UP में ऑक्सीजन नहीं, पर शराब हाजिर है जनाब: CM कोरोना मीटिंग में, DM शराब दुकानें खुलवाने में जुटे; मयखानों पर जुट रही भीड़ बन सकती है सुपर स्प्रेडर


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लखनऊ5 मिनट पहले

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ये फोटो यूपी के अलग-अलग जिलों की हैं, जहां शराब की दुकानें खुलीं तो भीड़ उमड़ पड़ी।

  • राज्य में जहरीली शराब पीने से अम्बेडकरनगर, आजमगढ़ और बदायूं में 24 लोगों को जान भी जा चुकी है

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से भले ही मरीजों की मौत हो जाए, लेकिन आपको शराब की कमी महसूस नहीं होगी। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां कोरोना रोकने के लिए मीटिंग में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर उनके DM शराब की दुकानों को खुलवाने में लगे हुए हैं।

लखनऊ में अभी शराब की दुकानें बंद हैं, लेकिन ज्यादातर जिलों में दुकानें खुली हैं। इन दुकानों पर उमड़ी भीड़ कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रही है। लोग झोला भर-भरकर शराब खरीद रहे हैं। ऐसे में यह भीड़ कोरोना संक्रमण का सुपर स्प्रेडर बन सकती है।

यह आलम तब है, जब राज्य में जहरीली शराब पीने से अम्बेडकरनगर, आजमगढ़ और बदायूं में 24 लोगों को जान जा चुकी है।

दरअसल, शराब विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन ने पिछले दिनों सरकार से कोरोना कर्फ्यू के कारण बंद पड़ी दुकानों को खोलने की मांग की थी। दुकानें बंद होने से कई जिलों में जहरीली शराब की तस्करी भी बढ़ गई थी।

कई जिलों के डीएम के पास शराब की दुकान खोलने के लिए आबकारी विभाग की चिट्‌ठी भी पहुंच गई थी। जिसके चलते योगी सरकार ने प्रदेश में शराब की दुकानों खोलने को लेकर फैसला डीएम पर छोड़ दिया था। वहीं, माना जा रहा है कि राजस्व के नुकसान से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।

मेरठ: झोलों में भरकर ले जाते रहे बोतल
मेरठ की सड़कों पर ऐसा लगने लगा है कि शराब के ठेकों ने कोरोना संक्रमण के कहर को पीछे छोड़ दिया है। शराब के ठेके खुले तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। 2 गज की सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर दो इंच का फासला भी नजर नहीं आया। लोग बैग और झोलों में शराब की बोतलें भरकर ले जाते नजर आए। इतना ही नहीं, दिल्ली रोड स्थित शराब के ठेके पर तो दो पुलिसकर्मी वर्दी पहने चार-पांच बोतल खरीदते नजर आए।

मेरठ में पति-पत्नी भी शराब खरीदते दिखे।

मेरठ में पति-पत्नी भी शराब खरीदते दिखे।

झांसी: दुकानें खुलने से पहले ही कतारें लग गईं
झांसी में भी डीएम ने शराब की दुकानों को खोलने की इजाजत दे दी है। इसके बाद से तय समय से पहले ही दुकानों के बाहर शौकीनों की कतारें भी नजर आने लगीं। जिले में देसी-विदेशी शराब और बीयर की 374 दुकानें हैं। कोरोना कर्फ्यू के चलते इन सभी दुकानों के शटर बंद हो गए थे। इस दरमियान शराब की कालाबाजारी भी जोरों पर चली तथा नकली शराब के कारोबारियों ने मौके का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जबकि, कच्ची शराब का धंधा भी जोर पकड़ रहा था।

दुकानें खुलीं तो पुलिसकर्मी भी पीछे नहीं रहे। मेरठ में दिल्ली रोड स्थित ठेके से शराब खरीदते पुलिस वाले।

