UP में BJP और RSS का मिशन 2022: संगठन और सरकार के बीच तालमेल बैठाने पर टॉप लीडरशिप का फोकस, नाराज नेताओं को मनाने के लिए PMO ने संभाली कमान


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लखनऊ3 मिनट पहलेलेखक: विद्या शंकर राय

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जाने से पहले अब RSS और BJP का पूरा फोकस सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करना है। इसकी वजह कार्यकर्ताओं की नाराजगी और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का धरातल पर नहीं पहुंचना है। BJP के शीर्ष नेताओं का कहना है की हर जिले में अब मंत्रियों की जवाबदेही तय होगी और अगर उसके बाद भी कार्यकर्ताओं की शिकायत आई तो मंत्रियों के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों दिल्ली में हुई लंबी बैठकों के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी ने खुद ही पहल करते हुए असंतुष्ट और हाशिए पर खड़े नेताओं से बातचीत शुरु कर दी है।

बताया जा रहा है की संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, BJP के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी एल संतोष, उत्तर प्रदेश BJP के यूपी प्रभारी राधा मोहन सिंह के लखनऊ दौरे के बाद दिल्ली में हुई बैठकों के बाद अब संघ और BJP का शीर्ष नेतृत्व यूपी में ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। इन सभी नेताओं ने अपनी रिपोर्ट RSS और BJP के शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी थी। इन बैठकों के बाद ही अब यूपी में संगठन और सरकार के बीच पैदा हुई खाई को दूर करने की कवायद शुरू कर दी गई है।

बड़ी बैठकों के बाद अब ग्राउंड केनेक्टिविटी पर जोर

बड़े नेताओं के लखनऊ दौरे के बाद जो बातें सामने आईं थीं उसके मुताबिक, कार्यकर्ताओं की नाराजगी की वजह से ही ग्राउंड लेवल पर लोगों के बीच BJP के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि केंद्र और राज्य की योजनाओं की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। समय रहते इस पर फोकस करने के लिए ही मंत्रियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

पार्टी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कहते हैं, मंत्रियों कि यह पहली जिम्मेदारी है कि वह लोगों की समस्याओं के साथ ही साथ कार्यकर्ताओं की परेशानियों का भी निपटारा करें। इससे पार्टी को लोगों से कनेक्टिविटी बनाने में मदद मिलेगी। केंद्र और राज्य की योजनाओं को लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

हालांकि UP सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, संघ और पार्टी की तरफ से ”क्लियर मैसेज” है की अब यदि कार्यकर्ताओं की शिकायत संगठन में उपर तक पहुंची तो मंत्रियों पर कार्रवाई होनी तय है। कार्यकर्ताओं को सरकार और संगठन के बीच ब्रिज की तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। मंत्री ने आगे कहा, बैठकों से यही निष्कर्ष निकला है कि जब तक सरकार कि योजनाओं को जब तक ग्राउंड लेवल पर नहीं उतारा जायेगा तब तक विरोधी पार्टियों को काउंटर करना मुश्किल है।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने का फार्मूला

  • कार्यकर्ताओं कि नाराजगी दूर करने के लिए तय होगी मंत्रियों की जवाबदेही
  • UP में प्रभारी मंत्रियों को मिलेगी ज्यादा ताकत, संगठन और सरकार में बनाना होगा समन्वय
  • दोबारा ऊपर तक शिकायत पहुंची तो प्रभारी मंत्रियों कि होगी सरकार से छुट्टी
  • कार्यकर्ताओं और नेताओं की समस्याओं के समाधान की हर संभव कोशिश की जाएगी

प्रभारी मंत्रियों को मिलेगी ज्यादा पावर, जवाबदेही भी तय होगी

शासन से जुड़े एक वरिष्ठ IAS अधिकारी ने भास्कर को बताया कि कार्यकर्ताओं, नेताओं, और पदाधिकारियों कि समस्यायों के समाधान के लिए अब प्रभारी मंत्रियों को ज्यादा पावर दी जाएगी जिससे वो कार्यकर्ताओं कि समस्यायों का समाधान कर सकें।

IAS अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले भी कैबिनेट की बैठक में सीएम योगी ने केंद्र व राज्य की योजनाओं को पूरा करने और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी दूर करने के लिए प्रभारी मंत्रियों को और अधिक ताकत देने और उनकी जवाबदेही तय करने को लेकर बातचीत हुई थी। इस पर मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी अपनी सहमति व्यक्त की थी। इसको लेकर जल्द ही आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

PMO ने संभाली कमान, मोदी खुद कर रहे हैं बात

शासन के इस वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया की संघ और BJP के आला कमान ने जो सर्वे कराया है, उसने पार्टी को काफी चिंता में डाल दिया है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब वैसे नेताओं को पीएमओ से भी फोन कॉल जा रहे हैं, जो पार्टी से किसी न किसी वजह से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं और पिछले चार सालों से हाशिए पर हैं। पीएम मोदी खुद ही वैसे नेताओं से बात कर इनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। वो हर रोज कुछ नेताओं से बात कर सरकार और संगठन के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

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