सैन्य शासन का बर्बर चेहरा उजागर: म्यांमार से भागकर भारत आए पुलिस अफसर बोले- हमें आदेश था, तब तक गाेलियां दागो जब तक प्रदर्शनकारी की मौत न हो जाए


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चंपाई11 मिनट पहले

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यांगून में महिलाएं शांतिपूर्वक धरना भी दे रही हैं।

  • इस आदेश को मानने से मना कर अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया, 6 अन्य जवानाें ने भी ऐसा ही किया

फरवरी में तख्तालट के खिलाफ म्यांमार के लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि सेना आवाज सुनने के बजाय उनको ही कुचलने में लगी हुई है। प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने का आदेश है। सैन्य शासकों के जान लेने के इस बर्बर इरादों का खुलासा वहां से भागकर आए एक पुलिस अधिकारी ने किया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर की रिपोर्ट के मुताबिक- ‘पुलिस जवानों को कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों का तब गोली मारो, जब तक उनकी सांस बंद न हो जाए।’

म्यांमार में बर्बरता की ये कहानी 27 फरवरी को शुरू हुई थी। तब सेना ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई थी। उस दिन सेना के जिन जवानों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया था, उनमें था पेंग भी शामिल थे। एक पुलिस अधिकारी ने उससे और उसके साथियों से कहा था कि वह अपनी मशीनगन से तब तक प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाते रहें, जब तक वे मर न जाएं। इस आदेश को उसने नहीं माना।

उनसे दूसरे दिन फिर पूछा गया कि वे ऐसा करेंगे कि नहीं, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद वे अपनी और परिवार की जान बचाकर लगातार तीन दिन तक छिपते-छिपते भारत के मिजोरम पहुंचे। यहां उन्होंने म्यांमार की दर्दनाक और क्रूरतम हालात को बयां किया। पेंग पुलिस ऑफिसर म्यांमार के खम्पात शहर में तैनात था।

रिपोर्ट के मुताबिक- पेंग ने कहा, ‘मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था। हमें प्रदर्शनकारियों को गोली मारने का आदेश थाा। हममें इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम शांति से प्रदर्शन कर रहे अपने ही लोगों को गोली मार सकें। मैंने और मेरे छह साथियों ने सीनियर्स का आदेश मानने से इनकार कर दिया।’ हालांकि पेंग ने साथियों का नाम नहीं बताया।

हिरासत में नेताओं पर जुल्म ढा रही सेना, यातना से सूकी के साथी नेता की मौत

सेना ने नेताओं को गिरफ्तार कर यातना दे रही है। इसके चलते आंग सान सू की की पार्टी के एक नेता की कस्टडी में मौत हो गई है। संसद के उच्च सदन के सदस्य बा मायो थीन ने बताया कि ‘नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी’ के नेता जौ मयात लीन को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें हिरासत में प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लीन दूसरे ऐसे नेता हैं, जिनकी हिरासत में मौत हुई है।

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