स्वीपिंग मशीन की परेशानी: बिना रजिस्ट्रेशन खड़ी हुई स्वीपिंग मशीनें, ट्रांसपाेर्ट डिपार्टमेंट के सॉफ्टवेयर में इनकी ऑप्शन ही नहीं


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शिमलाएक घंटा पहले

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रिज पर बिना रजिस्ट्रेशन की खड़ी की गई स्वीपिंग मशीन।

  • अब सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद ही शहर में सफाई कर पाएंगी ये दो मशीनें
  • ढाई महीने पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किया था शुभारंभ

शहर में सफाई के लिए इटली से खरीदी गई स्वीपिंग मशीनें रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से खड़ी हो गई हैं। हालांकि नगर निगम ने मशीनों की रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ में आवेदन कर रखा है, लेकिन इनके रजिस्ट्रेशन की ऑप्शन परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर में नहीं है। विभाग के रजिस्ट्रेशन वाले सॉफ्टवेयर में स्वीपिंग मशीनों की कोई कैटेगरी ही नहीं है।

ढाई माह पहले सीएम ने इन मशीनों का सीएम ने शुभारंभ किया था। मगर रजिस्ट्रेशन न होने से फिलहाल नगर निगम इन मशीनों को नहीं चला पा रहा है। परिवहन विभाग अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करने के बाद ही मशीनों की रजिस्ट्रेशन कर पाएगा। हिमाचल में पहली बार स्वीपिंग मशीनें आई हैं। यही वजह है कि परिवहन विभाग ने अभी तक इस तरह की कोई भी मशीन रजिस्टर्ड नहीं की है।

स्वीपिंग मशीनें गाड़ियों की कैटेगरी में नहीं आती और न नही जेसीबी और कंपैक्टर जैसी गाड़ियों की कैटेगरी में ये हैं। ऐसे में इसके लिए अलग से कैटेगरी की जरूरत है जो कि फिलहाल परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर में नहीं है। नगर निगम ने दो स्वीपिंग मशीनें इटली से खरीदी हैं। इनमें एक बड़ी मशीन 6.2 क्यूबिक मीटर हॉपर कैपेसिटी की है जो कि 2.41 करोड़ की है।

वहीं दूसरी छोटी मशीन 3.3 क्यूबिक मीटर हॉपर वाली है, जिसकी कीमत 1.41 करोड़ की है। ये मैकेनिकल सक्शन मशीनें हैं, जो कंप्लांइट इंजन से लेस हैं। इसमें लगे ब्रशों से सड़क पर जमी धूल को मशीन के सेंटर में इकट्ठा किया जाता है और यहां से इसे सेंट्रल ब्रशों से हॉपर (वेस्ट कंटेनर) तक पहुंचाया जाता है। कंटेनर में धूल को इकट्ठी कर इसे गाड़ी में डंप किया जाता है।

वहीं सड़क पर अगर बड़े-बड़े कंकड़ और बोतल आदि वेस्ट हो तो इसके लिए इसमें लगे वैक्यूम सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। यही नहीं इन मशीनों में पानी से सफाई करने की भी सुविधा है, और इनमें 400-400 लीटर पानी स्टोर करने की कैपेसिटी हैं। अगर चाहें तो इस पानी से धूल भरी सड़कों को साफ किया जा सकता है। मशीनों में एक बड़ी नोजल भी लगी है, जिससे नालियों को पानी के प्रेशर के साथ साफ किया जाता है।

स्वीपिंग मशीनें के लिए ड्राइवरों-हेल्परों को किया गया है ट्रेंड

नगर निगम ने स्वीपिंग मशीनों के लिए कंपनी के माध्यम से अपने स्टाफ को ट्रेंड कर दिया है। इसके लिए दो ड्राइवर, दो हेल्पर को डेढ़ माह की ट्रेनिंग दी गई जो कि सफाई का काम करते हैं। इसके अलावा एक मैकेनिक को भी कंपनी ने ट्रेंड किया है जो कि इन मशीनों को ठीक सकता है। कंपनी के इंजीनियर ने बाकायदा निगम के स्टाफ को इसकी ट्रेनिंग दी है।

परिवहन विभाग को सॉफ्टवेयर में करना पड़ रहा है बदलाव

स्वीपिंग मशीनों की रजिस्ट्रेशन के लिए परिवहन विभाग को अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करना पड़ रहा है। यह बदलाव केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के माध्यम से ही होगा। बताया जा रहा है कि इसके लिए परिवहन विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद ही इन मशीनों का रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा, जिसमें इसमें कुछ समय लग सकता है।

ड्राइवर का भी अलग से बनेगा लाइसेंस

स्वीपिंग मशीनों के चलाने वाले ड्राइवरों को अलग से लाइसेंस भी बनवाना होगा। हालांकि इसके लिए मशीन उपलब्ध करवाने वाली कंपनी ने पूरी ट्रेनिंंग ड्राइवर को दी है। ड्राइवर के स्किल को जांचने के लिए कंपनी द्वारा इनका टेस्ट भी लिया गया है।

उधर, नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चेतन चौहान का कहना है कि मशीनों के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए परिवहन विभाग सॉफ्टवेयर में बदलाव कर रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इन मशीनों की रजिस्ट्रेशन हो जाएगी।

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