दुकानें खुलीं तो पुलिसकर्मी भी पीछे नहीं रहे। मेरठ में दिल्ली रोड स्थित ठेके से शराब खरीदते पुलिस वाले।

बदायूं: जहरीली शराब पीने से 4 की मौत के बाद भी अवैध शराब बिक रही
बदायूं में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देसी शराब का क्वार्टर 140 रुपए में देने की बात कहता एक व्यक्ति नजर आ रहा है। यह वीडियो उसावां थाना क्षेत्र की पुलिस चौकी हडौरा के पास के ठेके के करीब का बताया जाता है। यहां से हड़ौरा पुलिस चौकी की दूरी मात्र कुछ कदम दूर है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जहां सरकार ने लाॅकडाउन में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है, वहां शराब माफिया खुलेआम सड़क किनारे मोटरसाइकिल से शराब कैसे बेच पा रहा है। जिले में हाल ही में जहरीली शराब से 4 लोगों की मौत हो चुकी है।

बदायूं में तस्कर खुलेआम सड़क किनारे देसी शराब बेच रहे हैं।

बदायूं में तस्कर खुलेआम सड़क किनारे देसी शराब बेच रहे हैं।

बहराइच: दुकान खुलते ही उमड़ पड़े शराबी
बहराइच में लगातार बंदी के बीच मंगलवार को शराब की दुकान खुलने से एकाएक भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सुबह से ही दुकानों पर जम गए। बहुत से लोग पूरे हफ्ते के लिए शराब खरीद ले गए।

बहराइच में दुकान खुलते ही लोगों की भीड़ लग गई। यहां न कोई लाइन दिखी, न कोई गाइडलाइन।

बहराइच में दुकान खुलते ही लोगों की भीड़ लग गई। यहां न कोई लाइन दिखी, न कोई गाइडलाइन।

सुल्तानपुर: भीड़ रोकने में पुलिस नाकाम, ज्यादा दाम पर बिक रही शराब
सुल्तानपुर में शराब बिक्री के नाम पर दबंग दुकानदार मनमानी वसूली कर रहे हैं। अधिकतर शराब की दुकानों पर भीड़ लगी रही। लेकिन जिला प्रशासन मौन है। जिले के कई क्षेत्रों में अंग्रेजी व देशी शराब की बिक्री अधिक दामों पर की जा रही है। दुकानदार प्रिंट रेट से दोगुना पर शराब बेच रहे हैं।

लोग इस कदर शराब खरीदनें में मस्त हैं कि कोरोना संक्रमण को भी भूल गए हैं।

लोग इस कदर शराब खरीदनें में मस्त हैं कि कोरोना संक्रमण को भी भूल गए हैं।

आबकारी संघ ने भी दुकानें खोलने की मांग की थी
यूपी लिकर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शराब की दुकानों को खोलने की इजाजत मांगी थी। एसोसिएशन का कहना था कि बंदी की वजह से रोजाना 100 करोड़ का नुकसान हो रहा है। साथ ही उनका तर्क था कि कोरोना कर्फ्यू की गाइडलाइन में भी दुकानों के बंद करने का कोई जिक्र नहीं है।

सरकार को लोगों की जान की नहीं, कमाई की चिंता

  • सरकार ने 2021-22 में आबकारी से 34,500 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इस साल आबकारी नीति में भी बदलाव किया गया है। 2020-21 में अनुमानित राजस्व 28,340 करोड़ रुपये के मुकाबले, 2021-22 के लिए अपेक्षित राजस्व 34,500 करोड़ रुपये है।
  • सरकार को दिए प्रस्ताव में आबकारी विभाग ने कहा है कि अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र में शराब की बिक्री रुकने से हर महीने करीब 29 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान होगा जो प्रदेश आर्थिक संकट पैदा करेगा। इस भारी भरकम आमदनी के लिए सरकार ने संक्रमण के फैलाव को नजरअंदाज करते हुए शराब की बिक्री का आदेश जारी कर दिया।

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