हिसार में हत्या के ‘नाबालिग’ दोषी को उम्रकैद: ADJ की अदालत ने सुनाया फैसला, वारदात के वक्त 16 साल 3 महीने थी उम्र; निर्भया केस के बाद इस तरह का यह तीसरा मामला


हिसार3 मिनट पहले

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कोर्ट की कार्यवाही सिंबॉलिक इमेज। आज हिसार की कोर्ट ने हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला दिया है।

  • 31 मई 2018 को हमले में घायल हुए गांव उगालन वासी रमेश ने 12 जून को तोड़ा था दम
  • दो दिन पहले दोषी करार दिया था कोर्ट ने, 8 अन्य आरोपियों पर मामला दूसरी कोर्ट में विचाराधीन

हिसार में शुक्रवार को हत्या के एक मामले में फैसला आया है। इस मामले में एडिशनल सेशन जज अजय तेवतिया की कोर्ट 2 उन आरोपियों पर सुनवाई कर रही थी, जो वारदात के वक्त नाबालिग थे। दो दिन पहले इनमें से एक को बरी कर दिया गया तो दूसरे को दोषी करार दिया गया। शुक्रवार को दोषी को कोर्ट ने उम्रकैद और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा का फैसला दिया है। हालांकि अन्य 8 आरोपियों को लेकर यह मामला दूसरी कोर्ट में विचाराधीन है। खास बात यह है कि दिल्ली के निर्भया रेप केस के बाद यह तीसरा ऐसा मामला है, जब कोर्ट ने किसी नाबालिग को इतनी बड़ी सजा दी है। इससे पहले भी एक रेप केस में हिसार की कोर्ट ही एक जुवेनाइल को 20 साल की कैद की सजा का फैसला दे चुकी है।

मिली जानकारी के अनुसार 12 जून 2018 को हिसार जिले के गांव उगालन वासी नवीन ने बांस थाने में अपने पिता रमेश की हत्या का केस दर्ज करवाया था। शिकायत में नवीन ने बताया था कि 31 मई 2018 को शाम करीब 5 बजे वह विद्या एकेडमी उगालन में व्यायाम कर रहा था। झगड़े की आवाज सुनाई दी तो वह मौके पर पहुंचा। वहां कृष्ण उर्फ काला, जगदीश, राजेश, मनदीप उर्फ जहरी, सोनू, दशरथ, संजय और दो अन्य हथियारों से उसके पिता पर हमला कर रहे थे। इसके बाद आरोपी फरार हो गए तो नवीन ने अपने पिता रमेश कुमार को अस्पताल में पहुंचाया। वहां 12 जून को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

7 फरवरी को JJ बोर्ड ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भेज दिया था मामला
मामला कोर्ट में पहुंचा। आरोपियों में दो के नाबालिग होने के चलते सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस (JJ) बोर्ड में हुई थी। बोर्ड ने दोनों नाबालिगों को मानसिक व शारिरिक रूप से वयस्क मानते हुए 7 फरवरी 2021 को इनका केस जिला कोर्ट में भेज दिया। बोर्ड ने टिप्पणी की थी कि केस में दोनों नाबालिगों के साथ वयस्क की तरह ही बर्ताव किया जाए। इसके बाद इन दोनों के मामले की सुनवाई ADJ अजय तेवतिया की कोर्ट कर रही थी।

28 जुलाई को एक बरी तो दूसरा दोषी करार
तेवतिया की कोर्ट ने 28 जुलाई को कोर्ट ने एक नाबालिग (वारदात के वक्त) को बरी कर दिया था और दूसरे नाबालिग आरोपी को दोषी करार दिया। शुक्रवार को इनमें से एक को कोर्ट ने उम्रकैद और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। रिकॉर्ड के मुताबिक घटना के समय दोषी की उम्र 16 साल तीन महीने थी।

निर्भया केस के बाद अब तक तीसरी बार हुआ है ऐसा, हिसार कोर्ट का दूसरा फैसला
बता दें कि 16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में अंजाम दिए गए निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के बाद हिसार कोर्ट ने नाबालिग दोषी को दूसरी बार बड़ी सजा सुनाई है। 2017 में हुए उकलाना गुड़िया रेप कांड के नाबालिग दोषी को सितम्बर 2018 में कोर्ट ने 20 साल की कैद की सजा सुनाई थी। कुल मिलाकर अब तक इस तरह का यह तीसरा मामला है।

ऐसा क्या हुआ था निर्भया केस में?
असल में निर्भया रेप कांड से पहले अपराधों में शामिल नाबालिग आरोपियों को लेकर JJ बोर्ड में ही सुनवाई होती थी। इस कांड में शामिल नाबालिग द्वारा किए गए कुकृत्य के बाद जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिग के साथ भी वयस्क की तरह सजा का प्रावधान किया गया था। महिला सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की गई, और जस्टिस वर्मा समिति बनी। 2013 के कानूनी संशोधन लागू किए गए। वहीं, किशोर न्याय अधिनियम में 2015 में बदलाव किया गया, हत्या-दुष्कर्म जैसे मामलों में आरोपी को अपराधी मानने की आयु सीमा 18 से घटाकर 16 कर दी गई।

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