SCO मीटिंग: अजीत डोभाल अगले हफ्ते दुशान्बे जाएंगे, पाकिस्तान के NSA मोईद यूसुफ भी मीटिंग में शिरकत करेंगे


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नई दिल्ली/दुशान्बे4 मिनट पहले

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अगले हफ्ते SCO मीटिंग में शामिल होने ताजिकिस्तान जाएंगे। (फाइल)

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में अगले हफ्ते शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की मीटिंग होगी। भारत की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इसमें शिरकत करेंगे। इस मीटिंग में पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मोईद यूसुफ भी हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि दोनों देशों के NSA किसी सार्वजनिक मंच पर पहली बार एक साथ नजर आएंगे। हालांकि, पिछले दिनों कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के NSA के बीच दुबई में बैकडोर बातचीत हुई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसे स्वीकार किया था।

अलग से बातचीत की पुष्टि नहीं
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि क्या इस मीटिंग के इतर डोभाल और यूसुफ की मुलाकात होगी। इस बात SCO मीटिंग की अध्यक्षता ताजिकिस्तान कर रहा है। संगठन में शामिल देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने नवंबर 2020 में हुई मीटिंग में फैसला किया था कि अगली बैठक की मेजबानी इस बार ताजिकिस्तान को सौंपी जाए। इसके बाद यह मीटिंग दुशान्बे में आयोजित की जा रही है।

SCO में शामिल देश
रूस
चीन
भारत
पाकिस्तान
कजाखस्तान
किर्गिस्तान
ताजिकिस्तान
उज्बेकिस्तान

पिछली मीटिंग से बाहर आ गए थे डोभाल
SCO की पिछली मीटिंग में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव साफ तौर पर देखा गया था। दरअसल, मीटिंग के दौरान पाकिस्तान ने जो नक्शा पेश किया था, वो विवादित था। यह संगठन के नियमों के खिलाफ था और इसके विरोध में अजीत डोभाल मीटिंग से उठकर बाहर आ गए थे।

इसी साल मार्च में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तानी फॉरेन मिनिस्टर शाह महमूद कुरैशी दुशान्बे में ही आयोजित ‘हार्ट ऑफ एशिया’ समिट में शामिल हुए थे। हालांकि, एक मंच पर होते हुए भी दोनों नेताओं के बीच दुआ-सलाम तक नहीं हुई थी। हाल के दिनों में पाकिस्तान सरकार और फौज ने भारत के खिलाफ प्रोपेगंडा में भी कमी की है। एलओसी पर भी सीजफायर काफी हद तक कामयाब कहा जा सकता है।

बदल रहे हैं पाकिस्तान के सुर
अप्रैल में पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था- हमें पिछली बातें भुलाकर, नई शुरुआत करनी चाहिए। भारत और पाकिस्तान को मिलकर पूर्वी और पश्चिमी एशिया को जोड़ने के लिए भी आगे आना चाहिए, इससे अमन और खुशहाली आएगी। यह पुरानी बातों को दफन करके आगे जाने का वक्त है। पाकिस्तान में इस बयान के मायने ये निकाले गए कि फौज भी अब कश्मीर मुद्दे पर सरेंडर कर चुकी है।

इमरान के तेवर फौज से अलग
इमरान खान को विपक्ष इलेक्टेड के बजाए सिलेक्टेड प्राइम मिनिस्टर कहता है। आरोप है कि वे फौज की मदद से सत्ता तक पहुंचे। लेकिन, एक ओर जहां बाजवा अमन की बात कर रहे हैं, वहीं इमरान का कहना है कि भारत को कश्मीर में अनुच्छेद 370 और धारा 35ए बहाल करनी होगी, तभी उससे बातचीत होगी। पिछले दिनों उनके वित्त मंत्री ने भारत से गेहूं और कपास के आयात की मंजूरी दी थी। कुछ ही घंटे बाद कैबिनेट ने यह फैसला पलट दिया था।

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