स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: इस वर्ष शिक्षा विभाग 75 हजार छात्रों को ही मिलेगा फायदा, यह पिछले साल की तुलना में 25% कम


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पटनाएक घंटा पहले

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पटना में सबसे अधिक 4618 व शिवहर में सबसे कम 328 स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देने का लक्ष्य

पटना में सबसे अधिक 4618 और शिवहर में सबसे कम 328 स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देने का लक्ष्य रखा गया है। गया में 3464, भागलपुर में 2282 और मुजफ्फरपुर में 3126 विद्यार्थियाें काे स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देना है। शिक्षा विभाग ने सत्र 2021-22 में 75 हजार स्टूडेंट को शिक्षा लोन देने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल से यह 25 प्रतिशत कम लक्ष्य है। शिक्षा विभाग ने सभी डीएम और डीईओ को लक्ष्य के अनुसार छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए लोन दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

पिछले साल एक लाख का लक्ष्य था, लेकिन उपलब्धि 23 प्रतिशत ही हासिल हो सकी। कारण बताया गया कि कोरोना संक्रमण के कारण कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थान बंद रहना। हालांकि, इस साल कॉलेज सहित उच्च शिक्षण संस्थान खोले जा चुके हैं, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की अाशंका को देखते हुए लक्ष्य पाने में परेशानी हो सकती है।

बैंकों द्वारा शिक्षा ऋण देने में आनाकानी के बाद लगभग 2 साल से राज्य सरकार शिक्षा वित्त निगम बना कर स्टूडेंट को ऋण दे रही है। सरकार शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से छात्रों को 4 प्रतिशत और छात्राओं व दिव्यांग स्टूडेंट को 1 प्रतिशत ब्याज पर अधिकतम 4 लाख रुपए तक ऋण दिलाती है। विभिन्न तकनीकी संस्थानों के साथ सामान्य कोर्स के लिए भी छात्र ऋण ले सकते है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है।

रोजगार मिलने पर ही लोन की रकम चुकाएं

सरकार ने कई बार कहा है कि शिक्षण संस्थानों से पास होने के बाद रोजगार मिलने पर आसानी से ऋण चुकाए। रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में सरकार लोन माफ भी कर सकती है। राज्य के शिक्षण संस्थानों से मैट्रिक व इंटर उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं को इस योजना का लाभ का प्रावधान है। लेकिन, बिहार से पड़ोसी राज्यों उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल व झारखंड के लगभग चार दर्जन प्रखंडों से पास करने वाले बिहार के निवासी स्टूडेंट लाभ ले सकते हैं। इस योजना के तहत हर संकाय के साथ, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सीए, एमबीए, बीसीए, पत्रकारिता सहित लगभग सभी उच्च शिक्षण के लिए लोन लिया जा सकता है।

छात्रों को 4%, छात्राओं व दिव्यांगों को 1% ब्याज दर से शिक्षा ऋण
2 अक्टूबर 2016 से जब यह योजना शुरू हुई तो बैंक के माध्यम से लोन दिलाना था। 31 मार्च 2018 तक दो वित्तीय वर्ष में बैंकों से 13665 स्टूडेंट को 143.78 करोड़ लोन दिलाया गया। बैंकों को ऋण वापसी की राज्य सरकार की गारंटी है। पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग सहित सामान्य उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट को अधिकतम 4 लाख रुपए तक सरकार लोन देती है।

छात्रों को 4 प्रतिशत, जबकि छात्राओं और दिव्यांगों को 1 प्रतिशत की दर से शिक्षा ऋण दिया जाता है। पिछले साल से कोरोना के कारण स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लड़खड़ाया हुआ है। वर्ष 2020-21 में मात्र 23 प्रतिशत ही उपलब्धि रही थी। वर्ष 2019-20 में 71 प्रतिशत और 2018.19 में 87 प्रतिशत उपलब्धि रही थी। वर्ष 2018-19 में 34999 स्टूडेंट को 307. 43 करोड़ शिक्षा लोन मिला। वर्ष 2019-20 में 45051 स्टूडेंट को 630.22 करोड़ शिक्षा लोन मिला।

रहने, खाने, पुस्तक के लिए भी दी जाती राशि
शिक्षण शुल्क संस्थान को आरटीजीएस, एनईएफटी या विशेष परिस्थिति में बैंक ड्राफ्ट द्वारा भुगतान किया जाता है। रहने, खाने और पुस्तक आदि के लिए स्टूडेंट के खाते में राशि दी जाती है। अगली किस्त की राशि के लिए स्टूडेंट को परीक्षा उत्तीर्णता का का प्रमाण पत्र या अंक पत्र ऑनलाइन देना होता है। स्टूडेंट को रहने, जीवनयापन और पाठ्य सामग्री खरीदने के लिए भी राशि दी जाती है।

तीन कोटि के शहरों में रहने के लिए 36 हजार से 60 हजार रुपए प्रति वर्ष देने का प्रावधान है। किताब और अन्य पाठ्य सामग्री खरीदने के लिए 10 हजार रुपए प्रतिवर्ष देने का प्रावधान है। कोर्स पूरा होने के बाद 2 लाख तक के ऋण 60 मासिक किस्तों में और 2 लाख से अधिक ऋण को अधिकतम 84 किस्तों में वापस किया जा सकता है। अधिकतम अवधि से पूर्व ऋण वापसी की स्थिति में 0.25 प्रतिशत ब्याज में छूट मिलेगी। योजना से जुड़ने के लिए www.7nishchay-yuvaupmission.bihar.gov.in पर लॉगिंग किया जा सकता है

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