SC राइट टु रिजेक्ट पर सुनवाई को तैयार: सुप्रीम कोर्ट अब चुनाव में NOTA की भूमिका तय करेगा, केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट तय करेगा कि NOTA का चुनाव में कोई महत्व होगा या नहीं। -फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में ज्यादातर लोग चुनाव के समय NOTA का बटन दबाते हैं, तो क्या उसका चुनाव रद्द होना चाहिए और नए सिरे से चुनाव कराया जाना चाहिए? यह नोटिस कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग को चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस रामसुब्रमण्यन की बेंच ने जारी किया है। दरअसल, यह मामला लोगों को राइट टु रिजेक्ट देने के अधिकार से जुड़ा है।

याचिका में कहा- राइट टू रिजेक्ट के अधिकार से लोगों को मिलेगी पावर
कोर्ट में BJP नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि राइट टु रिजेक्ट और नए चुनाव करने का अधिकार मिलने से लोगों को अपनी नाराजगी जाहिर करने का अधिकार मिलेगा। अगर मतदाता चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार की पृष्टभूमि और उनके काम से खुश नहीं हैं, तो वह NOTA का चुनाव कर सकते हैं। जो मतदाता के अधिकार को और मजबूत करेगा।

याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में सीनियर वकील मनेका गुरुस्वामी मौजूद रहीं। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि अगर 99% वोटर्स NOTA का बटन दबाते हैं, तो उसका कोई महत्व नहीं है। बाकि 1% वोटर्स के वोट तय करते हैं कि चुनाव कौन जीतेगा। इस वजह से NOTA पर सबसे ज्यादा वोट पड़ने पर उस जगह का चुनाव रद्द होना चाहिए। लोगों के वोट का सम्मान होना चाहिए।

CJI ने पूछा ऐसे में तो कोई उम्मीदवार चुनाव नहीं जीतेगा
इस पर CJI ने पूछा कि अगर ऐसा होता है, उस जगह कोई भी उम्मीदवार नहीं जीतेगा, वो जगह खाली रह जाएगी। ऐसे में विधानसभा और संसद का गठन कैसे होगा? इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अगर NOTA पर वोट ज्यादा पड़ते हैं। कोई उम्मीदवार नहीं जीतता है। तो समय रहते दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में सब नए उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

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