MP भाजपा की जल्दबाजी वाली लिस्ट की कहानी: सिंधिया बदलाव न करा सकें, इसलिए वर्किंग कमेटी की लिस्ट जाति के साथ जारी की, जबकि ये सिर्फ असेसमेंट के लिए थी


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मध्यप्रदेश3 मिनट पहलेलेखक: राजेश शर्मा

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  • 8 जून की रात 11.30 बजे कार्यसमिति की सूची जारी हुई, भाजपा का लैटर हैड नहीं था
  • एक घंटे के भीतर करेक्शन के बाद आधी रात में फिर जारी की, जाति सूचक कॉलम हटाया

मध्य प्रदेश भाजपा की वर्किंग कमेटी की लिस्ट आखिरकार बंद कमरों में चली लंबी बैठकों के बाद जारी हो गई। पर इस लिस्ट ने भाजपा के अंदरखाने चल रहे कई विवादों को भी सबके सामने रख दिया। दरअसल, फाइनल लिस्ट से पहले मध्य प्रदेश भाजपा के ट्विटर अकाउंट से एक लिस्ट सामने आई। हंगामा मच गया, क्योंकि इसमें सभी के नामों के साथ जाति का जिक्र था। जबकि, ये लिस्ट जातिवाले कॉलम के साथ जारी नहीं की जाती है। बाद में सुधार भी हुआ और फाइनल लिस्ट जारी हुई।

दरअसल, सारा मामला वर्किंग कमेटी के सदस्यों और ज्योतिरादित्य सिंधिया के इसमें दखल से जुड़ा हुआ है। पढ़िए जल्दबाजी वाली भाजपा की लिस्ट की इनसाइड स्टोरी…

8 जून को रात करीब 11.30 बजे भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने कार्यकारिणी की एक लिस्ट जारी कर दी। इसके बाहर आते ही हंगामा मच गया। इसमें कार्यसमिति के सदस्यों के नाम के आगे उनकी जाति का कॉलम भी रखा गया था। लिस्ट बाहर आते ही कांग्रेस ने जातियों का जिक्र होने पर तंज कसे। हलचल भाजपा में भी हुई।

वजह ये कि जो लिस्ट पार्टी ने अपने असेसमेंट के लिए रखी थी, उसे बिना भाजपा के लेटर हेड या किसी पदाधिकारी के दस्तखत के कैसे जारी कर दिया गया। एक घंटे में इस गलती को सुधारा गया। इसी दिन रात 12.30 के बाद ये लिस्ट आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जारी हुई। इस बार हैडर भी था और प्रदेश कार्यालय मंत्री डॉ. राघवेंद्र सिंह के दस्तखत भी।

अब सवाल कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों की गई?
सूत्रों ने भास्कर को बताया कि जिस दिन लिस्ट जारी हुई, उसके अगले ही दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल आ रहे थे। अब उनके आने से पहले लिस्ट जारी इसलिए की गई, ताकि फेरबदल की गुंजाइश न रह जाए। हालांकि, सिंधिया खेमे को एडजस्ट करने का पूरा ध्यान रखा गया है। जो कि इस लिस्ट के नामों से जाहिर भी है।

सुधार के बावजूद उमा का नाम नहीं, आखिर ऐसा क्यों?
लिस्ट सुधरी तो कांग्रेस ने फिर तंज कसा। कहा कि भाजपा को जो मध्य प्रदेश की सत्ता में वापस लाईं, उन उमा भारती का नाम जोड़ लेते तो गलती पूरी तरह सुधर जाती। उमा बाहर क्यों? भास्कर ने जब ये सवाल उठाया तो भाजपा सूत्र बोले कि उमा ने शराब दुकानें खोले जाने पर शिवराज का विरोध करते हुए छतरपुर से शराब बंदी का ऐलान तक कर दिया था। वर्किंग कमेटी से बाहर होने की भी यही वजह मानी जा रही है।

उमा के अलावा वरिष्ठ नेता मेघराज जैन, कप्तान सिंह सोलंकी भी कार्यकारिणी में शामिल नहीं किए गए। लेकिन, जयंत मलैया का नाम इस लिस्ट में है, जो चौंकाता है। मलैया को नोटिस मिलने के बाद भी लिस्ट में जगह दी। संकेत साफ है कि उनके खिलाफ एक्शन नहीं लिया जाएगा।

क्या लिस्ट सुधारने से सारे विवाद खत्म हो गए?
नहीं। लिस्ट में सिंधिया का नाम सातवें नंबर पर रखा गया है। उधर, केंद्र में मंत्री प्रह्लाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम उनके नीचे है। इसके साथ ही वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा, सत्यनारायण जटिया का नाम भी सूची में सिंधिया से नीचे है। यानी तय है कि विवाद होगा। भले अभी ये सामने न आए, पर कभी न कभी तो आएगा ही।

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