हिमाचल HC के फैसले की भाषा पर नाराजगी: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शाह ने कहा- फैसला ऐसा कि कुछ समझ नहीं आया, पढ़ते-पढ़ते सिर दर्द करने लगा, बाम लगाना पड़ा


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नई दिल्ली10 मिनट पहले

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जस्टिस एमआर शाह (फाइल फोटो)

  • हिमाचल हाईकाेर्ट के फैसले की भाषा काे लेकर सुप्रीम काेर्ट के जजों ने जताई नाराजगी
  • जज बोले- फैसले की भाषा इतनी सरल हाे कि आम आदमी को भी आसानी से समझ आ जाए

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान दिलचस्प टिप्पणी की। मामला हिमाचल हाईकोर्ट के एक फैसले से जुड़ा था। इसके खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने साथी जज से पूछा- ‘फैसले में लिखा क्या गया है?’ इस पर बेंच में उनके सहयोगी जस्टिस एमआर शाह ने कहा- ‘मुझे भी समझ में नहीं आया। लंबे-लंबे वाक्य हैं। जगह-जगह काॅमा लगे हैं।

इसे पढ़ते-पढ़ते मेरा तो सिर दर्द होने लगा। बाम लगाना पड़ा।’ इतना ही नहीं, जस्टिस शाह ने आगे कहा- ‘इस फैसले काे पढ़ने के बाद मुझे अपनी समझ पर शक हाेने लगा है। क्योंकि मैं कुछ समझ नहीं पाया।’ उन्होंने आगे कहा- ‘निर्णय (जजमेंट) की भाषा इतनी सरल हो कि आम आदमी को भी आसानी से समझ आ जाए। उसे हर कोई समझ सके। यह किसी थीसिस की तरह नहीं होना चाहिए।’

जस्टिस चंद्रचूड़ ने भी कुछ इसी तरह की टिप्पणी की। उन्होंने कहा- ‘मैं सुबह 10:10 बजे इस फैसले को पढ़ने के लिए बैठा। मैंने इसे 10:55 बजे तक इसे पूरा पढ़ा। मैं आश्चर्यचकित हो गया। आप सोच भी नहीं सकते। अंत में मुझे सीजीआईटी (केंद्रीय औद्योगिक विवाद निवारण न्यायाधिकरण) के आदेश काे देखना पड़ा। ओह, माय गॉड! मैं आपको बता रहा हूं, ये अविश्वसनीय है! यह न्याय की अव्यवस्था है। हर मामले में आप इस तरह के ही निर्णय पाते हैं।’

18 पेज के लंबे फैसले में हाईकोर्ट द्वारा बताए गए कारण समझ से भी बाहर

एक कर्मचारी पर भ्रष्टाचार के आराेप के मामले में सीजीआईटी के आदेश को हिमाचल हाईकोर्ट ने पिछले साल 27 नवंबर काे सही ठहराया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। इसी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों ने ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने यहां तक कहा- ‘अपने 18 पेज के लंबे फैसले में हाईकाेर्ट द्वारा दर्ज बताए गए कारण समझ से बाहर हैं। नियोजित तर्क और भाषा जिस तरह की है, वह अक्षम्य है।’

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