6 माह बाद और संक्रामक होकर लौटा कोरोना: देश में जहां भी कोरोना की दूसरी लहर, वहां पिछले पीक से 2-3 गुना मरीज मिलने लगे


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नई दिल्ली34 मिनट पहले

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देश के 15 से ज्यादा जिलाें में कोरोना की दूसरी लहर भयानक रूप ले चुकी है। इन जिलों में नए मरीजों की वृद्धि दर भी बरकरार है, यानी अभी पीक नहीं आया है। (फाइल फोटो)

  • नया पीक कब आएगा, इस बारे में वैज्ञानिक कुछ कहने की स्थिति में नहीं

भारत में छह महीने बाद 28 मार्च को दुनिया में सबसे ज्यादा 68,020 नए कोरोना मरीज मिले। इससे पहले भारत में सबसे ज्यादा मरीज 18 अक्टूबर 2020 में मिले थे। देश के 15 से ज्यादा जिलाें में कोरोना की दूसरी लहर भयानक रूप ले चुकी है। इन जिलों में नए मरीजों की वृद्धि दर भी बरकरार है, यानी अभी पीक नहीं आया है।

पीक कब आएगा, इस बारे में कोई भी वैज्ञानिक स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि इसे संक्रमण की दूसरी लहर का शुरुआती दौर माना जा रहा है। हालात ये हैं कि महाराष्ट्र के कुछ जिलों में नए मरीजों का ग्राफ सितंबर 2020 में बने पीक से दो-तीन गुना ज्यादा ऊंचा हो गया है।

वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि सभी राज्यों को महाराष्ट्र की मौजूदा स्थिति से सबक लेना चाहिए। महाराष्ट्र में नए मरीजों के बढ़ने का बड़ा कारण टेस्टिंग कम होना है। मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे जिलों में हर 100 टेस्ट में 20 से ज्यादा मरीज मिलने लगे हैं। यह दर्शाता है कि जहां भी संक्रमण की दूसरी लहर आ रही है, वह पहली लहर से ज्यादा संक्रामक है।

4 राज्यों में नए मरीजों की संख्या पिछले साल के उच्चतम स्तर से ज्यादा हो चुकी

इन 15 जिलों में संक्रमण की दूसरी लहर जारी, यहां 2020 में आए पीक से ज्यादा नए मरीज मिलने लगे

2020 में रोज अभी रोज अब तक मिले मरीजों का मिल रहे इतनी वृद्धि उच्चतम स्तर नए मरीज हो चुकी

चार राज्यों में टेस्टिंग नहीं बढ़ने से बिगड़ रहे हालात; इनमें 1 फरवरी के बाद नए मरीज बेतहाशा बढ़े, लेकिन टेस्ट बेहद कम बढ़ाए गए हैं

सिर्फ यही चार राज्य, जहां संक्रमण की दर 5% से ज्यादा। हालांकि, गुजरात में अभी संक्रमण की दर 3% से कम है।

सिर्फ यही चार राज्य, जहां संक्रमण की दर 5% से ज्यादा। हालांकि, गुजरात में अभी संक्रमण की दर 3% से कम है।

भास्कर एक्सपर्ट -डी-हाईड्रेशन और उल्टी-दस्त हाेने पर भी टेस्ट कराना अब जरूरी, 20% मरीजों में ऐसे लक्षण दिख रहे

संक्रमण का फैलाव रोकना है तो नए लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत

कोरोना फैलने के शुरुआती दौर में बुखार, जुकाम, खांसी जैसे लक्षण आम थे। तब इस बीमारी के बारे में उतनी समझ भी नहीं थी। अब हम देख रहे हैं कि डी-हाईड्रेशन, उल्टी-दस्त, जोड़ों का दर्द, बॉडी ऑर्गन का कम काम करना, हृदय कमजोर होना, फेफड़ों की क्षमता घटना जैसे कई तरह के लक्षण हैं, जो कोरोना मरीजों में देखने को मिल रहे हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को उल्टी-दस्त की शिकायत हो तो उसे भी कोरोना टेस्ट करा लेना चाहिए।’

– डॉ नरेंद्र अरोड़ा, चेयरमेन, काेविड नेशनल रिसर्च टास्कफोर्स, भारत सरकार

शत प्रतिशत टेस्टिंग ही एकमात्र तरीका, ब्रिटेन-इजराइल जैसे देश हैं उदाहरण

सर्दी-जुकाम-बुखार जैसे लक्षणों के अलावा दूसरे लक्षण दिखने पर भी अब कोरोना का टेस्ट कराना बेहद जरूरी हाे गया है। इसके दो फायदे हैं। पहला- कोरोना है तो बाकी लोग संक्रमित होने से बच जाएंगे। दूसरा- समय पर इलाज शुरू होगा तो मौत का खतरा टल सकेगा। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल जैसे देशों ने शत प्रतिशत टेस्टिंग का तरीका अपना रखा है। भारत को इस ओर ध्यान देना चाहिए।’

– डॉ श्रीनिवास गोली, हेल्थ रिसर्चर, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न पर्थ, ऑस्ट्रेलिया

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