और बढ़ाई जा चुकी है।

केंद्र ने यह भी कहा है कि वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर दबाव के बावजूद देश में 130 दिनों में 20 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। इस मामले में भारत का दुनिया में तीसरा नंबर है।

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