सौगात: परमार समाज के मंदिर में स्थापित होगी राजा भोज की 550 किलो वजनी प्रतिमा


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भोपाल6 मिनट पहलेलेखक: राजेश चंचल

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प्रतिमा स्थापना 16 को- समाज के साकेत नगर स्थित दुर्गा मंदिर में वसंत पंचमी पर राजा भोज की अष्ट धातु प्रतिमा स्थापित होगी। गोल्डन कलर की 6 लाख कीमत की 7 फीट ऊंची प्रतिमा बनाई गई है।

  • बड़े तालाब और भोज विश्वविद्यालय के बाद यह तीसरी प्रतिमा होगी
  • राजा भोज ने ही बड़े तालाब और भोजपुर मंदिर का निर्माण कराया

शहर को राजा भोज की एक ओर प्रतिमा की सौगात वसंत पंचमी पर मिलने जा रही है। सात फीट की अष्ट धातु से बनी इस प्रतिमा को परमार समाज द्वारा साकेत नगर स्थित समाज के दुर्गा देवी मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके पूर्व वीआईपी रोड स्थित बड़े तालाब के पुराने बुर्ज पर फरवरी 2011 में लगाई गई राजा भोज की 36 फीट ऊंची प्रतिमा भोपाल की शान है। वर्ष 2014 में कोलार रोड स्थित राजा भोज मुक्त विवि में भी राजा भोज की सात फीट ऊंची प्रतिमा लगाई गई थी।

खास बात यह है कि राजा भोज परमार वंशीय थे। परमार समाज उन्हें आराध्य मानता है। इसे ध्यान में रखते हुए ही समाज के मंदिर में प्रतिमा स्थापना की जा रही है, जबकि बड़े तालाब में भी परमार समाज की मांग पर ही प्रतिमा लगवाई गई थी। समाज ने राजा भोज की प्रतिमा का प्रथम रेखाचित्र बनाकर शासन को सौंपा था, जिसे बाद में पुरातत्ववेत्ताओं की मदद से अंतिम रूप देने के बाद मूर्तिकार को सौंपा गया था। ये तीनों प्रतिमाएं ग्वालियर के एक ही मूर्तिकार द्वारा बनाई गई है।

वर्ष 2011 में बड़े तालाब के पुराने बुर्ज पर स्थापित की थी यह प्रतिमा

  • 36 फीट ऊंची राजा भोज प्रतिमा का निर्माण।
  • 7.500 किलोग्राम प्रतिमा का कुल वजन।
  • 30 लाख रुपए से शासन ने कराया निर्माण

भोज विवि में 2014 में लगी प्रतिमा: भोज विवि में 27 अगस्त 2014 को राजा भोज की 7 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना की गई थी। इसका अनावरण तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव ने किया था।

उमा, गौर और फिर चौहान को प्रतिमा लगाने दिए थे ज्ञापन
बड़े तालाब में राजा भोज की प्रतिमा लगाने की मांग की शुरुआत परमार समाज ने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को ज्ञापन देकर की थी। फिर मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर बने। समाज के लोगों ने उन्हें ज्ञापन दिया और राजा भोज की प्रतिमा लगाने की मांग रखी। इसे उन्होंने मंजूर कर लिया। सरकार फिर बदल गई और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने। तब उन्हें भी समाज ने ज्ञापन दिया। बात आगे बढ़ी।

संयुक्त सचिव सूरज परमार के अनुसार तब शासन के कहने पर राजा भोज प्रतिमा निर्माण समिति बनी। उन्होंने राजा भोज का इतिहास पढ़ने के साथ ही उनके व्यक्तित्व की जानकारी हासिल करने के बाद अपने सहयोगियों की मदद से उनका स्केच तैयार कर पर्यटन विभाग को सौंपा। इसमें पुरातत्ववेत्ताओं व उज्जैन के विद्वानों ने देखा और इसमें कुछ सुधार किया। फिर प्रतिमा तैयार करने का निर्णय किया।

एक ही मूर्तिकार ने बनाई तीनों प्रतिमाएं… ग्वालियर के मूर्तिकार प्रभात राय ने बताया कि बड़े तालाब में लगी साढ़े सात टन वजनी प्रतिमा 36 फीट ऊंची है। इसे वास्तुशिल्पी कांस्य से तैयार किया था। उनकी पगड़ी की कलगी में स्वर्ण भी मिलाया है। राजा भोज मुक्त विवि में भोज प्रतिमा भी उन्होंने ही बनाई है। परमार समाज के मंदिर में लगने वाली प्रतिमा 7 फीट ऊंची व करीब 550 किलो वजनी है। तीनों प्रतिमाएं हूबहू एक सी।

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