BJP से पहले SP में जितिन ने किया था संपर्क: जितिन प्रसाद को लेकर दो खेमों में बंट गई थी समाजवादी पार्टी; विधायक के कहने पर अखिलेश ने प्रसाद को पार्टी में नहीं शामिल कराया


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लखनऊ16 मिनट पहलेलेखक: विद्या शंकर राय

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राहुल गांधी के करीबी और कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार रहे जितिन प्रसाद ने अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। भाजपा अब उनका इस्तेमाल यूपी में ब्राह्मणों की नाराज़गी दूर करने के लिए करेगी। सपा के सूत्र बताते हैं कि BJP में जाने से पहले जितिन समाजवादी पार्टी में आना चाहते थे। उनकी और सपा के मुखिया अखिलेश यादव के बीच कई दौर की बैठकें हुई थी। हालांकि बात नहीं बनी। जितिन को लेकर समाजवादी पार्टी दो खेमों में बट गया था।

एक खेमा उनको पार्टी में लेने का दबाव डाल रहा था तो दूसरा खेमा अखिलेश को यह समझाने में जुटा था कि उनके आने से पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा। इस उहापोह के बीच अखिलेश यादव ने जितिन को पार्टी के शामिल करने से इंकार कर दिया।

सपा के वरिष्ठ नेता जो वर्तमान में MLC भी हैं और अखिलेश के बहुत करीबी माने जाते हैं, उन्होंने भास्कर के साथ बातचीत में यह खुलासा किया। सपा के MLC ने कहा, यह एक दिन की मुलाकात नहीं है। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही वो लगातार अखिलेश जी से दिल्ली में मिलते रहे हैं। सपा में आने को लेकर कई बैठकें हुईं। अखिलेश जी ने उनको पार्टी में लेने को लेकर सपा के नेताओं का विचार जानने की कोशिश तब पार्टी के नेता दो गुटों में बट गए।

शाहजहांपुर के नेताओं ने विरोध किया

सपा के एमएलसी ने आगे कहा, एक खेमा उनको पार्टी में लेने कि बात कर कर रहा था, और दलील दे रहा था की जितिन के आने से पार्टी को ब्राह्मण चेहरा मिलेगा। उनका इस्तेमाल दिल्ली के साथ ही यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में किया जा सकता है। जितिन को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें केंद्र की राजनीति में सक्रिय किया जा सकता है।

वहीं, दूसरा खेमा अखिलेश को यह समझाने में कामयाब रहा की उनके सपा में शामिल होने से पार्टी को कोई फायदा नही मिलेगा। खासतौर से शाहजहांपुर और धरहरा के आसपास के नेताओं ने इसका विरोध किया। इसमें एक विधायक भी शामिल रहे और अखिलेश ने उनकी बात मान ली।

जितिन को पार्टी में लाने वालों की दलील

  • विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिल सकता है जितिन का फायदा
  • राष्ट्रीय स्तर पर जितिन को पार्टी ब्राह्मण चेहरे के तौर पर ला सकती है
  • शाहजहांपुर और उसके आस पास के तीन जिलों में पार्टी को मिल सकता था फायदा
  • जितिन को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उनका इस्तेमाल किया जा सकता है

नेताजी के साथ जुड़ी थी नेताओं की फौज

सपा के MLC ने कहा, ”आप देखिए कि जब नेताजी मुलायम सिंह का दौर था तब हर जाति और तबके के नेताओं को ऊंचे पदों पर रखा जाता था। अमर सिंह, जनेश्वर मिश्र, मोहन सिंह, अंबिका चौधरी, राजा भैया, कुंवर रेवती रमण सिंह, अंबिका चौधरी, नारद राय, ओम प्रकाश सिंह जैसे नेताओं ने नेताजी साथ मिलकर काम किया। अपने पिता जी के राजनीतिक जीवन पर गौर करके ही उन्हें यह फैसला लेना चाहिए था।”

जितिन ने केंद्र में रहने की जताई थी इच्छा
सपा के सूत्र बताते हैं कि जितिन ने अखिलेश यादव से साफ शब्दों में कहा था कि वह अपने आपको केंद्र की राजनीति में ही रखेंगे। यूपी भी लेकर उनकी बहुत बड़ी महत्त्वकांक्षा नहीं है। हालाकि धरहरा और आसपास की कुछ सीटों पर एडजेस्ट करने की बात जरूर की थी। जिसका विरोध पार्टी के उन नेताओं ने किया था जिनको यह चिंता सता रही थी की जितिन के आने के बाद शाहजहां पुर के आस पास उनका प्रभाव पार्टी में कद कम भी जायेगा।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक कुमार पंकज कहते हैं कि, ”जितिन प्रसाद सपा के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते थे। सपा के पास ऐसा कोई ब्राह्मण चेहरा नही है जो राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो। अभिषेक मिश्रा और पवन पांडेय जैसे नेता हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर राष्ट्रीय इतनी पहचान नहीं है जितनी जितिन की है। ऐसे में वो अखिलेश के साथ आते तो सपा को फायदा ही होता।”

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