400 की एक्सपायर्ड दवाई 12 हजार में बेची: दिल्ली में ब्लैक फंगस के 3293 नकली इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 1 डॉक्टर समेत 10 गिरफ्तार


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नई दिल्ली16 मिनट पहले

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कोरोना महामारी के बीच ब्लैक फंगस के 3,000 नकली इंजेक्शन बेचने वाला एक गिरोह दिल्ली में पकड़ाया है। इस मामले में निजामुद्दीन से एक डॉक्टर समेत 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। आरोपियों ने नकली इंजेक्शन की करीब 400 शीशियां मजबूर लोगों को बेची भी हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग एक्सपायर्ड मेडिसिन महज 400 रुपए में खरीदकर उसकी रीपैकैजिंग करते थे। इसके बाद जरूरतमंदों से 12 हजार रुपए तक वसूलते थे।

यूपी के देवरिया का रहने वाला है आरोपी डॉक्टर
दिल्ली पुलिस में क्राइम ब्रांच की डिप्टी कमिश्नर (DCP) मोनिका भारद्वाज ने बताया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले डॉ. अल्तमस हुसैन को गिरफ्तार किया गया है। हुसैन ने एम्फोटेरिसिन-B की 300 एक्सपायर्ड शीशियां खरीदने की बात स्वीकारी है।

आरोपियों ने नकली इंजेक्शन की करीब 400 शीशियां जरूरतमंदों को मोटी रकम लेकर बेचीं।

आरोपियों ने नकली इंजेक्शन की करीब 400 शीशियां जरूरतमंदों को मोटी रकम लेकर बेचीं।

उसने पिपेरासिलिन और टेजोबैक्टम दवाओं को एम्फोटेरिसिन के तौर पर दोबारा पैक किया और इसे जरूरतमंदों को बेचा है। मोनिका भारद्वाज ने कहा, ‘ये सभी इंजेक्शन नकली हैं। हमनें निजामुद्दीन स्थित एक घर से एम्फोटेरिसिन की 3,000 से अधिक शीशियां भी बरामद की हैं। इसमें रेमडेसिविर के भी इंजेक्शन मिले हैं।’

क्या है ब्लैक फंगस या म्यूकरमायकोसिस
म्यूकरमायकोसिस या ब्लैक फंगस एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। यह म्यूकर फंगस के कारण होता है जो मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्जियों में पनपता है। यह आम तौर पर उन लोगों को प्रभावित करता है जो लंबे समय से दवा ले रहे हैं और जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। यह एक बहुत खतरनाक बीमारी है। इसकी मृत्यु दर लगभग 50% है।

सरकार ने 5 कंपनियों को दिया है लाइसेंस
बता दें कि एम्फोटेरिसिन-B का इस्तेमाल ब्लैक फंगस के उपचार में किया जाता है जो नाक, आंख, साइनस और कभी-कभी दिमाग को भी नुकसान पहुंचाती है। ये बीमारी ऐसे लोगों के लिए जानलेवा हो सकती है जो डायबिटीज से पीड़ित हैं या जिनका इम्युन सिस्टम बहुत कमजोर है जैसा कि कैंसर और HIV एड्स के मरीजों में होता है। पिछले महीने केंद्र सरकार ने ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच 5 कंपनियों को एम्फोटेरिसिन बनाने का लाइसेंस दिया था।

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