UP में धर्मांतरण के लिए फंड दे रही थी ISI: इस्लामिक दावा सेंटर के नाम पर अलग-अलग देशों से फंड आते थे, इसका बेस नोएडा में था; मूक-बधिर और गरीब लोगों को बनाते थे निशाना


लखनऊ13 मिनट पहले

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नोएडा डेफ सोसायटी के कर्मचारियों से पूछताछ ATS कर रही है। जल्द ही बड़ा खुलासा हो सकता है।

  • 18 छात्रों के धर्मांतरण के बाद भी प्रबंधन को नहीं लगी भनक, नोएडा डेफ सेंटर की महिला प्रबंधक से एटीएस कर रही पूछताछ

उत्तर प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने सोमवार को दो मौलानाओं जहांगीर और उमर गौतम को लखनऊ स्थित एक बड़े मुस्लिम संस्थान से पकड़ा है। ये लोग बड़े पैमाने पर यूपी में हिंदुओं को बरगलाकर उनका धर्म परिवर्तन कर रहे थे। इनसे पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। ATS का दावा है कि कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का सोशल फेस बनकर काम करने वाली सोशल डेमोक्रेटिव पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) पर शिकंजा कसने के बाद इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) को खड़ा किया गया था।

यानी ये तीनों संगठन एक ही है। ये लोग मिलकर हिंदू छात्रों, महिलाओं, मूक-बधिर और गरीब लोगों का धर्म परिवर्तन करवा रही थी। इसके लिए ISI समेत कई इस्लामिक देशों से फंड भी जुटाया जा रहा था। जानकारी में यह भी आया कि दोनों मौलानाओं ने कानपुर और गुरुग्राम के दो छात्रों को बरगलाकर उनका धर्म परिवर्तन करा दिया। इस बात की भनक बच्चों के अभिभावकों को नहीं लगी। दोनों बच्चों को दीनी (इस्लामिक बातों) पढ़ाई के लिए दक्षिण भारत भेजा गया।

नोएडा में 18 बच्चों का धर्मांतरण, संस्था के प्रबंधक से पूछताछ जारी

ATS की जांच में सामने आया कि नोएडा डेफ सोसाइटी स्कूल आठ कमरों के मकान में चल रहा है। इसकी स्थापना 2005 में हुई थी। मौजूदा समय मे यहां 35 बच्चों का पंजीकरण है, जिसमें 12 बच्चे जम्मू कश्मीर के मुस्लिम परिवार से हैं। नोएडा से ही संचालित इस्लामिक दावा सेंटर ने नोएडा डेफ सोसाइटी के 18 मूक बधिर बच्चों का 2 साल के भीतर धर्मांतरण करवा दिया और स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक भी नहीं लगी। इस इनपुट के बाद ATS का शक गहराया। अब ATS नोएडा डेफ सोसाइटी की प्रबंधक रूमा रोका को लखनऊ स्थित यूपी ATS के मुख्यालय लाकर पूछताछ कर रही है। हालांकि रूमा रोका का कहना है कि बच्चे कैसे इस संस्था के जाल में फंसकर इस्लाम धर्म स्वीकार कर रहे थे, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

SDPI के सदस्यों से भी पूछताछ करने में जुटी ATS

ATS अफसरों के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन में पहली बार सोशल डेमोक्रेटिव पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का चेहरा सामने आया था। अफसरों के मुताबिक SDPI सिमी समर्थित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सोशल और पॉलिटिकल फेस है। यह संस्था PFI के लिए दुनिया भर के इस्लामिक देशों से फंड जुटाती है। 2019 में CAA (सिटिजन एमेंडमेंट एक्ट) के विरोध में हुई हिंसा में PFI सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद SDPI का खुलासा हुआ था।

रिमांड लेकर पूछताछ करेगी ATS

इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस संगठन पर लगातार बनी हुई है। इसकी वजह से विदेशी फंड जुटाने के लिए दो साल पहले इसकी जगह दावा इस्लामिक सेंटर बनाया गया। इस संस्था को फंड जुटाने के साथ हिंदुओं का धर्मांतरण करवाने का भी टास्क दिया गया था। ATS अफसरों का कहना है कि मामले की तह तक जाने के लिए उमर और जहांगीर की रिमांड ली जाएगी।

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