NCT बिल पर केजरीवाल के साथ ममता: बंगाल की CM ने केंद्र के कदम को संघीय ढाचे पर सर्जिकल स्ट्राइक बताया, कहा- दिल्ली में मिली हार नहीं पचा पा रही भाजपा


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नई दिल्ली10 मिनट पहले

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लोकसभा में पेश किए गए गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टैरिटरी ऑफ दिल्ली (संशोधन) 2021 यानी NCT बिल के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज हो गया है। मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ मिल गया है। ममता ने केजरीवाल को चिट्‌ठी लिखकर बिल के खिलाफ लड़ाई में अपना समर्थन देने का ऐलान किया।

ममता ने बिल को भारतीय गणतंत्र के संघीय ढांचे पर सर्जिकल स्ट्राइक बताया। ममता ने खत में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से मिली हार पचा नहीं पा रहे हैं। वे दिल्ली में प्रॉक्सी सरकार चलाना चाहते हैं, यही इस बिल को लाने का असल उद्देश्य है।

भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का समय : ममता
उन्होंने लिखा कि मैं पूरी तरह से विश्वास रखती हूं कि अब एकजुट होकर प्रभावी तरीके से लोकतंत्र और संविधान पर भाजपा के हमले के खिलाफ लड़ाई लड़ने का समय आ गया है। मैं खासकर राज्य सरकारों की शक्तियों को कम करके उन्हें महज नगर निगम के स्तर तक सीमित कर देने की भाजपा की साजिश के खिलाफ हूं। मैं देश भर में सभी गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर आपको समर्थन देने की अपील करूंगी।

TMC केजरीवाल के साथ : ममता
उन्होंने लिखा कि आपका संघर्ष मेरा संघर्ष है। मैं और मेरी पार्टी तृणमूल कांग्रेस, केंद्र सरकार के दिल्ली के मुख्यमंत्री की शक्तियां कम करके उसे उपराज्यपाल के अधीन लाने वाले चालाकी से भरे, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक कदम के खिलाफ आपके और आपके सैद्धांतिक विपक्ष के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

बिल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ : केजरीवाल
इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 15 मार्च कहा था कि ये बिल कहता है कि दिल्ली में सरकार का मतलब उपराज्यपाल होगा, तो चुनी हुई सरकार क्या करेगी? सभी फाइल्स उपराज्यपाल के पास जाएंगी। ये सुप्रीम कोर्ट के 4 जुलाई 2018 के फैसले के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि फाइल्स उपराज्यपाल को नहीं भेजी जाएंगी। चुनी हुई सरकार सभी फैसले लेगी और उपराज्यपाल को फैसले की कॉपी ही भेजी जाएगी।’

कांग्रेस भी कर रही विरोध
वहीं कांग्रेस भी बिल के खिलाफ सरकार की आलोचना कर रही है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने 16 मार्च को सोशल मीडिया के जरिए कहा था कि अगर बिल संसद में पास हुआ, तो दिल्ली में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। दिल्ली की चुनी हुई सरकार उपराज्यपाल के दरबार में सिर्फ याचिकाकर्ता बनकर रह जाएंगे। अब उपराज्यपाल गृह मंत्रालय के जरिए दिल्ली पर आक्रामक तरीके से राज करेंगे।

इसलिए हो रहा विरोध
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र द्वारा 15 मार्च को पेश किए गए इस नए बिल के पास होने के बाद दिल्ली में उपराज्यपाल के पास अधिक अधिकार होंगे। विधानसभा से इतर भी कई ऐसे मामले होंगे, जिनमें अब राज्य सरकार को उपराज्यपाल की अनुमति लेना जरूरी होगा। विधायिका से जुड़े फैसलों के लिए सरकार को उपराज्यपाल को 15 दिन पहले और प्रशासनिक फैसलों में 7 दिन पहले ही मंजूरी लेनी होगी।

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