UP में पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का आदेश: अखिलेश सरकार के समय बने आरक्षण नियम ही लागू होंगे, कोर्ट में योगी सरकार ने माना आरक्षण लागू करने में गलती हुई


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प्रयागराज16 मिनट पहले

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हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को 27 मार्च तक वोटर लिस्ट जारी करने और 25 मई तक चुनाव पूरे कराने का आदेश दिया है।

उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि साल 2015 को बेस मानकर आरक्षण लागू हो। यानी, अब सूबे में चुनाव का आधार वही नियम बनेंगे, जो अखिलेश यादव की सरकार ने बनाए थे। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इनमें बदलाव कर दिया था। इस बदलाव के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगी थी, जिस पर अदालत ने यह आदेश दिया है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल राघवेंद्र सिंह ने माना कि सरकार से आरक्षण प्रक्रिया लागू करने में गलती हुई है। यह तथ्य सामने आने के बाद अदालत ने पंचायत चुनाव को 25 मई तक पूरा करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही चुनाव आयोग को 27 मार्च तक संशोधित आरक्षण सूची जारी करने का निर्देश भी दिया है। प्रदेश सरकार इससे पहले 17 मार्च को ही आरक्षण की संशोधित सूचित जारी करने की तैयारी में थी। इससे पहले इलाहाबाद की एक डिवीजन बेंच ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को 15 मई तक पूरा करने के निर्देश दिए थे।

अजय कुमार की जनहित याचिका पर कोर्ट का फैसला
यह निर्देश न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने अजय कुमार की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर पारित किया था। इस याचिका में 1995 को 20 साल मानकर आरक्षण तय करने को चुनौती दी गई थी। अजय कुमार की जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने आरक्षण की फाइनल सूची जारी करने पर रोक लगा दी थी और आरक्षण की प्रक्रिया पर सरकार और राज्य चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।

याचिका में आरक्षण प्रकिया की गलतियां बताई गई थीं
आरक्षण को लेकर दायर की गई याचिका में 11 फरवरी 2021 के UP शासनादेश को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू किए जाने संबंधी नियमावली के नियम 4 के तहत जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत की सीटों पर आरक्षण लागू किया जाता है। इसके साथ ही कहा गया कि आरक्षण लागू के संबंध में 1995 को मूल साल मानते हुए 1995, 2000, 2005 और 2010 के चुनाव सम्पन्न कराए गए थे लेकिन 16 सितंबर 2015 को एक शासनादेश जारी करते हुए साल 1995 के बजाय साल 2015 को मूल साल मानते हुए आरक्षण लागू किए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई थी।

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