स्टडी: महिला कैदियों को चिंता-पता नहीं उनके बच्चे स्कूल जा रहे हैं या नहीं


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चंडीगढ़5 घंटे पहले

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स्टडी

  • डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने बुड़ैल जेल की 46 महिला कैदियों पर की स्टडी, अधिकारों के बारे में दी गई जानकारी…
  • कुछ महिलाओं ने कहा-चिंता इस बात की कि बाहर आने के बाद क्या करेंगी

डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएलएसए) ने बुड़ैल जेल में रह रही महिलाओं के हालातों को जानने और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देने के लिए विशेष अभियान चलाया। इस दौरान वॉलंटियर्स ने महिला कैदियों से बात की और उनकी समस्याएं जानीं।

इस दौरान ये बात सामने आई कि ज्यादातर महिलाओं को जेल से बाहर रह रहे उनके बच्चों की चिंता सताती रहती है। कुछ महिलाओं ने कहा कि उनके बच्चों का ख्याल रखने वाला कोई नहीं है, तो किसी ने कहा कि उन्हें बच्चों की पढ़ाई का फिक्र है। किसी महिला को किताब छपवाने के लिए पब्लिशर चाहिए। बुड़ैल जेल में इस समय 46 महिला कैदी हैं और इन पर स्टडी कर एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट को सोमवार को स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस जसवंत सिंह, मेंबर सेक्रेटरी महावीर सिंह और डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के सेक्रेटरी अशोक कुमार मान ने रिलीज किया। ये रिपोर्ट एडवोकेट जैसमीन चौहान, एडवोकेट वसुंधरा दलाल आनंद, सुनीता कपूर, डॉ.नीना चौधरी और डॉ. अंशुल शर्मा ने तैयार की है।

46 महिला कैदी हैं बुड़ैल जेल में

  • 10 को हो चुकी है सजा, 36 पर चल रहा है केस
  • 06 महिलाएं मर्डर, 2 एनडीपीएस और 2 दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहीं
  • 36 अंडरट्रायल महिलाओं में से 28 हैं शादीशुदा
  • 11 अंडरट्रायल महिलाओं पर हैं एनडीपीएस के केस, 7 पर मर्डर, 7 पर चल रहे धोखाधड़ी के केस

महिला ने कहा-वह किताब लिख रही है, उसे पब्लिशर चाहिए…

  • एक महिला कैदी ने कहा कि उसके दो बेटे पहले स्नेहालय में रहते थे, लेकिन अब उन्हें वहां से वापस उनके पिता के पास भेज दिया है। महिला ने कहा कि बच्चों का पिता शराबी है और वह उनकी देखरेख नहीं कर सकता। इसलिए वह चाहती है कि बच्चों को वापस स्नेहालय भेजा जाए।
  • एक महिला ने कहा कि उसे ये पता ही नहीं है कि उसके बच्चे स्कूल पढ़ रहे हैं या फिर नहीं। इसलिए जब वह जेल से बाहर निकले, उसे उसके बच्चों की कस्टडी दी जाए। उसकी इस मांग को डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के पास रखा जाएगा।
  • एक महिला ने कहा उसकी बहू की हत्या कर दी गई। इसलिए वह चाहती है कि उसके पोतों को उसके पास रहने दिया जाए। महिला कैदी ने कहा कि वह जेल से बाहर आकर अपने पोतों की कस्टडी चाहती है। एक महिला ने कहा कि उसके बच्चे बीमार दादा-दादी के पास रहते हैं जो उनका ख्याल नहीं रख पा रहे हैं। एक महिला ने कहा कि उसका बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है। इसलिए वह उसकी फीस कम करवाना चाहती है।
  • एक महिला ने कहा कि उसे उसके परिवार ने छोड़ दिया है और अब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि वह जेल से रिहा होने के बाद क्या करेगी। उस महिला की काउंसिलिंग की जा रही है।
  • ज्यादातर महिलाओं ने कहा कि उन्हें अपने केस के स्टेटस के बारे में ही नहीं पता चलता। कई ने कहा कि उनके एडवोेकेट उनसे नहीं मिलते। कई महिलाओं ने अपनी बीमारियों के बारे में बताया।

जेल में महिलाओं के लिए बना न्याय सेवा केंद्र…

बुड़ैल जेल में महिलाओं की हर तरह की समस्या के समाधान के लिए न्याय सेवा केंद्र बनाया गया है। इसका बुधवार को उद्घाटन किया जाएगा। डीएलएसए के सेक्रेटरी अशोक कुमार मान ने बताया कि जेल में जो भी सुविधाएं हैं वे पुरुष कैदियों के लिए हैं। जेल में अभी लीगल एड सेंटर तो हैं लेकिन वह महिला कैदियों की पहुंच तक नहीं है। इसलिए महिला कैदियों के लिए अलग सेंटर बनाया गया है। यहां महिलाओं को सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि हर तरह की मदद दी जाएगी।

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